Political News: राजनीतिक हलचल: आखिर एक माननीय को क्यों खानी पड़ी मुंह की?? पार्टी का शतक पूरा नहीं, पर रसूखदार नेता को फिर क्यों लगने लगा भविष्य सुरक्षित??? आखिर कौनसे विरोधी गिरगिट की तरह रंग बदलने पर हो रहे ट्रोल???? विस्तार से पढ़िए हमारे चर्चित कालम राजनीतिक हलचल में…..

Political News: Political turmoil: Why did an honorable person have to suffer?

माननीय को हाथ की लगी न तवे की

जिले के एक माननीय को इन दिनों हाथ और तवे दोनों की जाने का मलाल हो रहा है। हाल ही में प्रदेश के एक बड़े नेता का उनके क्षेत्र में आगमन हुआ था। एक सप्ताह से वे मांगों की सूची तैयार कर रहे थे, इसके लिए बकायदा अपने क्षेत्र में भी जमकर डींगे हांकी गई की बड़ी घोषणा होने वाली है। सब्जबाग दिखाकर लोगों को अपने विधानसभा मुख्यालय में बड़ी संख्या में बुलवाया, लेकिन मंच से बड़े साहब ने एक भी घोषणा नहीं की। तब माननीय का चेहरा देखने लायक था। बड़े साहब के छिंदवाड़ा रवाना होने के बाद जब लोगों ने मंच के आसपास माननीय को घेरा तो उनकी बोलती बंद हो गई। पहले तो जेब से पैसा खर्च कर लोगों को सभा स्थल तक लाने में हाथ की भी गई और अपने विस क्षेत्र में एक भी घोषणा नहीं होने से तवे की भी चली गई।

शतक पूरा न होने पर भी भविष्य सुरक्षित

एक पार्टी का हाल ही में परिणाम के बाद सीटों का शतक पूरा नहीं हो सका, लेकिन संख्या बढ़ने से पार्टी के प्रति बागी और पार्टी छोड़ने वालों की सोच बदल गई है। ऐसे ही एक पूर्व माननीय जिनका, विधानसभा चुनाव के बाद से पार्टी से मोह भंग हो रहा था, अब मन बदल गया है। उनके बारे में कहा जा रहा है कि पार्टी का शतक पूरा नहीं होने के बाद अब उन्हें अपना भविष्य पुरानी जगह ही सुरक्षित नजर आ रहा है, इसलिए धीरे-धीरे अपनी पार्टी में अब एडजेस्ट होना शुरू कर दिया है।

भोपाल से लेकर दिल्ली तक के अपने पुराने साथियों को फोन कर पार्टी के प्रति निष्ठ जताई जाने लगी है। अब उनका मन सत्ता पक्ष से उखड़ता नजर आने से समर्थक भी कहीं खुशी कहीं गम जैसी स्थिति में है। बताते चले कि यह पूर्व माननीय एक प्रमुख विधानसभा क्षेत्र से आते हैं और इनकी किसी समय प्रदेश की राजनीति में तूती बोलती थी।

विरोधियों ने फिर बदला गिरगिट की तरह रंग

्रगिरगिट अपना रंग बदलने के लिए चर्चित है। इसका राजनीति से भले ही कोई लेना देना नहीं, लेकिन एक पार्टी में वर्षों बाद एक नेता को बड़ा पद मिला तो उनके विरोधी भी होर्डिग्स लगाने में पीछे नहीं रहे। यह वही नेता है जो पहले चुनाव में जीत हासिल करने के बाद दूसरे धड़े में नेताजी के जाने से नाराज होकर दूरियां बना चुके थे।

पिछले चुनाव में भी अलग धड़े के इन नेताओं ने औपचारिकता निभाई, लेकिन किस्मत के धनी जिले के बड़े नेता को दिल्ली में महत्वपूर्ण पद से नवाजा गया और वे पहली मर्तबा जिले के प्रवास पर आए तो उनसे दूरियां बनाने वालों ने भी होर्डिंग्स लगाकर अपना अघोषित समर्थन दे दिया। गिरगिट की तरह रंग बदलने वाले इन नेताओं पर कटाक्ष किए जा रहे हैं कि उगते सूरज को प्रमाण करना कोई इनसे सीखे।

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Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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