Betul Samachar: 40 साल पुराने पुलिस क्वार्टर बने खंडहर, घटिया मरम्मत बुनेगी मौत का जाल!
Betul News: 40 year old police quarters turned into ruins, poor repairs will create a death trap!

ञ्च सुरक्षा के नाम पर किया जा रहा पुलिस परिवारों की जान से खिलवाड़!
Betul Samachar: बैतूल। बड़ी पुलिस लाइन में चारों ओर पुलिस अधिकारियों के रहने के लिए नई चमचमाती मल्टी बिल्डिंगें जरूर खड़ी दिखाई देती हैं, लेकिन इसके बीच 40 साल पुराने बने क्वार्टर अब खंडहर में तब्दील हो चुके हैं। इन जर्जर बिल्डिंगों में करीब 80 क्वार्टर ऐसे हैं जो अब किसी भी लिहाज से रहने योग्य नहीं हैं। दो मंजिला इन क्वार्टरों की हालत इतनी बदहाल हो चुकी है कि उनकी छतों से प्लास्टर झड़ चुका है और लोहे की सरिया तक जंग खाकर बाहर निकल आई है छत कब भर भराकर गिर जाए इसकी कोई ग्यारंटी नहीं है।
दीवारों पर गहरे दरारें पड़ चुकी हैं, जिनसे कभी भी यह भवन धराशायी हो सकते हैं। अब विभाग इन भवनों की बाहरी परत पर लीपापोती कर उन्हें नया दिखाने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में यहां रहने आने वाले पुलिसकर्मियों के परिवारों की सुरक्षा पर बड़ा संकट खड़ा होता नजर आ रहा है।

घटिया मरम्मत पर करोड़ों खर्च
सूत्रों की माने तो विभाग इन जर्जर क्वार्टरों की मरम्मत पर करीब एक से डेढ़ करोड़ रुपए खर्च कर रहा है, लेकिन मरम्मत के नाम पर जो काम किया जा रहा है, वह बेहद निम्र का है। दीवारों और छत पर जहां लोहे की मजबूती पहले ही खत्म हो चुकी है, वहां नए सिरे से प्लास्टर की परत चढ़ाई जा रही है। कमजोर ढांचों को और मजबूत करने की बजाय उन पर सिर्फ पुट्टी और रंगरोगन करके उन्हें नया दिखाने की कोशिश की जा रही है। यही मरम्मत कल को पुलिस परिवारों के लिए मौत का जाल साबित हो सकती है।

गुणवत्ता ना निगरानी, घटिया सामग्री का धड़ल्ले से उपयोग
सूत्र बताते हैं कि इन क्वार्टरों की जर्जर स्थिति को देखते इन्हें पूरी तरह गिराकर नई इमारत का निर्माण कराया जाना चाहिए था, क्योंकि खंडहर हो चुकी बिल्डिंग की ऊपरी सतह की ही मरम्मत की जा रही है। जबकि अंदरूनी साथ पूरी तरह जर्जर हो चुकी है, लेकिन अधिकारियों ने जल्दबाजी में करोड़ों रुपए का टेंडर मंजूर कर सिर्फ नाम मात्र की मरम्मत शुरू कर दी। काम की गुणवत्ता पर न तो कोई निगरानी है और न ही किसी अधिकारी की नजर इस ओर जा रही है। हालात यह हैं कि घटिया सामग्री का इस्तेमाल खुलकर हो रहा है और मजदूर मनमर्जी से काम निपटा रहे हैं।

जर्जर भवन निवास कर रहे परिवार
पुलिस लाइन के इन जर्जर क्वार्टरों में दो परिवार वर्तमान में निवास भी कर रहे हैं। समझा जा सकता है कि यह परिवार दिन-रात डर के साए में जीने को मजबूर हैं। हालिया बरसात के मौसम में कभी-कभी तो हालात और ज्यादा भयावह हो जाते हैं, जब दीवारों से पानी टपकता है और छत से सीमेंट-प्लास्टर झड़कर नीचे गिरता है। ऐसे में किसी भी वक्त इन परिवारों के सामने बड़ी दुर्घटना होने का अंदेशा बना रहता है, लेकिन इनकी भी मजबूरी है कि उन्हें नौकरी के चलते अपनी जान जोखिम में डालना पड़ रहा है।
सरकारी धन ठिकाने लगाने का खेल
सवाल यह है कि करोड़ों रुपए के फंड के बावजूद ऐसी मरम्मत आखिर क्यों की जा रही है जो लोगों की जान को जोखिम में डाल दे? क्या यह सरकारी धन को ठिकाने लगाने का खेल है या फिर लापरवाही की इंतहा? फिलहाल पुलिस लाइन के यह खंडहरनुमा क्वार्टर जिले में सुरक्षा के नाम पर कई सवाल खड़े कर रही है। इस मामले पर नवागत एसपी वीरेंद्र जैन को संज्ञान लेने की जरूरत है।
इनका कहना…..
पुलिस हाउसिंग बोर्ड के माध्यम से मरम्मत कराई जा रही है, तीन ब्लाकों में काम चल रहा है। ज्यादा जानकारी पुलिस हाउसिंग बोर्ड के अधिकारी ही दे सकते हैं।
दिनेश मर्सकोले, आरआई, पुलिस बैतूल




