Betul Samachar: कलेक्टर के आदेश हवाल में, स्वास्थ्य विभाग में अटैचमेंट की बाढ़

सामुदायिक-प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र इक्का-दुक्का कर्मचारियों के भरोसे, नियमों को ताक पर रख हो रही पदस्थापना
Betul Samachar: बैतूल। जिले के स्वास्थ्य विभाग में इन दिनों अटैचमेंट की बाढ़ सी आ गई है। स्थिति यह है कि जिन कर्मचारियों की पदस्थापना मूल स्थल पर होनी चाहिए थी, वे अपने प्रभाव और सिफारिशों के बल पर मनचाही जगहों पर अटैचमेंट कराने में कामयाब हो गए हैं। इससे न केवल विभागीय व्यवस्था प्रभावित हो रही है, बल्कि आम जनता को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं पर भी सीधा असर पड़ रहा है। आमला, मोरखा और ससुंद्रा इसके प्रत्यक्ष उदाहरण बनकर सामने आए हैं। इधर सीएमएचओ कार्यालय के जिम्मेदारों ने अटैचमेंट को लेकर जानकारी होने से ही इनकार कर दिया। जबकि सूत्र बताते हैं कि पूरा सिस्टम पूरी सेटिंग के साथ चल रहा है।
जानकारी के मुताबिक नियमानुसार अटैचमेंट केवल विशेष परिस्थितियों जैसे गंभीर बीमारी, पारिवारिक आपात स्थिति या प्रशासनिक आवश्यकता में सीमित अवधि के लिए किया जाना चाहिए, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है। कई कर्मचारी वर्षों से अटैचमेंट के सहारे जिला मुख्यालय या सुविधाजनक स्वास्थ्य केंद्रों में जमे हुए हैं। सूत्रों से जानकारी मिली है कि, स्वास्थ्य कर्मचारी ओमप्रकाश मेहर, धर्मेंद्र पड़लक, शैलेन्द्र देशमुख, नम्रता माकोड़े सहित कई कर्मचारी मूल पदस्थापन छोड़ अन्य जगह अटैच कर रखे गए हैं। जबकि उनका मूल पदस्थापन स्थल आज भी स्टाफ की कमी से जूझ रहा है।
कई केंद्रों पर इक्का दुक्का कर्मचारियो के भरोसे चल रहा काम
ग्रामीण अंचलों के प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टर, नर्स और पैरामेडिकल स्टाफ की भारी कमी बनी हुई है। परिणामस्वरूप मरीजों को इलाज के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है या फिर निजी अस्पतालों की शरण लेनी पड़ती है। विडंबना यह है कि कागजों में पदस्थ कर्मचारी मौजूद हैं, लेकिन वे अटैचमेंट के जरिए शहरी या नगरीय क्षेत्रों में सेवा दे रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि अटैचमेंट की यह व्यवस्था अब अस्थायी नहीं, बल्कि स्थायी जुगाड़ बन चुकी है। कुछ कर्मचारियों ने तो हर छह माह या एक वर्ष में नया आदेश निकलवाकर अपने अटैचमेंट को लगातार बढ़वा लिया है। इससे विभागीय अधिकारियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में है, क्योंकि बिना ठोस कारणों के ऐसे आदेश जारी किए जा रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग का समीक्षा से परहेज
इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा नुकसान आम जनता को हो रहा है। सरकार एक ओर स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए योजनाएं और बजट बढ़ा रही है, वहीं दूसरी ओर विभाग के भीतर चल रही यह मनमानी उन प्रयासों पर पानी फेर रही है। यदि समय रहते अटैचमेंट की समीक्षा नहीं की गई और नियमों का सख्ती से पालन नहीं कराया गया, तो ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था और अधिक कमजोर हो सकती है। अब जरूरत है कि उच्च स्तर पर अटैचमेंट आदेशों की निष्पक्ष जांच हो, अनावश्यक अटैचमेंट तत्काल निरस्त किए जाएं और कर्मचारियों को उनकी मूल पदस्थापना पर भेजा जाए, तभी स्वास्थ्य विभाग में व्यवस्था सुधर सकेगी और जनता को वास्तविक लाभ मिल सकेगा।
इनका कहना….
बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं को दृष्टिगत रखते हुए बीएमओ पदस्थापना में फेरबदल कर सकते हैं, ताकि व्यवस्थाएं प्रभावित ना हो। अटैचमेंट को लेकर विभागीय समीक्षा की जाएगी ताकि व्यवस्थाएं बाधित ना हो सके।
डॉ मनोज हुरमाड़े, सीएमएचओ बैतूल




