Betul News: पिता ड्रायवर, लेकिन तीन पुत्रों को बनाया डॉक्टर
Betul News: Father was a driver, but three sons became doctors

फादर्स-डे पर फुदन माहोरे की अनोखी दास्तान, दूसरे भी ले सकते है प्रेरणा
Betul News: बैतूल। बिना उनके न एक पल भी गंवारा है, पिता ही साथी है, पिता ही सहारा है, बेमतलब की दुनिया में वह ही हमारी शान है, किसी शख्श की वजूद की पिता ही पहचान है….
यह शब्द उन चार पुत्रों की जुबानी है, जिन्हें एक छोटे से ड्रायवर होने के बाद भी अपने पिता ने बड़े ओहदे पर पहुंचाया। खुद स्वास्थ्य विभाग ने ड्रायवर होने के कारण अपने पुत्रों को भी उन्होंने डॉक्टर बनने के लिए सपने देखे थे, यह आज साकार हो रहे है। रविवार को फादर्स-डे पर ऐसे ही पिता की दास्तांन अंचभित करने वाली है।
स्वास्थ्य विभाग में फुदन माहोरे चर्चित नाम है। भले ही उनका ओहदा एक वाहन चालक का है, लेकिन नाम काफी बड़ा है। दरअसल अपने स्वाभाव से वे पूरे स्वास्थ्य विभाग में सिविल सर्जन से लेकर अधिकांश डॉक्टरों में लोकप्रिय हो गए। उनकी लोकप्रियता का एक और वजह कही जा सकती है, क्योंकि उन्होंने मात्र ड्रायवर होने के बावजूद अपने पुत्रों के लिए सपना संजोया था, उसे पूरा कर दिखाया है।
उनकी सहनशीलता और संतान के प्रति उनका फर्ज का नतीजा है कि चार में से तीन पुत्र एमबीबीएस बन गए है। दो पुत्र अजय माहोरे आठनेर के बीएमओ रहने के बाद पीजी की तैयारी करने के कारण यह पद छोड़ चुके है, केवल वे डॉक्टर रहकर आठनेर में सेवा कर रहे है, जबकि दूसरा पुत्र अभिषेक गांधी मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस के बाद असिस्टेंट प्रोफेसर के पद है। जबकि तीसरे पुत्र प्रतीक माहोरे भोपाल के महावीर कॉलेज से एमबीबीएस कर रहा है। केवल सबसे बड़ा पुत्र प्रतीक माहोरे वन विभाग में वन रक्षक के पद पर है। यानी उनके तीन पुत्र डॉक्टर चिकित्सीय पेशे में नाम रोशन कर रहे है।
पद था छोटा, लेकिन पिता ने लगाए पंख
चारों पुत्रों को फुदन ने डॉक्टर बनाने का सपना संजोया है। इसके पीछे उनकी मंशा जाहिर करते हुए बताते है कि वर्षो से स्वास्थ्य विभाग में नौकरी कर रहे कई बड़े और छोटे डॉक्टरों को अपने बीच देखा, तभी मन में विचार आए थे कि सभी को डॉक्टर बनाउंगा। आर्थिक स्थिति कमजोर रहने के बाद पुत्रों ने भी अपने पुत्रों के सपनों के लिए खूब पढ़ाई की और दो पुत्र एमबीबीएस टॉपर रहकर शासकीय कॉलेज में प्रवेश लेने के बाद डॉक्टर बन गए।
केवल तीसरे पुत्र के नंबर कम आने के बाद प्रायवेट कॉलेज में एडमिशन दिलाया गया, इसके अलावा फुदन अपने तीन पुत्रों की मदद से उसे डॉक्टर बनाने में मदद कर रहे है। स्वास्थ्य विभाग के वाहन चालक फुदन के समर्पण भाव का नतीजा है कि खुद छोटे पद पर रहने के बावजूद चार में से तीन पुत्रों को डॉक्टर बनाकर दूसरों के लिए एक मिसाल कायम की है।





