Betul Samachar: बूढ़े हो गए शहर के टिकारी, गंज सब स्टेशन, एक 60 साल, दूसरा 20 साल पुराना
Betul News: Tikari and Ganj substations of the city have become old, one is 60 years old, the other is 20 years old.

मेंटेनेंस के चलते घंटों अंधेरे में रहने को मजबूर शहरवासी
Betul Samachar: बैतूल। शहर की बिजली व्यवस्था आज भी दशकों पुराने ढर्रे पर चल रही है। शहर को बिजली सप्लाई देने वाले टिकारी और गंज सब स्टेशन अब बूढ़े हो चुके हैं। टिकारी सब स्टेशन करीब 60 साल पुराना है, जबकि गंज सब स्टेशन को बने हुए 20 साल हो चुके हैं। दोनों सब स्टेशनों की जर्जर मशीनें, पुराने ट्रांसफॉर्मर और तार अब शहर की बढ़ती बिजली मांग को संभाल नहीं पा रही हैं। नतीजा यह है कि जरा-सी मेंटेनेंस या तकनीकी खराबी आते ही शहरवासी घंटों तक अंधेरे में रहने को मजबूर हो जाते हैं।
रविवार टिकारी सब स्टेशन के पैनल में पानी घुसने के चलते कोठीबाजार, टिकारी, चक्कर रोड, मोती वार्ड सहित बड़ा क्षेत्र बिजली की आवाजाही से परेशान रहा। दूसरी ओर गंज के आबकारी सब स्टेशन में दो दिन पहले आए फाल्ट से कई घंटों तक बिजली बंद रही। मजबूरी में रविवार आनन- फानन में पांच घंटे बिजली कटौती कर बूढ़े हो चुके इस सबस्टेशन की मरम्मत करना पड़ा। हालांकि अधिकारी समय-समय पर सब स्टेशनों के भी मेंटेनेंस का हवाला दे रहे हैं, लेकिन बिजली की आवाजाही को लेकर कोई ठोस वजह अभी भी पहेली ही बनी हुई है।
शहर की जनसंख्या और बिजली की खपत बीते दो दशकों में कई गुना बढ़ चुकी है, मौजूदा हालतों पर गौर करें तो केवल शहरी क्षेत्र में ही 27 हजार उपभोक्ता बिजली कम्पनी में पंजिकृत हैं, लेकिन दोनों सब स्टेशन अब भी पुराने ढांचे पर ही निर्भर होकर चलाएं जा रहे हैं। टिकारी सब स्टेशन की क्षमता 33/11 केवी की है, जो आधे शहर को कवर कर रहा है। वहीं, गंज सब स्टेशन से भी शहर का बड़ा क्षेत्र जुड़ा हुआ है। दोनों सब स्टेशनों पर लोड बढ़ने से ट्रिपिंग और ओवरहीटिंग की समस्या लगातार बनी रहती है। जानकारी मिली है कि रविवार दो घंटे हुई मूसलाधार बारिश के चलते टिकारी सब स्टेशन के पैनल में पानी घुस जाने से आधे शहर की बिजली देर रात बहाल की जा सकी।
वर्ष में कई बार मेंटेनेंस फिर भी बुरे हाल
शहरी क्षेत्र में वर्ष में कई बार मेंटेनेंस के नाम पर बार-बार घंटों की कटौती की जा रही है। कभी ट्रांसफॉर्मर की मरम्मत, कभी केबल बदलने या इंसुलेटर ठीक करने के लिए पावर सप्लाई बंद कर दी जाती है। इससे व्यापारियों, विद्यार्थियों और आम परिवारों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। गर्मी और बारिश के मौसम में तो स्थिति और भी विकट हो जाती है। कई बार बिना पूर्व सूचना के बिजली गुल हो जाती है, जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है।
हालांकि अब मोबाइल पर उपभोक्ताओं को मैसेज के जरिये सूचना मिल जाती है, लेकिन मुख्य समस्या बिजली की आवाजाही की बनी रहती है। इससे उपभोक्ताओं को काफी मुसीबतें झेलने पर मजबूर होना पड़ता है। दो दिन पहले गंज सबस्टेशन के क्षेत्र में मेंटेनेंस के नाम पर करीब 5 घंटे की कटौती उपभोक्ताओं को झेलनी पड़ी तो रविवार टिकारी सब स्टेशन में फॉल्ट के चलते लोग परेशानी झेलते रहे।
बढ़ती डिमांड के साथ स्थायी सुधार की मांग
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि हर बार अधिकारी केवल अस्थायी सुधार करते हैं, लेकिन स्थायी समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा। व्यवस्था आज भी उतनी ही बनी हुई है, जब शहर में उवभोक्ताओं कई जनसंख्या काफी कम हुआ करती थी। आज जगह-जगह कॉलोनियों का निर्माण हो रहा है। बिजली की डिमांड भी बढ़ रही है। यदि शहर की बिजली व्यवस्था को दुरुस्त रखना है तो अब नए और आधुनिक सब स्टेशनों की जरूरत है। शहरवासियों को उम्मीद है कि विभाग जल्द ही आधुनिक सब स्टेशन की दिशा में काम करेगा, ताकि हर बार मेंटेनेंस के नाम पर अंधेरे में डूबने की मजबूरी से उन्हें राहत मिल सके।
मरम्मत के नाम लाखों खर्च, नतीजा सिफर
शहर में 60 और 20 साल पुराने दो सबस्टेशनों से शहर की 1 लाख 30 हजार से अधिक की आबादी निर्भर है। इसके अलावा कंपनी के पास भारी भरकम अमला भी है, लेकिन सब स्टेशनों के मेंटेनेस में बड़ी लापरवाही सामने आ रही है। जानकार सूत्र बताते हैं कि बिजली कंपनी के मुख्यालय से दो सबसस्टेशनों से त्रैमासिक मेंटेनेस के लिए एकमुश्त राशि मिलती है। इसके बावजूद बारिश में बिजली की गड़गड़ाहाट में ही दोनों सब स्टेशनों में आए दिनों तकनीकी परेशानियां आम बात हो गई है।
सवाल यह उठ रहा है कि त्रैमासिक मेंटेंनेस के लिए कंपनी को लाखों रुपए मिलने के बाद भी सब स्टेशनों का रखरखाव ठीक से नहीं होने के कारण व्यवस्थाएं चौपट होते जा रही है। इसी वजह कंपनी के मेंटेनेंस और रखरखाव को लेकर अक्सर सवाल उठ रहे हैं। जानकारी यह भी सामने आई है कि इस बारे में कई आरटीआई लगाने के बावजूद सब स्टेशनों पर किए गए खर्च पर ब्यौरा तक अधिकारी उपलब्ध नहीं करा पा रहे हैं।
इनका कहना…
शहरी क्षेत्र में दो सब स्टेशन मौजूद हैं। कभी-कभी टेक्निकल फाल्ट आ जाते हैं। इसकी वजह से एहतियात के तौर पर सप्लाई बंद करना पड़ता है। मांग के हिसाब से व्यवस्था बनाए जाने पर समय-समय पर बदलाव भी किए जाते हैं।
बीएस बघेल, सीई, मप्र मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कम्पनी, बैतूल




