Betul Samachar: हादसे रोज, लेकिन ट्रैफिक पुलिस आधी भी नहीं

1.50 लाख आबादी वाले बैतूल की यातायात व्यवस्था एक सूबेदार के भरोसे
Betul Samachar: बैतूल। जिले में सड़क दुर्घटनाएं अब आम होती जा रही हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग, स्टेट हाईवे और तेजी से बढ़ते शहरी यातायात के बीच हालात ऐसे हैं कि शायद ही कोई दिन ऐसा गुजरता हो, जब जिले के किसी न किसी हिस्से से सड़क हादसे की खबर न आती हो। इसके बावजूद जिले की यातायात व्यवस्था गंभीर स्टाफ संकट से जूझ रही है। स्थिति यह है कि 45 पद रिक्त होने के कारण पूरे जिले की ट्रैफिक व्यवस्था महज 22 कर्मचारियों के भरोसे चल रही है।

बैतूल जिले की भौगोलिक स्थिति और सड़क नेटवर्क इसे प्रदेश के महत्वपूर्ण यातायात केंद्रों में शामिल करते हैं। जिले से होकर भोपाल-नागपुर फोरलेन राष्ट्रीय राजमार्ग गुजरता है, जिस पर प्रतिदिन हजारों वाहनों की आवाजाही होती है। वहीं सारणी-परासिया मार्ग, आमला-छिंदवाड़ा स्टेट हाईवे समेत कई प्रमुख मार्गों पर भी यातायात का दबाव लगातार बढ़ रहा है। दूसरी ओर शहर की आबादी करीब डेढ़ लाख तक पहुंच चुकी है और वाहनों की संख्या भी हर साल बढ़ रही है।

जिम्मेदारी बड़ी, लेकिन अमला आधा भी नहीं
यातायात थाना बैतूल के स्वीकृत पदों की स्थिति देखें तो विभाग ने कुल 61 पद स्वीकृत कर रखे हैं, लेकिन इनमें से केवल 22 पदों पर ही कर्मचारी उपलब्ध हैं, जबकि 45 पद रिक्त हैं। यानी स्वीकृत बल का एक बड़ा हिस्सा वर्षों से खाली पड़ा है। सबसे चिंताजनक स्थिति अधिकारियों की है। यातायात शाखा में डीएसपी और निरीक्षक स्तर का एक भी अधिकारी तैनात नहीं है। पूरी शाखा का संचालन केवल एक सूबेदार के भरोसे किया जा रहा है।
आरक्षकों की सबसे ज्यादा कमी
विभागीय आंकड़ों के अनुसार सबसे अधिक कमी आरक्षक स्तर पर है। 40 स्वीकृत पदों के मुकाबले केवल 7 आरक्षक कार्यरत हैं और 32 पद खाली पड़े हैं। इसी तरह 3 उपनिरीक्षकों के पदों में से 2 रिक्त हैं, जबकि 8 सहायक उपनिरीक्षकों के पदों में से 4 खाली हैं।
हर मोर्चे पर ट्रैफिक पुलिस की जिम्मेदारी
यातायात पुलिस की जिम्मेदारी केवल चौराहों पर वाहनों को नियंत्रित करने तक सीमित नहीं है। दुर्घटनाओं की रोकथाम, स्कूलों और बाजार क्षेत्रों में यातायात प्रबंधन, वीआईपी ड्यूटी, त्योहारों और आयोजनों के दौरान व्यवस्था बनाए रखना, सड़क सुरक्षा अभियान चलाना और नियम उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई करना भी इसी अमले की जिम्मेदारी है। ऐसे में उपलब्ध स्टाफ के मुकाबले जिम्मेदारियां कई गुना अधिक हैं। यही कारण है कि कई प्रमुख चौराहों और दुर्घटना संभावित स्थानों पर नियमित निगरानी नहीं हो पा रही है।
बढ़ते हादसों के बीच सवाल
जिले में लगातार हो रही सड़क दुर्घटनाओं और बढ़ते ट्रैफिक दबाव के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इतनी कम संख्या में कर्मचारी पूरे जिले की यातायात व्यवस्था को कितने प्रभावी ढंग से संभाल पाएंगे? राष्ट्रीय राजमार्ग से लेकर शहर की व्यस्त सड़कों तक सुरक्षा और यातायात नियंत्रण की चुनौती लगातार बढ़ रही है, लेकिन संसाधन और मानवबल उसी अनुपात में नहीं बढ़ पाए हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते यातायात शाखा में रिक्त पद नहीं भरे गए तो आने वाले वर्षों में बढ़ते वाहन दबाव के साथ यातायात व्यवस्था और सड़क सुरक्षा दोनों बड़ी चुनौती बन सकती हैं।
फैक्ट फाइल
बैतूल शहर की आबादी : लगभग 1.50 लाख
यातायात शाखा में स्वीकृत पद : 61
वर्तमान उपलब्ध स्टाफ : 22
रिक्त पद : 45
डीएसपी/निरीक्षक स्तर का अधिकारी : 0
सबसे अधिक कमी : आरक्षक स्तर पर 32 पद रिक्त
जिले से गुजरता है भोपाल-नागपुर फोरलेन राष्ट्रीय राजमार्ग
इनका कहना….
मेरी पदस्थापना के बाद यातायात में डेढ़ गुणा बल बढ़ाया है। अभी और स्टाफ बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। कम स्टाफ से समस्या आने की शिकायतों के बाद यह निर्णय लिया है।
वीरेंद्र जैन, एसपी बैतूल




