Betul ki Khabar: बैतूल में आदिवासी जमीन की रजिस्ट्री पर सवाल, अधिसूचित क्षेत्र को गैर-अधिसूचित बताया

सब-रजिस्ट्रार से लेकर तहसीलदार की भूमिका पर उठे सवाल, रजिस्ट्री के महज 20 दिन बाद कराया नामांतरण
Betul ki Khabar: बैतूल। जिला मुख्यालय के रजिस्ट्रार कार्यालय से जुड़े जमीन संबंधी विवादों के बीच अब भीमपुर क्षेत्र में आदिवासी परिवार की पुश्तैनी जमीन के हस्तांतरण का मामला सामने आया है। ग्राम पंचायत दामजीपुरा के ग्राम बल्लारपुरा स्थित भूमि की 27 जनवरी को हुई रजिस्ट्री और उसके ठीक 20 दिन बाद 16 फरवरी को नामांतरण को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।
शिकायतकर्ता परिवार का आरोप है कि पांचवीं अनुसूची के तहत आने वाले अधिसूचित क्षेत्र की भूमि को रजिस्ट्री दस्तावेज में गैर-अधिसूचित क्षेत्र बताकर हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी की गई। पूरा मामला भैंसदेही उपपंजीयक कार्यालय से हुआ, जिसका नियंत्रण जिला पंजीयक दिनेश कौसले के नियंत्रण में रहता है।
सांझवीर टाईम्स द्वारा रजिस्टार कार्यालय के भ्रष्टाचार और अनियमित्ता को सिलसिलेवार उजागर किया जा रहा है। इसके बाद शिकायतकर्ता ने यह तथ्य उपलब्ध कराते हुए रजिस्ट्री में हुई हेरफेर पर सवाल उठाए। शिकायकर्ता के आरोप के बाद स्थिति स्पष्ट हो गई है कि जिला मूल्यांकन समिति के अध्यक्ष और कलेक्टर को स्वत: मामले में संज्ञान लेकर कार्रवाई तय करना चाहिए।
शिकायतकर्ता रोशन सोनी के अनुसार विवादित भूमि खसरा नंबर 6/3, पटवारी हल्का नंबर 21 में स्थित है। यह भूमि स्वर्गीय रमेश जैराम रोकड़े के नाम दर्ज थी। उनकी मृत्यु के बाद उनके कानूनी वारिसों के नाम भूमि दर्ज हुई। परिवार का कहना है कि भूमि में रोशन रमेश रोकड़े और नादिरा रमेश रोकड़े के अधिकार दर्ज रहे हैं।
रजिस्ट्री में अधिसूचित क्षेत्र को लेकर सवाल
शिकायतकर्ता परिवार का मुख्य आरोप है कि 27 जनवरी को भैंसदेही उप-पंजीयक कार्यालय में 0.669 हेक्टेयर भूमि की रजिस्ट्री लक्ष्मी नारायण मालवीय के नाम की गई। उनका आरोप है कि रजिस्ट्री दस्तावेज में भूमि को अधिसूचित क्षेत्र से बाहर दर्शाया गया, इसके आधार पर मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता की धारा 165 के तहत सक्षम अधिकारी की अनुमति की आवश्यकता नहीं होने का उल्लेख किया गया।
परिवार का कहना है कि यदि भूमि अधिसूचित क्षेत्र में आती है तो उसके हस्तांतरण के लिए लागू कानूनी प्रावधानों की जांच आवश्यक थी। इसी बिंदु को लेकर कलेक्टर से रजिस्ट्री की वैधानिकता की जांच कराने की मांग की गई है।
रजिस्ट्री के 20 दिन बाद नामांतरण
मामले में दूसरा बड़ा सवाल रजिस्ट्री के बाद हुए नामांतरण को लेकर है। शिकायत के मुताबिक 27 जनवरी को रजिस्ट्री होने के बाद 16 फरवरी 2026 को लक्ष्मी नारायण मालवीय के नाम नामांतरण कर दिया गया। शिकायतकर्ता परिवार का आरोप है कि मूल वारिसों को पर्याप्त रूप से पक्ष में लेकर सुनवाई किए बिना प्रक्रिया पूरी की गई।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि नामांतरण की कार्रवाई में राजस्व रिकॉर्ड और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की समूचित जांच नहीं की गई। परिवार ने पूरे मामले की फाइल, नोटिस, पटवारी प्रतिवेदन और नामांतरण आदेश की जांच कराने की मांग की है।
अब बंटवारे की कार्रवाई ने बढ़ाई चिंता
मामला यहीं नहीं रुका। शिकायतकर्ता के अनुसार उक्त भूमि को लेकर तहसीलदार न्यायालय में बंटवारे की कार्रवाई भी चल रही है। प्रकरण क्रमांक 0174/अ-27, वर्ष 2025-26 में चल रही इस कार्रवाई को लेकर परिवार ने आशंका जताई है कि यदि बंटवारा हो गया तो विवादित भूमि की स्थिति और अधिक जटिल हो सकती है।
कलेक्टर से चार प्रमुख मांगें
पीड़ित परिवार ने कलेक्टर से विवादित भूमि पर यथास्थिति बनाए रखने, 27 जनवरी की रजिस्ट्री और 16 फरवरी के नामांतरण की जांच कराने, अनियमितता पाए जाने पर जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई करने तथा दोषियों के खिलाफ लागू कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की मांग की है।
अब सवाल यह है कि अधिसूचित क्षेत्र की भूमि को रजिस्ट्री दस्तावेज में किस आधार पर गैर-अधिसूचित बताया और नामांतरण की प्रक्रिया इतनी तेजी से कैसे पूरी हुई? इन सवालों के जवाब अगली कड़ी में तहसील रिकॉर्ड और बंटवारा प्रकरण के आधार पर तलाशे जाएंगे।
इनका कहना…
आपके पास जो भी शिकायत है, मुझे भेज दो। एडीएम की अध्यक्षता में रजिस्टार कार्यालय के सभी मामलों की जांच कराई जाएगी। यदि जांच में गड़बड़ी की जाती है तो कार्रवाई की जाएगी।
डॉ सौरभ संजय सोनवणे, कलेक्टर बैतूल
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