Betul Ki Khabar : बारिश के इंतजार में ग्रामीणों का टोटका, मूसल में मेंढक बांधकर गांव में घुमाया
Betul Ki Khabar: Villagers performed a trick while waiting for rain, tied a frog to a pestle and took it around the village

धामन गांव में बच्चों ने निभाई वर्षों पुरानी परंपरा, बारिश के लिए की मन्नत
Betul Ki Khabar : बैतूल। जि़ले में लगातार बारिश न होने से जहां किसान परेशान हैं, वहीं अब ग्रामीण समुदायों ने पारंपरिक मान्यताओं का सहारा लेना शुरू कर दिया है। आठनेर ब्लॉक के ग्राम धामन में बारिश की खेंच से चिंतित ग्रामीणों और विशेष रूप से बच्चों ने गुरुवार रात एक अनूठा टोटका अपनाया। उन्होंने एक मेंढक को पकड़कर पारंपरिक ओखली के मूसल से बांधा और पूरे गांव में घुमाया। बच्चों की इस टोली के पीछे टिन के डब्बे बजाने की आवाजें और बारिश की मन्नतों की गुहार थी, जिससे पूरे गांव का माहौल आध्यात्मिक आस्था और उम्मीदों से भर गया।
यह टोटका कोई नया नहीं, बल्कि वर्षों पुरानी ग्रामीण परंपरा का हिस्सा है, जिसमें माना जाता है कि जब मेंढक को मूसल में बांधकर पूरे गांव में घुमाया जाता है और उस पर पानी डाला जाता है, तो उसकी आवाज निकलती है और यही आवाज इन्द्र देवता को प्रसन्न कर बारिश के द्वार खोलती है। ग्रामीणों की यह मान्यता गहरी आस्था और अनुभव पर आधारित है।
गांव के बुजुर्ग संजय देशकर बताते हैं कि मेंढक को जल का राजा माना जाता है और उसकी टर्राहट बारिश की आहट मानी जाती है। गांव के हर घर के सामने जैसे ही यह टोली पहुंची, वहां के लोग भी इस परंपरा में शामिल हो गए। हर घर से कोई न कोई बाहर निकलकर मेंढक पर पानी डालने लगा। यह नजारा न केवल बच्चों के लिए उत्साहजनक रहा, बल्कि ग्रामीणों के लिए भी एक सामूहिक आशा और आस्था का प्रतीक बन गया। टिन के डब्बों की धुन, बच्चों की मस्ती और बारिश की दुआओं ने गांव की सड़कों को जीवंत बना दिया।
मुसीबतों से छुटकारा दिलाएगी, मेंढक की टर्राहट
जिले में पिछले 25 दिनों से बारिश की कमी बनी हुई है। खेतों में बोवनी तो हो चुकी है लेकिन बारिश न होने से फसलें सूखने की कगार पर हैं। किसानों की चिंता दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है। जलस्तर नीचे गिर रहा है और दूसरी ओर मच्छरों और गंदगी के कारण संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है। इन हालातों में धामन गांव के बच्चों द्वारा किया गया यह प्रयास न केवल बारिश की कामना है, बल्कि ग्रामीण संस्कृति की जीवंत झलक भी है।
यह परंपरा बताती है कि जब आधुनिक साधन जवाब दे देते हैं, तो गांव की आस्था, एकता और परंपराएं एक नई ऊर्जा के साथ सामने आती हैं। मौसम विभाग की भविष्यवाणी कुछ खास राहत नहीं दे रही, लेकिन गांववालों को भरोसा है कि मेंढक की टर्राहट जरूर इन्द्र देव को प्रसन्न करेगी और आसमान से बूंदें बरसेंगी। अब सबकी निगाहें अगले कुछ दिनों पर टिकी हैं। लेकिन सवाल यह है कि,क्या इस टोटके से सचमुच बारिश होगी?




