Betul Samachar: वन विभाग के घोटाले में बड़े अफसरों पर भी शक की सूई!
Betul News: Suspicion also falls on senior officers in the Forest Department scam!

उनके हस्ताक्षर और हस्तक्षेप के बिना इतना बड़ा घोटाला संभव नहीं
Betul Samachar: बैतूल। बैतूल के शासकीय विभागों को छोटे कर्मचारियों ने बड़े अधिकारियों की शह पर जिस तरह लापरवाही का कारागह बना दिया है, यह दूर तक सुर्खियां बटोर रहा है। केवल मामला खुलासा होने के बाद लीपापोती और छूटमुट कार्रवाई तक सीमित रहता है। सांझवीर टाईम्स की पड़ताल में बैतूल के वन विभाग के एक डिवीजन में 2 करोड़ से अधिक के वित्तीय घोटाले का एक पत्र सामने आया है, इसमें स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि घोटाला हुआ है।
हालांकि आयुक्त कोष एवं लेखा के संज्ञान में आने के बाद यह मामला कलेक्टर को प्रेषित किया गया है, लेकिन उन्होंने क्या कार्रवाई की गई है, यह स्पष्ट नहंी हो पाया है। वे फिलहाल अवकाश पर है। उधर सूत्रों का दावा है कि वन मंडल में हुए इस घोटाले में अफसर भी शामिल हो सकते हैं। कहा जा रहा है कि उनकी हस्ताक्षर के बिना इतना बड़ा घोटाला संभव नहीं है। इससे पूरा मामला संदिग्ध प्रतीत होता है।
सूत्र बताते हैं कि आयुक्त कोष एवं लेखा ने बैतूल के एक वन मंडल में पूर्व में हुई आर्थिक अनियमित्ता को पकड़ा है। आयुक्त ने लगभग 600 भुगतानों को संदिग्ध की श्रेणी में रखकर इसकी जांच को आवश्यक बताया है। खबर है कि अगस्त माह में इस बारे में आयुक्त कोष एवं लेखा ने कलेक्टर बैतूल को यहां के एक वन मंडल में हुए दो करोड़ से अधिक के घोटाले को लेकर जानकारी और जांच के लिए कहा है। पूरा मामला संदिग्ध होने पर उन्होंने वित्तीय वर्ष 2018-19 से अब तक के समस्त भुगतानों की जांच करने के लिए के लिए कलेक्टर से आग्रह किया है। उधर इस पत्र की भनक लगते ही वन मंडल के चर्चित एक रेंजर द्वारा पुराने देयकों और बिलों को जलाएं जाने की चर्चा भी जोर पकड़ रही है। हालांकि यह स्थिति अभी स्पष्ट नहीं हो पाई है, लेकिन पूरे विभाग में आयुक्त कोष एवं लेखा के पत्र की चर्चा जोरों पर है।
आर्थिक अनियमित्ताओं के लिए कुख्यात है यह वनमंडल
जिस वन मंडल में दो करोड़ से अधिक के घोटाले की गूंज हो रही है। यह पूर्व से ही काफी कुख्यात बताया जाता है। सूत्र बताते हैं कि इस वन मंडल के कई अधिकारियों और कर्मचारियों पर पूर्व में कई गंभीर आरोप लग चुके हैं। अवैध कटाई को लेकर भी इस वन मंडल में कई बार कर्मचारी कटघरे में आ चुके हैं। इधर सूत्र बताते हैं कि इस मामले को लेकर वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से भी जवाब मांगा है। इसका उत्तर भ दिया जा चुका है, लेकिन जांच प्रतिवेदन को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है।




