Politics: राजनीतिक हलचल: सस्ती दीवार घड़ी के गिफ्ट ने आखिर किसे दिया धोखा?? वाशरूम जाते समय किस माननीय के कदम बहके??? मिलता हुआ श्रेय लेने से कैसे चुके नेताजी???? विस्तार से पढ़िए हमारे चर्चित कॉलम राजनीतिक हलचल में……

Politics: Political stir: Who got cheated by the gift of a cheap wall clock??

सस्ती दीवार घड़ी ने दिया धोखा

एक पूर्व माननीय शादियों के सीजन में इस समय लगभग एक हर जगह पहुंच रहे हैं। उनकी खासियत है कि थोक में खरीदी दीवार घड़ी गिफ्ट करना नहीं भूलते। पैकिंग खोलने के बाद जब वैवाहिक परिवार वाले इसे देखते हैं तो पैरो तले जमीन खिसक जाती है। ऐसा ही एक मामला सामने आया है कि जब एक परिजन ने गिफ्ट खोलने शुरू किया तो गिफ्ट पर सबसे पहले नजर पड़ी तो इसमें एक सस्ती दीवार घड़ी निकली, लेकिन वह भी बंद थी। परिजनों ने इसमें नए सेल भी डाले पर शुरू नहीं हुई। चर्चा है कि परिजन इन्हें सुधारने घड़ी की दुकान पहुंचे तो खर्च बता दिया 120 रुपए, जबकि घड़ी की वास्तविक कीमत महज 100 रुपए की बताई जा रही है। आखिर परिजन घड़ी बिना सुधारे घर लौट आए। चर्चा यह भी हो रही है कि बंद दीवार घड़ी देकर पूर्व माननीय सोशल मीडिया पर सस्ता प्रचार कर रहे हैं।

माननीय के कदम आखिर क्यों बहके?

सत्तारूढ़ पार्टी के एक माननीय के लड़खड़ाते कदमों की इन दिनों अचानक चर्चा बढ़ गई है। कहा जा रहा है कि पिछले दिनों बैतूल बाजार के निकट यह माननीय अपने फर्च्यूनर वाहन से उतरकर पास के ही एक वाश रूम का उपयोग करते हैं। हालांकि उस समय उनके कदम लड़खड़ाते हुए देखने पर पेट्रोल पंप पर ईधन डलाने वाले उपभोक्ता और कर्मचारी भी हतप्रद रह गए। लोग अपने-अपने अंदाज से चर्चा करते देखे गए। कुछ मान रहे थे कि पैर में दिक्कत होने के कारण माननीय लड़खड़ा रहे होंगे तो कुछ अलग ही माजरा समझ बैठे। अब वास्तविकता क्या है, अब माननीय से अच्छे से कोई जान नहीं सकता है। बताते चले कि यह माननीय राजनीति में अभी सबसे जूृनियर माने जाते हैं।

मिलता हुआ श्रेय लेने से चुके नेताजी

एक सुरक्षित क्षेत्र के पूर्व माननीय अपने क्षेत्र में खुले टोल प्लाजा का मिलता हुआ श्रेय लेने से चुक गए। दरअसल वे विपक्षी पार्टी के दूसरे गुट से संपर्क में है। पार्टी के दमदार गुट ने इसे हाथो-हाथ लिया और संबंधित क्षेत्र में वाहनों की आवाजाही के लिए राशि लेने पर दमदार प्रदर्शन किया। नतीजा यह निकला की वसूली का काम बंद भी हो गया। विपक्षी पार्टी के इस गुट ने इसका जमकर श्रेय भी लिया। मीडिया ने भी हाथों-हाथ लेकर विपक्षी पार्टी की खूब प्रशंसा की। मामला हाथ से छिटकने के बाद पूर्व माननीय अपने गुट को एकत्रित नहीं कर सके। अब वे इसे अपनी राजनैतिक हार मान रहे हैं, क्योंकि उनका मानना है कि यह प्रदर्शन वे लपक लेते तो प्रदेश अध्यक्ष के सामने अखबारों की कतरन पहुंचाने का अच्छा मौका मिल जाता। अब उन्हें गुट बदलने पर भी पछतावा हो रहा है।

Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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