प्रशासनिक कोना: अब मुखिया को लंगोटिया यार बोल बैठे नशेड़ी थानेदार, एक साहब ऐसे मना रहे स्टे की जीत का जश्न,, मुखिया के तेवर नरम पड़ने पर आखिर क्यों उठ रहे सवाल??? पढ़िए पूरी खबर हमारे चर्चित कॉलम प्रशासनिक कोना में…..

Administrative Corner: Now the drug-addicted police officer is calling the Chief a loincloth, a gentleman is celebrating the victory of ST like this, why are questions being raised when the Chief's attitude softens? Read the full news in our popular column Administrative Corner...

Administrative Corner : शराब के नशे में एक थानेदार अपने विभाग की लुटिया डुबाने में लगे हैं। उनके धुएं छोड़ने और शाम ढहलने के बाद शराब पीने की लत ने सही को गलत और गलत को सही बताने की कोई कसर नहीं छोड़ी। कुछ दिनों पहले यही थानेदार नीमपानी के निकट एक ढाबे पर कहने से नहीं चूक रहे थे कि भोपाल के मोहन विक्रमादित्य यूनिवर्सिटी में उनके सीनियर थे। मामला बढ़ा तो चुप्पी साध बैठे, लेकिन टुन्न होने के बाद फिर एक ढाबे पर कह बैठे कि मोहन उनके सीनियर नहीं बल्कि लंगोटिया यार थे। अब सवाल यह उठ रहा है कि यदि थानेदार के मोहन लंगोटिया यार थे तो क्या उन्हें वर्दी पर खुलेआम शराब पीने की छूट दे रखी है। यह थानेदार अपने बड़बोलेपन के कारण विभागीय अधिकारियों के लिए भी सिरदर्द बन गए हैं, लेकिन प्रमोशन के चक्कर में उनकी रवानगी में बाधा आ रही है।

साहब को मिली जीत का मना जश्न

पुलिस महकमे में एक साहब को पिछले दिनों स्टे मिल गया । इसकी प्रबल संभावना पहले ही थी। उनके रिटायरमेंट को चार माह का समय बचा था, इसलिए प्राथमिक स्तर पर उनका तबादला नहीं किया जा सकता था। एक मामले में विवाद के कारण उन्हें हटना पड़ा तो स्टे के लिए जमकर लाबिंग की। स्टे मिलते ही उन्होंने चार्ज भी लिया। इसके पहले दूसरे अधिकारी आते उन्होंने अपनी वापसी का जश्न भी मना डाला। चर्चा है कि साहब अपने अधीनस्थों को इन चार माह में नियमों का पाठ पढ़ाने की बात कर रहे हैं। देखना यह है कि साहब रिटायरमेंट के पहले अपने क्षेत्र में क्या-क्या गुल खिलाते हैं।

बड़े बॉस के तेवर में बदलाव

प्रशासन में एक बड़े बॉस कहलाए जाने वाले एक अफसर के आग उगलते तेवर अब ठंडे बस्ते में चले गए हैं। कुछ दिनों पहले ही उनकी जिले में पदस्थापना हुई है। उन्होंने अन्य जिले की तरह यहां पर भी ताबड़तोड़ चाबूक चलाए, जिसकी सर्वत्र प्रशंसा हो रही थी, लेकिन अचानक उनके तेवर नरम पड़ गए और अभियान ठंडे बस्ते में चले जाने से लोग भी सवाल उठा रहे हैं। लोगों ने तो यहां तक कहना शुरू कर दिया है कि चेहरा देखकर अभियान चलाने की कवायद हुई थी। इसलिए टायटाय फिस हो गया।

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Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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