Betul News: बोलेरो में भरा फर्नीचर, सीसीएफ कार्यालय से छूटा!
Betul News: Furniture loaded in Bolero, left from CCF office!

वाहन पकड़ने और छोड़ने के खेल में वन विभाग चर्चा में
Betul News: बैतूल। शादी विवाह के सीजन में लकड़ी से बने फर्नीचर की वैध खरीद फरोख्त को लेकर वन विभाग पूरी सतर्कता बरत रहा है, लेकिन इस सतर्कता के पीछे खेल खेले जाने की चर्चाएं भी छन छन कर बाहर आ रही हैं। ताजा मामला है गुरुवार सुबह का है, जहां उड़नदस्ते द्वारा पकड़ा गया बोलेरो वाहन वन परिक्षेत्र बैतूल के सुपुर्द किया गया था। वाहन में भरे फर्नीचर को देखने के बाद इसे सीसीएफ कार्यालय में खड़ा भी किया गया, लेकिन बाद में पता चला कि उक्त वाहन को छोड़ दिया गया है। अधिकारियों का दावा है कि दहेज में मिले लकड़ी के फर्नीचर के बिल बाउचर देखने के बाद वाहन रवाना कर दिया गया। अब सवाल ये खड़ा हो रहा है कि, फर्नीचर के बिल बाउचर देखे भी गए और अवलोकन भी किया गया तो विभाग का रिकार्ड संधारित करने के उद्देश्य से क्या मौका पंचनामा तैयार किया। पेश किए गए बिल बाउचर की फोटों कापी पंचनामे के साथ नस्ती की गई। इसका जवाब किसी के पास नहीं है।

वाहन में रखा था सागौन का सोफा सैट
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक गुरुवार सुबह बोलेरो वाहन क्रमांक एम-48-बीसी-2594 को सीसीएफ उड़नदस्ते ने पकड़ा था। चूंकि कार्यक्षेत्र परिक्षेत्र बैतूल के अंतर्गत आता है, इसलिए मामला उन्हें सौंप दिया गया। सूत्र बताते हैं। कि मौके पर हमेशा विवादों में रहने वाले बैतूल परिक्षेत्र कार्यालय के डिप्टी रेंजर ने इस पूरे मामले को हैंडल करने की जिम्मेदारी संभाली थी। वाहन को पहले सीसीएफ कार्यालय केम्पस में लाया गया। सांझवीर टाईम्स के पास उपलब्ध वीडियो में साफ नजर आ रहा है कि उक्त डिप्टी रेंजर वाहन में बैठे लोगों से पूछताछ कर यह भी कहता सुना जा रहा है कि उसके ऊपर भी साहब लोग बैठे हुए हैं , उन्हें भी जवाब देना पड़ता है। अब क्या जवाब देना पड़ता है यह तो उक्त कर्मचारी और साहब ही जानें।
बताया जा रहा है कि बाद में यह वाहन सीसीएफ कार्यालय से वन विभाग के ही अन्य कार्यालय में भी ले जाया गया। इस मामले को लेकर जब सांझवीर ने पड़ताल शुरू की तो और फोन लगाए गए , लेकिन फोन की घण्टी बजने के बावजूद फोन रिसीव नहीं किए जा रहे थे। चूंकि मामला सीसीएफ कार्यालय केम्पस से जुड़ा हुआ था इस वजह से सीधे सीसीएफ से ही दूरभाष पर चर्चा की गई। जिन्होंने कार्यवाही का भरोसा भी दिया। सीसीएफ से चर्चा करने के ठीक बाद परिक्षेत्र प्रभारी ने बताया कि, उक्त वाहन में रखा फर्नीचर सम्बन्धित को दहेज में मिला था। जिन्होंने बिल बाउचर पेश किए, जिनकी तस्दीक के बाद वाहन छोड़ दिया गया। लेकिन सवाल यह है कि क्या नियम के मुताबिक मौके पर पंचनामे आदि की कार्यवाही की गई, शासकीय रिकार्ड संधारित करने के उद्देश्य से बिल बाउचर के नमूने लिए गए या नहीं।
क्या कहता है वन विभाग का नियम
सूत्रों से जानकारी मिली है कि, उक्त वाहन को बिना किसी कार्यवाही के छोड़ दिया गया। बोलेरो वाहन पकड़ने के बाद पंचनामे आदि की कार्यवाही की गई या नहीं ये तो अधिकारी ही जाने, लेकिन ऐसे मामलों में कार्यवाही के नियम वन विभाग ने पहले से ही तय कर रखे हैं। जानकारी मिली है कि नियम के मुताबिक जांच के दौरान यदि चलती सड़क पर कोई वाहन पकड़ा जाए और सबूत के तौर पर वाहन में रखी वन उपज या लकड़ी फर्नीचर के बिल बाउचर तत्काल पेश किए जाएं तो उक्त वाहन बिना किसी कागजी कार्यवाही के छोड़ा जा सकता है, लेकिन यही वाहन यदि विभाग के किसी भी कार्यालय केम्पस में लाया जाता है तो उक्त वाहन बिल बाउचर के साथ पंचनामे की कार्यवाही करने के बाद ही छोड़ा जा सकता हैं।
सूत्रों का दावा है कि इस मामले में ऐसा नहीं किया गया, जो सीधे सीधे नियम के उल्लंघन की श्रेणी में आता है। हालांकि इस मामले में यह तो तय है कि वाहन सीसीएफ केम्पस ले जाया गया था, लेकिन दस्तावेजी कार्यवाही की गई या नहीं इसकी पड़ताल करने वन परिक्षेत्र बैतूल के प्रभारी रेंजर को चार दफे उनके मोबाइल नम्बर 9424790306 पर सम्पर्क किया गया, लेकिन उन्होंने $फोन रिसीव नहीं किया। यदि फोन रिसीव हो जाता तो यह पता चल जाता कि अधिकारियों के निर्देश और नियम के मुताबिक ही कार्यवाही की गई है।




