President Smt. Draupadi Murmu visited Betul: विकास की रफ्तार तेजी से बढ़े, पर संस्कृति की जड़ें न कटें: राष्ट्रपति मुर्मू

बैतूल में आध्यात्मिक जागृति से जनजातीय समाज का सशक्तिकरण महासम्मेलन में राष्ट्रपति का संदेश
President Smt. Draupadi Murmu visited Betul: बैतूल। भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने गुरुवार को बैतूल में आयोजित आध्यात्मिक जागृति से जनजातीय समाज का सशक्तिकरणÓ महासम्मेलन में कहा कि किसी भी समाज का वास्तविक सशक्तिकरण केवल आर्थिक प्रगति से नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, आत्मसम्मान, जागरूकता और दायित्वबोध के विकास से होता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि विकास और संस्कृति का संतुलन ही किसी भी सशक्त एवं समृद्ध समाज की आधारशिला है।

कार्यक्रम में मध्यप्रदेश के राज्यपाल मंगूभाई पटेल, केंद्रीय जनजातीय कार्य राज्यमंत्री दुर्गादास उईके, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा राज्यमंत्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल, ब्रह्माकुमारी संस्थान की वरिष्ठ पदाधिकारी राजयोगिनी शैलजा दीदी, राजयोगिनी मंजू दीदी तथा राजयोगी डॉ. बी.के. नथमल सहित बड़ी संख्या में जनजातीय समाज के प्रतिनिधि और श्रद्धालु उपस्थित रहे।

जनजातीय समाज प्रकृति का सबसे बड़ा संरक्षक
राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने कहा कि जनजातीय समुदाय सदियों से प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित कर जीवन जीता आया है। यह समाज धरती, जल, वायु, सूर्य, चंद्रमा और आकाश जैसे पंचतत्वों को पूजनीय मानता है। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज प्राकृतिक संसाधनों का आवश्यकता के अनुसार उपयोग करता है और उनके संरक्षण को सर्वोच्च महत्व देता है। उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया पर्यावरण संकट और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे समय में जनजातीय समाज की जीवनशैली मानवता के लिए एक मार्गदर्शक मॉडल बन सकती है। उनकी परंपराएं और जीवन मूल्य प्रकृति संरक्षण की श्रेष्ठ मिसाल प्रस्तुत करते हैं।

आध्यात्मिक जागृति से मिलेगा सशक्तिकरण का नया मार्ग
राष्ट्रपति ने कहा कि आध्यात्मिक जागृति व्यक्ति को उसकी आंतरिक शक्ति से परिचित कराती है और सकारात्मक सोच को उच्च जीवन मूल्यों से जोड़ती है। वर्तमान समय में जब विश्व तनाव, संघर्ष और युद्ध जैसी परिस्थितियों से जूझ रहा है, तब आध्यात्मिकता और मानवीय मूल्यों का महत्व पहले से कहीं अधिक बढ़ गया है। उन्होंने ब्रह्माकुमारी संस्थान की सराहना करते हुए कहा कि संस्था ने मातृशक्ति को केंद्र में रखकर सेवा, नैतिक मूल्यों, नशामुक्ति, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक उत्थान के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया है।

2047 के विकसित भारत में जनजातीय समाज की होगी महत्वपूर्ण भूमिका
राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने कहा कि भारत ने वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस लक्ष्य की प्राप्ति तभी संभव होगी जब समाज का कोई भी वर्ग विकास की मुख्यधारा से पीछे न रहे। उन्होंने जनजातीय युवाओं को आधुनिक शिक्षा, कौशल विकास और डिजिटल सशक्तिकरण से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया। साथ ही उन्होंने कहा कि विकास की प्रक्रिया में जनजातीय समाज की सांस्कृतिक पहचान, परंपराएं और आध्यात्मिक विरासत सुरक्षित रहनी चाहिए। शाश्वत विकास वही है जो अपनी जड़ों को मजबूत रखते हुए भविष्य के अवसरों का मार्ग प्रशस्त करे।

प्राकृतिक खेती और स्वास्थ्य पर भी दिया जोर
महासम्मेलन परिसर में लगी प्रदर्शनी का अवलोकन करने के बाद राष्ट्रपति ने जनजातीय समाज द्वारा तैयार प्राकृतिक खेती के उत्पादों की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का अत्यधिक उपयोग भूमि की उर्वरता और मानव स्वास्थ्य दोनों के लिए हानिकारक है। प्राकृतिक खेती भारतीय परंपरा का हिस्सा रही है और आज देश पुन: उसी दिशा में आगे बढ़ रहा है।

राज्यपाल और केंद्रीय मंत्री ने भी रखे विचार
राज्यपाल मंगूभाई पटेल ने कहा कि आध्यात्मिक जागृति जनजातीय समाज के सशक्तिकरण का प्रभावी माध्यम है। ध्यान और मेडिटेशन व्यक्ति को मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और आत्मिक संतुलन प्रदान करते हैं। वहीं केंद्रीय राज्यमंत्री दुर्गादास उईके ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के जीवन को संघर्ष, सेवा और कर्तव्यनिष्ठा का प्रेरक उदाहरण बताते हुए कहा कि एक छोटे जनजातीय गांव से निकलकर देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचना भारतीय लोकतंत्र और संविधान की ताकत का प्रतीक है।

महासम्मेलन में राष्ट्रपति ने सेवा, अध्यात्म, सामाजिक समरसता और पर्यावरण संरक्षण को विकसित भारत की आधारशिला बताते हुए सभी नागरिकों से वर्ष 2047 के विकसित भारत के निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया।
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