Prashasnik Kona : प्रशासनिक कोना: कौनसे टीआई गुनगुना रहे हमसे क्या भूल हुई..?? साहब की कालोनी कांड की असलियत अब कैसे आ रही सामने??? कौनसे अफसर पर छिपे रूस्तम का लगा ठप्पा???? विस्तार से पढ़िए हमारे चर्चित कॉलम प्रशासनिक कोना में…….

टीआई गुनगुना रहे हमसे क्या भूल हुई

वर्दी वाले विभाग में हाल ही में बड़ा फेरबदल हुआ है। इस फेरबदल मेंं माननीय की नाराजगी के बाद एक थानेदार को लाइन आना पड़ा, जबकि पदस्थापना की बांट जोह रहे ईमानदार थानेदार को बड़े थाने जिम्मेदारी से नवाजा गया, लेकिन लंबे समय तक शहर के एक प्रमुख थाने की जिम्मेदारी निभाने वाले थानेदार को नए थाने का सुख नहीं मिला। वे कई दिनों से लाइन में ही है। उनके बाद लाइन भेजे गए थानेदारों को थाना प्रभारी बनने का सुख मिल गया है। कहा जा रहा है कि इन साहब ने बड़े थाने का प्रभारी रहते हुए जमकर फीलगुड किया और सत्तारूढ़ पार्टी के कई नेताओं की अनदेखी की, इसलिए इनके रास्ते कठिन हो गए है। अभी भी दो बड़े थाने ऐसे हैं, जो थाने विहिन है। कप्तान ने इन्हें सत्तारूढ़ पार्टी नेताओं की नाराजगी के बाद फिलहाल कोई जिम्मेदारी नहीं दी है। चर्चा तो यह भी है कि इन साहब को जिले से अपनी रवानगी डलवाना पड़ सकता है।


कालोनी के कर्मकांड अब हो रहे उजागर

जिला मुख्यालय से विदा हुए एक राजस्व अधिकारी के कालोनी को लेकर किए गए कर्मकांड अब सामने आ रहे हैं। अधिकारी को विदा हुए लगभग 6 माह का समय बीत गया है, लेकिन अब उनके द्वारा किए गए कर्मकांड कालोनीवासियों और कालोनाइजर दोनों के लिए सिरदर्द बन गया है। पहले अधिकारी ने खूब नोटिस-नोटिस खेला , लेकिन बड़े साहब के कालोनी को लेकर दिए निर्देशों की हवा बना दी। हालात यह है कि कुछ कालोनाइजर ईमानदारी से काम कर रहे हैं तो पुराने साहब के खास एक आरआई कालोनाइजरों से एनओसी बुलवाकर परेशान कर रहे हैं। इसमें एक आरआई ऐसे हैं, जिन्हें कालोनाइजर की फटकार सुनने को मिल चुकी है, फिर भी एनओसी के नियमों को दरकिनार कर कालोनाइजरों को भी परेशान कर रहे हैं। पुराने साहब के कर्मकांड सामने आने के बाद कालोनाइजर और कालोनीवासी किसी न किसी मामले को लेकर परेशान हो रहे हैं।


छिपे रूस्तम निकले साहब

लोगों का स्वास्थ्य का ध्यान रखने वाले एक प्रमुख साहब इन दिनों अपने बदलते स्वभाव के कारण शीर्ष जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों में सुर्खियों का केंद्र बने हैं। मीठे बनकर इन साहब ने पहले अपने अधीनस्थ कार्यालयों के निरीक्षण के नाम खूब मलाई खाई और अब इनके कार्यालय में बड़ी संख्या में आउटसोर्स कर्मचारियों की नियम के विरूद्ध भर्ती कर ली गई। इसके लिए न तो जनप्रतिनिधियों और न ही अधिकारियों के संज्ञान में मामला लाया गया। नियुक्ति में भाई भतीजावादा और लेनदेन के आरोप लगने के बाद अधिकारी कटघरे में आए तो मीठा बनकर फिर अपनी ईमानदारी का परिचय देने के लिए बैठकों के बाहर और जनप्रतिनिधियों के स्टाफ के साथ डिंगे हांकने से बाज नहीं आ रहे हैं। चर्चा है कि साहब की यही हरकत किसी भी समय जिले से रवानगी का कारण बन सकती है। इसके लिए नोटशीट भी जारी हो जाए तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी।

Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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