Prashasnik Kona: प्रशासनिक कोना: पुलिस की ये अफसर थे ईमानदार, फिर कटघरे में क्यों?? कौनसे साहब को अधीनस्थ ले रहे बेहद हल्के में??? किसे दो जगह मलाई खाने के बाद भी हैं जमकर मलाल???? विस्तार से पढ़िए हमारे चर्चित कॉलम प्रशासनिक कोना में……

साहब की ईमानदारी से कटघरे में क्यों?
वर्दी वाले विभाग में एक अनुविभाग वाले साहब को एक घोटाले की महत्ती जवाबदारी सौंपी गई थी। उन्हें काफी ईमानदार समझकर कप्तान ने जांच प्रमुख भी बनाया, लेकिन वे साहब की नजर में ही खरे नहीं उतरे। बची कसर जनप्रतिनिधियों की नाराजगी के बाद से सामने आ गई है। इसके बाद उनकी ईमानदारी कटघरे में आ खड़ी हुई है। चर्चा है कि अपनी ईमानदारी को लेकर साहब जिला मुख्यालय आने पर एक चर्चित रेस्टारेंट में दुहाई देते थे। इसे सुनकर स्टाफ के कुछ कर्मी भी अपने आप को गौरवांवित महसूस कर लेते थे, लेकिन जब से मामले में उन पर उंगली उठी है, अब उनके प्रति कर्मचारियों की सोच भी बदल गईहै। उनके अनुविभाग में भी अधीनस्थ उन्हें संदेह की दृष्टि से देख रहे हैं। उनकी यही ईमानदारी कई तबादला एक्सप्रेस में भारी न पड़ जाए। इस बात की संभावनाएं भी बहुत अधिक दिखाई दे रही है।
अपने ही बॉस को हल्के में ले रहे अधीनस्थ
बड़े साहब की पदस्थापना को लगभग डेढ़ वर्ष का समय बीत गया है। अभी तक वे अपने अधीनस्थों पर पूरी तरह कंट्रोल करने का कोई अटल मंत्र इजाद नहीं करता। इसकी वजह है कि वे बैठकों में अधीनस्थों को खूब डोज देते हैं पर उसका कोई असर प्रशासनिक सिस्टम में दिखाई नहीं देता है। कहा जा रहा है कि जब जनप्रतिनिधियों की किसी मामले में नाराजगी सामने आती है तो सुबह बड़े साहब शाम तक रिजल्ट देने के फरमान जारी करते हैं, लेकिन यहां गजब की बात है कि जिसे फरमान जारी किया गया है, वह एक कान से सुनकर दूसरे से निकाल दे रहा है। उस अधिकारी को भी पता है कि साहब सुबह कड़क मिजाम में रहकर शाम को लोड नहीं लेते। यही वजह है कि जनप्रतिनिधि समेत अन्य लोगों की समस्याओं के निराकरण के लिए दिया गया डोज वहीं खत्म हो जा रहा। इसी वजह तेज तर्रार कहलाने वाले साहब का वजूद इन दिनों खत्म होते जा रहा है।
दो जगह मलाई खाने के बाद भी मलाल
जिले के एक पानी से जुड़े विभाग के अधिकारी को एक साथ दो जगह का चार्ज दिया गया है। चूंकि यह जनप्रतिनिधियों की गुड लिस्ट में शामिल हैं, इसलिए अब तक कोई विरोध नहीं हुआ, लेकिन अब स्थिति बदली नजर आ रही है। चर्चा है कि कई महत्वपूर्ण परियोजना समय पर पूर्ण नहीं होने के कारण जनप्रतिनिधियों के निशाने पर यह साहब आ गए हैं। बार-बार उन्हें इन परियोजनाओं के पूरा न होने पर भोपाल भी तलब किया जा रहा है। पहले बड़ी परियोजनाओं के ठेकेदारों से करीबी रखकर चर्चा में आए उक्त युवा अधिकारी फिलहाल बेहद परेशान बताए जा रहे हैं। दो जगह मलाई खाने के बावजूद उनका पेट नहीं भर रहा है। यही वजह है कि जो काम दो वर्ष पहले हो जाना था, वे अब तक लटके हैं। इससे सिंचाई के साधन के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। इसी वजह यह साहब अब जनप्रतिनिधियों के टारगेट पर आ गए हैं।




