Betul Dr. Shyam Soni : बिना इंजेक्शन-दवाई के दिल की धड़कन कंट्रोल
Betul Dr. Shyam Soni: Heartbeat control without injection or medicine.

डॉक्टर श्याम सोनी की वाल्सल्वा मैन्यूअर पद्धति से कई मरीजों को मिला बेहतर इलाज
Betul Dr. Shyam Soni : (बैतूल)। सामान्यतौर पर कामकाज करते-करते कब किसकी दिल की धड़कन बढ़ जाए, कहा नहीं जा सकता। इसे हल्के में लेने पर बड़े नुकसान से इंकार नहीं किया जा सकता है। इस समय 100 में से 5 मरीजों के साथ इस तरह की परेशानी आम बात हो गई है, लेकिन बैतूल के ह्दय एवं मधुमेह रोग विशेषज्ञ डॉ श्याम सोनी की वाल्सल्वा मैन्यूअर पद्धति से दिल की धड़कन महज चंद मिनटों में सामान्य हो जा रही है। इस पद्धति से हैरतअंगेज और चौकाने वाले परिणाम चिकित्सा क्षेत्र के लिए बड़ी उपलब्धि कही जा सकती है।
खाने-पीने में अनियमित्ता ब्लड प्रेशर और डायबिटिज के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। कुछ मरीज ऐसे हैं भी है जो अनियमित दिनचर्या के कारण मोटापे का भी शिकार हो रहे हैं। चिकित्सा क्षेत्र के जानकार बताते हैं कि अनियमित दिनचर्या से लोगों को कई तरह की बीमारियां घेर रही है। इनमेंं से एक बीमारी बैतूल में भी काफी तेजी से बढ़ी है। सीढ़ी चढ़ने और मेहनत के काम करने पर कई मरीजों की दिल की धड़कन तेज हो जाती है। इसे कई लोग हल्के में लेते हैं, लेकिन समय पर उपाए नहीं करने पर गंभीर परिणाम भी भुगतने पड़ सकते हैं।
अचानक बढ़ जाती है दिल की धड़कन
युवाओं में दिनचर्या के कारण कई बीमारियां बढ़ रही हैं। नियमित रूप से योगा और एक्ससाइज न करने का नतीजा है कि सामान्य तौर पर एक मिनट में 80 से 100 मर्तबा आम व्यक्ति का दिल धड़कता है। बीमार या तनाव पर रहने पर यह प्रक्रिया 150 तक पहुंच जाती है, लेकिन किसी मरीज की दिल की धड़कन 200 के पार हो जाए तो खतरे से कम नहीं कहा जा सकता है। ऐसे लोग इसे सामान्य बताते हैं, लेकिन समय पर ध्यान न देने पर नुकसान उठाना पड़ सकता है। बैतूल में भी 100 में से 5 मरीज इस तरह की बीमारी से पीड़ित है।
यहां देखें वीडियो…
पलक झपकते ही सामान्य पर आ गई धड़कन
जिले के प्रसिद्ध ह्दय एवं मधुमेह रोग विशेषज्ञ डॉ. श्याम सोनी के सिम्स अस्पताल में वाल्सल्वा मैन्यूअर पद्धति से चंद मिनटों में कंट्रोल किया जा रहा है। पिछले एक पखवाड़ा में उनके अस्पताल में तीन मरीज ऐसे पहुंचे, जिनकी दिल की धड़कन 200 के पार थी। उन्होंने मरीजों को बिना इंजेक्शन और दवाइयों के वाल्सल्वा मैन्यूअर पद्धति से इलाज किया तो 200 से अधिक की धड़कन 80 पर आ पहुंची। ऐसे मामले में मरीजों को घबराहट और बेचेनी हो रही थी, लेकिन डॉ. सोनी ने उन्हें समझाइश दी। इसके परिणाम यह रहे कि इस पद्धति से चंद मिनटों में मरीजों को आराम मिल गया। जिस समय डॉ श्याम सोनी के पास मरीज आए थे तब दिल की धड़कन को कंट्रोल करने वाले इंजेक्शन बाजार में उपलब्ध नहीं थे। इसके बाद उन्होंने वाल्सल्वा मैन्यूअर पद्धति से मरीज को चंद मिनटों में सामान्य परिस्थितियों में ला दिया। बैतूल जैसे छोटे जिले में इस तरह के इलाज से मरीज को राहत मिल सकती है।
इनका कहना….
कुछ बीमारियों में दिल की धड़कने बढ़ जाती है। इसे कंट्रोल किया जाना आवश्यक है। वाल्सल्वा मैन्यूअर पद्धति से बिना इंजेक्शन दवाई के मरीजों को सामान्य परिस्थितियों में लाया जाता है, इससे मरीजों के पैसे व्यर्थ नहीं जाते हैं।
-डॉ. श्याम सोनी, संचालक सिम्स अस्पताल बैतूल।




