Betul Ki Khabar : शास्त्री स्टेडियम में खेल कम, व्यवस्थाओं का खेल ज्यादा

कभी रैली के ट्रैक्टरों से कीचड़, कभी डस्ट हटाने की कवायद, क्रिकेट से बास्केटबॉल तक खिलाड़ी मैदान के लिए परेशान
Betul Ki Khabar : बैतूल। जिला मुख्यालय का एकमात्र लाल बहादुर शास्त्री स्टेडियम इन दिनों खेलों से ज्यादा राजनीतिक और शासकीय आयोजनों के कारण चर्चा में है। क्रिकेट, फुटबॉल, हॉकी, वॉलीबाल सहित कई खेलों के खिलाड़ियों के लिए उपयोगी यह मैदान बारिश के बाद कीचड़ और दलदल से जूझ रहा है। ऊपर से रैलियों और आयोजनों के दौरान बड़े वाहनों की आवाजाही तथा मैदान में डस्ट डालने-हटाने की कवायद ने खिलाड़ियों की परेशानी और बढ़ा दी है।
11 अगस्त को आदिवासी दिवस के दो दिन बाद निकली विशाल रैली के दौरान कई ट्रैक्टर और बड़े वाहन स्टेडियम परिसर के अंदर तक पहुंच गए। इससे मैदान में पहियों के निशान के साथ कीचड़ फैल गया। इसके बाद 13 अगस्त को स्टेडियम से निकलने वाली तिरंगा यात्रा की तैयारियों के दौरान नगर पालिका ने कुछ हिस्सों में डस्ट डलवाई। खेल संगठन की आपत्ति के बाद डस्ट हटाने का काम शुरू कर दिया गया। अब स्थिति यह है कि कई हिस्से दोबारा कीचड़ में तब्दील हो गए हैं।

डस्ट डालें तो चोट का डर, हटाएं तो कीचड़ में फिसलने का खतरा
स्टेडियम में व्यवस्था को लेकर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं। क्रिकेट संघ का कहना है कि मैदान में डस्ट डालने से खिलाड़ियों के गिरने पर चोट लगने का खतरा रहता है। वहीं दूसरी ओर खिलाड़ियों का कहना है कि डस्ट हटने के बाद मैदान में कीचड़ और फिसलन बढ़ गई है, जिससे खेलना और अभ्यास करना मुश्किल हो रहा है। बारिश के चलते फिलहाल क्रिकेट की नियमित प्रैक्टिस प्रभावित है। इसके बावजूद मैदान के कुछ हिस्सों से डस्ट हटाने को लेकर विवाद बना हुआ है। खिलाड़ियों का कहना है कि मैदान की वास्तविक स्थिति को देखते हुए ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए, जिससे सभी खेलों के खिलाड़ियों को सुरक्षित अभ्यास की सुविधा मिल सके।
पैदल रास्ते पर भी कीचड़, आने-जाने में परेशानी
स्टेडियम के अंतिम छोर की ओर पैदल आने-जाने वाले हिस्सों में भी कीचड़ की स्थिति बनी हुई है। यहां डस्ट हटाए जाने के बाद फिसलन और बढ़ गई है। खिलाड़ियों के साथ स्टेडियम आने वाले अन्य लोगों को भी आवाजाही में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
नगर पालिका के समयपाल इसरार कुरैशी द्वारा डस्ट हटाने के लिए मजदूर लगाए जाने की बात भी सामने आई है। खिलाड़ियों का कहना है कि मैदान के एक हिस्से की आपत्ति पर तत्काल कार्रवाई की जा रही है, लेकिन पूरे स्टेडियम की स्थिति सुधारने के लिए स्थायी समाधान नजर नहीं आ रहा।

बास्केटबॉल टर्फ पर दूसरे खेलों के खिलाड़ी, बढ़ा विवाद
बारिश के कारण मुख्य मैदान में घास और दलदल की स्थिति होने से इन दिनों छात्रावास के विद्यार्थियों, अग्निवीर अभ्यर्थियों और अन्य खिलाड़ियों ने बास्केटबॉल के दोनों टर्फ को अभ्यास के लिए इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। सुबह के समय यहां क्रिकेट, वॉलीबाल, फुटबॉल और बैडमिंटन के खिलाड़ी भी पहुंच रहे हैं।
बास्केटबॉल का अभ्यास करने वाले वरिष्ठ खिलाड़ियों द्वारा अन्य खेलों के खिलाड़ियों को टर्फ से हटाने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं। इससे मैदान के सीमित संसाधनों को लेकर खेल संगठनों के बीच विवाद की स्थिति बन रही है। खिलाड़ियों का कहना है कि जिला मुख्यालय पर जब एक ही प्रमुख स्टेडियम में कई खेलों का अभ्यास और प्रतियोगिताएं होती हैं तो मैदान का उपयोग किसी एक खेल या संगठन की सुविधा के अनुसार नहीं होना चाहिए। आरोप है कि क्रिकेट एसोसिएशन के प्रभाव के चलते अन्य खेलों को पर्याप्त जगह और सुविधा नहीं मिल पा रही है।
उधर नगर पालिका का कहना है कि आदिवासी दिवस के अवसर पर निकली रैली के लिए स्टेडियम में किसी वाहन को प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई थी। यदि वाहनों के प्रवेश को लेकर कोई आपत्ति सामने आती है तो मामले को देखा जाएगा। अब खिलाड़ियों की मांग है कि स्टेडियम को राजनीतिक, शासकीय और अन्य आयोजनों के लिए इस्तेमाल करने से पहले खेल गतिविधियों और मैदान की स्थिति को प्राथमिकता दी जाए। बारिश के मौसम में कीचड़, डस्ट और बड़े वाहनों की आवाजाही को लेकर स्पष्ट नियम बनाए जाएं, ताकि जिले के खिलाड़ियों को एकमात्र बड़े खेल मैदान के लिए हर बार व्यवस्था की इस ‘चकरघन्नीÓ से न गुजरना पड़े।
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