Betul Ki Khabar : कलेक्टर के आदेशों की खुलेआम अफसर उड़ा रहे धज्जियां

निर्देशों के बावजूद विवाह एवं अन्य समारोहों में बज रहे डीजे मैरिज लॉन में अव्यवस्थित पार्किंग

Betul Ki Khabar : बैतूल। जिले में प्रशासनिक सख्ती और सख्त निर्देशों के बीच जमीनी हालात बिलकुल उलट दिखाई दे रहे हैं। कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी द्वारा विवाह समारोहों, सामाजिक आयोजनों और अन्य कार्यक्रमों में ध्वनि विस्तारक यंत्रों के नियंत्रण, यातायात व्यवस्था और पार्किंग प्रबंधन को लेकर जारी किए गए आदेशों का पालन कराने में संबंधित विभाग विफल साबित हो रहे हैं। शहर में आये दिन देर रात तक तेज आवाज में बजते डीजे, रोड पर खड़ी बारातें और मैरिज लॉन के बाहर जाम की स्थिति बताती है कि अफसरों ने कलेक्टर के निर्देशों को ताक पर रख दिया है।

स्पस्ट आदेश फिर भी लापरवाही, आम नागरिक दुखी

शासन के आदेशों में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया था कि जिले में विवाह एवं अन्य समारोहों में ध्वनि विस्तारक यंत्रों का उपयोग ध्वनि प्रदूषण (विनियमन एवं नियंत्रण) नियम 2000 के अनुरूप ही किया जाएगा। डी.जे. पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा तथा रात्रि 10 बजे के बाद किसी भी प्रकार के लाउडस्पीकर के प्रयोग पर रोक लागू रहेगी। इसके अलावा बारात या जुलूस के दौरान यातायात बाधित करना दंडनीय माना गया है।

मैरिज लॉन संचालकों के लिए भी निर्धारित पार्किंग व्यवस्था एवं यातायात बनाए रखने हेतु वालंटियर की नियुक्ति अनिवार्य की गई थी, उल्लंघन पाए जाने पर हॉल को तत्काल सील करने के निर्देश भी जारी हुए थे। बावजूद इसके, न तो डीजे बंद हुए और न ही यातायात व्यवस्था सुधरी। रात 12 बजे तक तेज साउंड सिस्टम गूंजना आम बात हो गई है और मोबाइल पर शिकायत करने पर भी अधिकारी मौके पर पहुंचने की जहमत नहीं उठाते।

अस्त व्यस्त शहर, चेम्बरो में बैठे अधिकारी

स्थानीय लोगों का कहना है कि समस्या नियमों के अभाव की नहीं, बल्कि क्रियान्वयन की कमी की है। नपा, पीडब्ल्यूडी, पुलिस और बिजली विभाग की लापरवाही आमजन के धैर्य की परीक्षा ले रही है। शहर में चल रहे विकास और निर्माण कार्य भी अव्यवस्था की दूसरी बड़ी वजह बने हुए हैं। जगह—जगह खुदी सड़कों, सड़क के बीच खड़े बिजली पोल, खुले गड्ढों और बिना बैरिकेडिंग के चल रहे कार्यों के कारण दुर्घटना का खतरा बढ़ गया है। इन स्थानों पर निरीक्षण कर सुधार कराने के बजाय अधिकारी चेम्बरों तक सीमित नजर आते हैं।

सड़क पर उतरकर नजारा देखें जनप्रतिनिधि, अधिकारी

लोगों का कहना है कि कलेक्टर और जनप्रतिनिधियों की छवि तभी मजबूत होगी जब वे वास्तविक स्थिति देखने के लिए शहर में भ्रमण कर ग्राउंड रिपोर्ट को समझेंगे। फिलहाल प्रशासनिक व्यवस्था और जमीनी हकीकत का अंतर शहरवासियों को परेशान कर रहा है, और सवाल यही है आखिर कलेक्टर के आदेशों का पालन कराने की जिम्मेदारी उठाने कौन आगे आएगा?

Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

Related Articles

Back to top button