Betul News: टोल बचाने परतापुर, बैतूल बाजार होकर गुजर रहे पांच सैकड़ा वाहन

Betul News: Five hundred vehicles passing through Partapur, Betul market to save toll

शासन को रोज हो रहा करीब दो लाख रुपए का नुकसान , मजबूर टोल प्रबंधन

Betul News: बैतूल। हाइवे निर्माण में खर्च हुए राजस्व की प्राप्ति के लिए केंद्रीय सड़क एवं परिवहन विभाग ने प्रत्येक हाइवे पर टोल नाके बना रखे हैं। यहां से गुजरने वाले वाहनों से टोल वसूली कर शासन के खाते में जमा किए जाने का नियम है, लेकिन मिलानपुर टोल नाके पर शासन को रोजाना लाखों का नुकसान पिछले लंबे समय से उठाना पड़ रहा है। इसकी वजह यह है कि वाहन चालकों ने टोल के किनारे होकर एक ऐसा रास्ता निकाल लिया जो सीधे टोल के बाहर से ही निकल जाता है।

ऐसे में नागपुर और भोपाल की तरफ जाने वाले अधिकांश वाहन बिना टोल चुकाए बाहर के रास्ते से सीधे निकल रहे हैं और नुकसान शासन को झेलना पड़ रहा है। विडंबना यह हैं कि टोल प्रबंधन नुकसानी की भरपाई को लेकर कोई कदम भी नहीं उठा सकता, क्योंकि लोगों के आने जाने के रास्ते पर ना ही निगरानी कराई जा सकती है और ना ही किसी वाहन चालक से जोर जबरदस्ती।

रोजाना निकल रहे चार सौ से पांच सौ वाहन

टोल नाके पर हो रही नुकसानी को लेकर मैनेजर धर्मवीर सिंह गुर्जर ने बताया कि परतापुर के समीप स्थित टर्निंग से प्रतिदिन चार से पांच सैकड़ा वाहन गुजर रहे हैं। जबकि टोल नाका परतापुर के आगे मिलानपुर पर स्थित है। नागपुर की ओर से आने वाले कई भारी और हल्के वाहन परतापुर से सीधे बैतूल बाजार के बाहर निकल जाते हैं। इसी तरह नागपुर की तरफ जाने वाले वाहन बैतूल बाजार होते हुए परतापुर निकल रहे हैं। रोजाना करीब चार सौ से पांच सौ वाहनों के बिना टोल चुकाए निकल जाने से प्रतिदिन दो से ढाई लाख रुपए का नुकसान कम्पनी को झेलना पड़ रहा है।

चाह कर भी टोल नाका प्रबंधन नही कर सकता निगरानी

परतापुर से लेकर बैतूल बाजार तक लगभग 7 किलोमीटर का रास्ता वाहनों को तय करना पड़ता है। पूर्व में इस रास्ते का उपयोग काफी कम किया जाता था लेकिन जब से टोलनाका बनाया गया है। टोल बचाने के लिए इस रास्ते की पूछ परख बढ़ चुकी है। टोल नाका प्रबंधन चाहक भी इस रास्ते की ना ही निगरानी करवा सकता है और ना ही यहां से गुजरने वाले वाहनों से टोल की वसूली कर सकता है, क्योंकि नियम है कि वाहनों के आसन जाने जा रास्ता किसी भी कीमत पर बन्द नहीं किया जा सकता। प्रबन्धन को अधिकार भी नहीं है कि वो अपने कर्मचारियों से निगरानी करवाए या फिर अलग से वसूली करें। लिहाजा अब नुकसानी झेलना टोल प्रबन्धन की मजबूरी बन चुकी है।

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Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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