राजनीतिक कोना: सांसद- विधायक को लेकर आखिर ये क्या बोल गए छुटभैये नेता?? किस नेता जी ने समु के साथ बदल लिया पाला??? अपने वार्ड में पार्टी को बढ़त पर किसने मनाई खुशी???? विस्तार से पढ़िए हमारे चर्चित कॉलम राजनीतिक कोना में……

Betul: सत्ता में आने के बाद भाजपा के कुछ नेता शुचिता और पार्टी की गाइडलाइन को भूलते जा रहे हैं। शहर के एक छुटभैया नेता तो कई आगे निकलते हुए पिछले दिनों एक अस्पताल संचालक को छोटे से मामले में बुरा-भला कह चुके हैं। इसके बाद उन्होंने अस्पताल संचालक को यहां तक हिदायत दे दी कि वे सांसद और विधायक को लेकर अस्पताल के सामने धरना देंगे और पत्थर फिकवाएंगे। सवाल यह है कि व्यक्तिगत मामले में क्या सांसद और विधायक अस्पताल के सामने धरना देंगे? लेकिन बड़बोले और छुटभैया ने मर्यादा ताक पर रखकर अपनी पार्टी के सांसद और विधायक की ही प्रतिष्ठा दाव पर लगा दी।
इस नेता के बड़बोलेपन का यह कोई नया मामला नहीं है। पार्टी भी उसकी इस हरकत से दूरियां बना रही हैं। आपको बताते चले कि यह नेता पहले एक पूर्व विधायक की पूंछ हुआ करते थे, लेकिन उनके दिन फिरे नहीं तो दूसरी तरफ पासा पलटकर आ बैठे, लेकिन यहां भी उनकी हरकत के कारण दूध का जला छाछ को भी फूंक फूंक कर पीने वाली कहावत चरितार्थ हो रही है। इस नेता की 36 लाख की बिल्डिंग के सामने एक होटल भी है और यह छुटभैया अपने समाज के दो फाड़ कराने के लिए भी जाना जाता है।
समय के साथ बदल लिया नेताजी ने पाला
पद और सम्मान की चाह में राजनीति में सब वाजिब है। एक पवित्र नगरी में पिछले दो विधानसभा चुनाव से टिकट की दावेदारी कर रहे जिले के बहुसंख्यक समाज के एक नेता का पाला बदलना इन दिनों राजनीतिक सुर्खियां बटोर रहा है।
पहले भाजपा के विरोधी गुट के साथ जमकर आलोचना कर अपनी ही पार्टी की किरकिरी कर चुके यह नेता गत विधानसभा चुनाव में निर्दलीय लडऩे की तैयारी कर चुके थे, लेकिन पार्टी का चाबुक ऐसा पड़ा कि प्रत्याशी के समर्थन में चुनाव प्रचार करना पड़ा। अब उन्हें लगने लगा है कि अगले चुनाव में टिकट पाने के लिए जिले के सबसे मजबूत भाजपा के धड़े को विश्वास में ले तो सब सेटल हो सकता है, बस उन्होंने अपने करीबियों और अन्य साथियों से निर्णय लिए बिना दूसरे धड़े में शामिल होना ज्यादा बेहतर समझा। अब जिला संगठन से जुड़े कई नेताओं के साथ उनका शामिल होना। भाजपा की राजनीति में भी खासा चर्चा का केंद्र बन रहा है।
अपने वार्ड से बढ़त से खुश हुए नेताजी
महज अपने वार्ड में बढ़त हासिल करने से एक नेताजी इतने खुश हुए हैं कि खबर शहर से निकलकर भोपाल तक पहुंचा दी। हालांकि उनके बारे में कहा रहा है कि पूरे विधानसभा की जिम्मेदारी उनकी थी, लेकिन मनपसंद लोकसभा उम्मीदवार न मिलने से पार्टी से किनारा कर लिया। केवल वरिष्ठ नेताओं की सभा के दौरान उनकी मौजूदगी देखी गई। लोकसभा चुनाव के दौरान केवल नाममात्र मौके पर देखा गया, जब परिणाम आए तो उनके वार्ड में कांग्रेस प्रत्याशी को बढ़त मिलने से खुशी का ठिकाना न रहा। तर्क दिया जा रहा है कि वे काम नहीं करते तो उन्हें वार्ड में बढ़त कैसे मिलती? हालांकि विपक्षी पार्टी के इस नेताजी को ट्रोल करते हुए सत्ता पक्ष के लोग कहने से नहीं चुके की उनके क्षेत्र में पार्टी को सबसे अधिक 70 हजार का गड्ढा मिला है।




