Betul Sugar Mill: हनुमंत शुगर मिल पर कसा शिकंजा, जांच के लिए मुंबई भेजे गए शक्कर के नमूने

नकली लेबल और गुणवत्ता संबंधी शिकायतों के बाद कार्रवाई तेज, एफआईआर की तैयारी
Betul Sugar Mill: बैतूल (सांझवीर टाईम्स)। जीन-दनोरा स्थित हनुमंत शुगर प्राइवेट लिमिटेड की मुश्किलें आने वाले दिनों में और बढ़ सकती हैं। डुप्लीकेट ब्रांड का उपयोग कर शक्कर की बिक्री तथा उत्पाद की गुणवत्ता को लेकर की गई शिकायत के बाद केंद्रीय खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने मिल से शक्कर के नमूने एकत्र कर जांच के लिए मुंबई स्थित प्रयोगशाला भेज दिए हैं। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। वहीं शिकायतकर्ता पक्ष नकली लेबल के उपयोग को लेकर पुलिस में एफआईआर दर्ज कराने की तैयारी भी कर रहा है।
सूत्रों के अनुसार शिकायत मिलने के बाद केंद्रीय खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने हनुमंत शुगर मिल पहुंचकर शक्कर के कई नमूने लिए। इन नमूनों को परीक्षण के लिए मुंबई की मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला भेजा गया है। जांच के दौरान अधिकारियों ने मिल प्रबंधन को बिक्री और उत्पाद वितरण से संबंधित आवश्यक निर्देश भी जारी किए हैं। यदि परीक्षण में खाद्य सुरक्षा मानकों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
पुलिस शिकायत की तैयारी
शिकायतकर्ता पक्ष के अधिवक्ता विनायक ज्ञानचंदानी ने बताया कि खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई के अलावा नकली लेबल के उपयोग के मामले में भी दस्तावेजी साक्ष्यों के साथ संबंधित थाने में शिकायत दर्ज कराई जा रही है। उनका कहना है कि यदि पुलिस मामला दर्ज करती है तो मिल प्रबंधन को कानूनी स्तर पर गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
मिलते-जुलते ब्रांड से उपभोक्ताओं में भ्रम
उच्च न्यायालय के अधिवक्ता विनायक बालचंदानी के अनुसार उनके पक्षकार गौरव पोरवाल, मंदसौर द्वारा खाद्य आयुक्त भोपाल को शिकायत प्रस्तुत की गई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि हनुमंत शुगर प्राइवेट लिमिटेड द्वारा उनके ब्रांड से मिलता-जुलता लेबल तैयार कर बाजार में शक्कर बेची जा रही है, जिससे उपभोक्ताओं के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है।
गुणवत्ता पर भी उठे सवाल
शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि एनएबीएल मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला में कराई गई जांच में शक्कर के नमूने में सुक्रोज की मात्रा निर्धारित मानकों से कम तथा एक्सट्रेनियस मैटर निर्धारित सीमा से अधिक पाया गया। शिकायतकर्ता ने इसे खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम का उल्लंघन बताते हुए ऐसे उत्पादों के निर्माण और वितरण पर रोक लगाने की मांग की है। अब सभी की निगाहें मुंबई प्रयोगशाला की जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिसके आधार पर मामले में आगे की कार्रवाई तय होगी।




