Prashasanik Kona : प्रशासनिक कोना: पत्रकारों की गिनती में कैसे उलझे नए साहब, वेरिफिकेशन के लिए क्या दिया तर्क?? सफाई मद से आखिर रंग- रोगन के लिए किसने खर्च कर दिए डेढ़ लाख??? बड़े साहब की यह कौनसी अदा, पहली बार क्रेडिट सार्वजनिक करने के पीछे कौनसी है मंशा???? विस्तार से पढ़िए हमारे चर्चित कॉलम प्रशासनिक कोना में…..

पत्रकारों की गिनती में उलझे साहब, अब मार्कशीट और वेरिफिकेशन की बारी!

वर्दी वाले विभाग में नए-नए आए साहब पहली पत्रकारवार्ता के बाद कुछ ऐसे चौंके कि उनके चेहरे के भाव ही चर्चा का विषय बन गए। पत्रकारों की तादाद देखकर शायद उन्हें अपने पुराने कार्यकाल और आज के बदलते दौर के बीच का अंतर समझने में थोड़ा वक्त लगा। तभी किसी जानकार ने धीरे से सलाह दे डाली कि साहब, एक बार इनकी मार्कशीट भी बुलवा लीजिए और पुलिस वेरिफिकेशन भी करवा लीजिए।

अगली पत्रकारवार्ता में आधे चेहरे भी नजर नहीं आएंगे! अब यह सलाह मजाक में दी गई थी या इसके पीछे कोई गहरी प्रशासनिक सोच थी, यह तो सलाहकार ही जानें। लेकिन साहब की पहली पत्रकारवार्ता के इस घटनाक्रम के कई मायने निकाले जा रहे हैं।

जिले में पूर्व पदस्थापना के समय और आज के बदलते मीडिया परिवेश के बीच आए बदलाव को देखकर साहब का हैरत में पड़ना स्वाभाविक भी है। बहरहाल, पत्रकारों की संख्या से चौंकने वाले साहब को अब यह समझना होगा कि समय बदल चुका है, सवाल पूछने वालों की तादाद भी बढ़ी है और जवाबदेही की अपेक्षा भी।

सफाई मद से बंगले की सजावट, साहब की सुविधा में स्वच्छता बजट की खपत!

हरे-भरे विभाग में इन दिनों एक साहब के बंगले की चमक-दमक और सरकारी बजट के इस्तेमाल को लेकर खूब कानाफूसी हो रही है। चर्चा है कि सरकारी निवास पर पार्किंग शेड सहित कुछ निर्माण कार्य कराए गए, जिन पर करीब डेढ़ लाख खर्च हुए।

खास बात यह कि इस खर्च की राशि विभाग के सफाई मद से निकाले जाने की चर्चा है। यानी जिस बजट से परिसर चमकना था, उससे साहब का बंगला संवरने की बात सामने आ रही है। इधर, सोमवार को विभाग के मुखिया खुद बिना तामझाम सफाई व्यवस्था देखने निकल पड़े। परिसर में अपेक्षित सफाई नहीं मिली तो प्रभारी अधिकारी से जवाब भी मांग लिया।

अब बेचारे प्रभारी साहब किस मुंह से बताएं कि सफाई के बजट की चमक कहीं और बिखरने की चर्चा है! वैसे संबंधित साहब बैतूल के पुराने खिलाड़ी हैं। पहले भी यहां रह चुके हैं और पड़ोसी जिले से पदोन्नति पाकर लौटे हैं। अब देखना यह है कि डेढ़ लाख के इस कथित खर्च की जांच होगी या फिर फाइलों में ही सफाई अभियान चलाकर मामला निपटा दिया जाएगा।

चार महीने तक खुद लेते रहे क्रेडिट, अब मातहतों की पीठ थपथपाकर चौंकाया!

सीएम के कार्यक्रम में सबकुछ बेहतर रहा तो बड़े साहब की खुशी टीएल बैठक में देखते ही बनी। समीक्षा के दौरान साहब इतने गदगद हुए कि पहली बार अपने मातहतों की सार्वजनिक रूप से पीठ थपथपा दी। बस फिर क्या था, बैठक में मौजूद नौकरशाहों के चेहरे पर हैरानी के भाव तैरने लगे। आखिर साहब का यह बदला अंदाज अचानक आया कहां से?

दरअसल, पिछले चार महीनों से किसी भी अच्छे काम का क्रेडिट लेने की बारी आती थी तो साहब खुद को सबसे आगे रखने में कोई कसर नहीं छोड़ते थे। मातहत काम करते थे और वाहवाही का खाता साहब के नाम खुलता था। लेकिन इस बार उन्होंने टीम को भी श्रेय देकर सबको चौंका दिया। अब इसे टीम भावना का नया अवतार कहें या सीएम के कार्यक्रम की सफलता का असर, यह तो वक्त बताएगा। फिलहाल मातहतों को तारीफ की एक झलक मिली है। देखना यह है कि आगे भी श्रेय बांटे जाएंगे या मलाई का पूरा हिस्सा फिर साहब की थाली में ही सजेगा!

Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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