Betul News: कलेक्टर की कार्रवाई के बाद नई कोयला सुरंग की तलाश में माफिया
Betul News: Mafia in search of new coal tunnel after collector's action

रात के अंधेरे में छान रहे खाक, किसी भी समय शुरु होने की संभावना
Betul News: बैतूल। घोड़ाडोंगरी ब्लॉक की चर्चित तवा नदी पर डुलारा के पास कोयला खनन नई बात नहीं है। खनन का सिलसिला लंबे समय से चला आ रहा है, लेकिन कभी प्रशासन को जानकारी मिलती है, कई बार मामला आगे बढ़ता ही नहीं है। कुछ दिनों से डुलारा में खनन माफियाओं की धमाचौकड़ी ने प्रशासन के अधिकारियों को चौकन्ना किया, तो टीम यहां पहुंच गई। नतीजा हमेशा की तरह वही हुआ, माफिया गैंग कुछ दिनों के लिए भूमिगत हो गई। अब खबर यह है कि यही माफिया गैंग अधिकारियों के निरीक्षण के बाद डुलारा में फिर सक्रिय हो गई है। बीती रात इसी गैंग ने नई कोयला खदानों के लिए सुरंगों की तलाश शुरु कर दी है। यदि सब कुछ ठीक ठाक रहा तो आने वाले कुछ दिनों में काले कारोबार का खेल फिर शुरु हो सकता है।
सूत्र बताते है कि इस बार भी डुलारा में बैतूल से लेकर भोपाल तक की कोयला गैंग काफी सक्रिय है। बारिश खत्म होने के बाद से आने वाले 8 माह तक कोयला निकालने की अधिक संभावना रहती है। इसलिए अक्टूबर माह से भोपाल के सूत्रधार सत्येन्द्र ने कोयला निकालने में माहिर स्थानीय फगन और प्रेम के सहारे पूरी रूप रेखा तैयार कर दी थी। लंबे समय से यह गैंग लगभग दो ट्रक कोयला प्रतिदिन भोपाल से लेकर मंडीदीप तक आसानी से बेचते आ रही है। इस तरह से अवैध कोयला जिले के तीन थाना क्षेत्रों से होकर नर्मदापुरम-सीहोर जिले के आधा दर्जन थाना-चौकियों को पार कर आसानी से गंतव्य स्थान तक पहुंच रहे है। इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि काले कोयले के खेल में कितने के हाथ रंगे हुए है। यदि मामले का खुलासा हो जाएं तो सारी वस्तुस्थिति सामने आ जाएंगी।
दोबारा सक्रिय हुई गैंग
सूत्र बताते है कि कलेक्टर और एसपी के छापे के तीन दिन बाद यह गैंग फिर डुलारा में सक्रिय हो गई है। बीती रात तो सभी ने मोबाइल और टॉर्च की रोशनी में नईकोयला सुरंग की तलाश में कई घंटे नदी के चक्कर काटे। हालांकि इन्हें क्या सफलता मिली है, यह अब तक पता नहीं चल पाया है। सूत्रों ने दावा किया है कि सुबह तक माफियाओं की गैंग एक दर्जन लोगों के साथ तीन वाहनों से डुलारा पहुंचकर नई कोयला खदान की तलाश करते रहेे। सुबह सत्येन्द्र वापस भोपाल चला गया और फगन-प्रेम अपने घर आ गए। सूत्र तो यह भी बताते है कि अगले कुछ दिनों में फिर नए स्थान पर कोयला खनन का काम शुरु हो सकता है।
सबके जिम्मे अगल-अलग काम
अपुष्ट सूत्रों का दावा है कि इस पूरे खेल का सूत्रधार भोपाल का रहने वाला सत्येन्द्र है। इसकी राजनैतिक और प्रशासनिक पकड़ काफी मजबूत होने के कारण अधिकारियों को फोन घनघनाता है। यही सत्येन्द्र डुलारा से कोयला निकलवाकर भोपाल-मंडीदीप में बेचने का वास्तविक किरदार है। स्थानीय फगन की बात करें तो इसका काम अब केवल कोयला निकालकर कमीशन लेने तक सीमित रह गया। पहले फगन इस काम में बराबर का पार्टनर था। अब सिर्फ प्रतीक ही गाड़ी का कमीशन लेते आ रहा है। एक अन्य किरदार प्रेम गाड़ियां लाने और ले जाने का काम कर रहा है। कोयला निकालकर गाड़ियों पर लोड कर बाहर भेजने की मुख्य भूमिका प्रेम की ही है।
इनका कहना..
खनन शुरु होने को लेकर अभी कोई जानकारी नहीं मिली है। यदि दोबारा खनन शुरु होता है तो माफियाओं के मनसूबों को कामयाब नहीं होने दिया जाएगा।
मनीष पालेवार, उप संचालक खनिज बैतूल




