Betul Ki Khabar: पांचवें दिन भी नहीं बुझी शहर की प्यास, निजी ट्यूबवेल बने सहारा

वार्डों में जल संकट से हाहाकार,हर साल मोटर खराब, फिर भी स्थायी समाधान नहीं
Betul Ki Khabar: बैतूल। शहर में पेयजल संकट लगातार गहराता जा रहा है। जलापूर्ति ठप होने के बाद अब पांचवें दिन भी नगर के अधिकांश इलाकों में नलों से पानी नहीं पहुंच सका। हालात ऐसे हैं कि अधिकांश वार्डों के हजारों परिवार पीने और घरेलू उपयोग के पानी के लिए निजी ट्यूबवेलों पर निर्भर हो गए हैं। नगर पालिका की ओर से जलापूर्ति सामान्य होने की स्पष्ट समय-सीमा भी सार्वजनिक नहीं की गई है, जिससे लोगों की परेशानी और बढ़ गई है।
शहर के कई मोहल्लों में सुबह से ही निजी ट्यूबवेलों पर पानी भरने वालों की कतारें लग रही हैं। महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे बर्तन लेकर पानी की व्यवस्था में जुटे दिखाई दे रहे हैं। निस्तारी से लेकर खाना बनाने और अन्य जरूरी कामों तक के लिए लोगों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि नगर पालिका हर वर्ष मोटर खराब होने की समस्या से जूझती है, लेकिन इसके स्थायी समाधान की दिशा में अब तक कोई ठोस पहल नहीं हो सकी। करोड़ों रुपये की जलापूर्ति योजनाओं पर खर्च होने के बावजूद अतिरिक्त मोटर या वैकल्पिक व्यवस्था विकसित करने पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया। यदि पहले से अतिरिक्त मोटरों की व्यवस्था होती तो एक मोटर खराब होने पर दूसरी के माध्यम से तत्काल जलापूर्ति बहाल की जा सकती थी।
करोड़ों का खर्च, अतिरिक्त मोटरें खरीदी पर विचार तक नहीं
जानकारों का कहना है कि करोड़ों प्रति वर्ष खर्च करने वाली नगर पालिका परिषद के जनप्रतिनिधि चाहते तो अतिरिक्त मोटरों की खरीदी का प्रस्ताव पारित कर इस समस्या का स्थायी समाधान निकाल सकते थे, लेकिन वर्षों बीत जाने के बाद भी इस दिशा में न तो कोई प्रभावी निर्णय लिया गया और न ही भविष्य की योजना बनाई गई। इसका खामियाजा अब सीधे आम नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है।
शहरवासियों का कहना है कि वे नियमित रूप से संपत्ति कर, जलकर और अन्य नगर पालिका करों का भुगतान करते हैं, लेकिन मूलभूत सुविधा के रूप में पानी तक समय पर उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। लोगों का आरोप है कि संकट की घड़ी में नगर पालिका की ओर से न तो पर्याप्त वैकल्पिक व्यवस्था की गई और न ही यह बताया जा रहा है कि जलापूर्ति पूरी तरह कब तक सामान्य होगी।
फिलहाल निजी ट्यूबवेल संचालक आम लोगों के लिए राहत का बड़ा सहारा बने हुए हैं। लेकिन यदि जल्द ही जलापूर्ति बहाल नहीं हुई तो आने वाले दिनों में पेयजल संकट और गहरा सकता है। शहरवासी अब नगर पालिका से केवल आश्वासन नहीं, बल्कि स्थायी और भरोसेमंद समाधान की उम्मीद कर रहे हैं।
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