Betul Hospital News: शासकीय से लेकर जिला और निजी अस्पतालों में फायर सेफ्टी के इंतजाम नहीं
Betul Hospital News: There are no fire safety arrangements in government, district and private hospitals.

कागजों पर सिमटकर रह गए सुरक्षा के इंतजाम, हादसों के बाद जागता है जिला प्रशासन
Betul Hospital News: बैतूल। देश-प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में अस्पतालों में हो रही आगजनी की घटनाओं के बाद भी जिला प्रशासन सबक नहीं ले रहा है। कई सरकारी और निजी अस्पतालों में फायर सेफ्टी के पुख्ता इंतजाम नहीं है। ऐसी स्थिति में किसी भी घटना से इंकार नहीं किया जा सकता है। सुरक्षा के इंतजाम केवल कागजों तक सिमटकर रह गए है। गुजरात के राजकोट और दिल्ली के बेबी केयर न्यू बर्न अस्पताल में भीषण आगजनी की घटना सामने आई है।
दिल्ली में हुई आगजनी की घटना से 7 मासूम की मौत हो गई। इस तरह की घटनाएं आने के बाद भी जिला प्रशासन की नींद नहीं खुली है। देखने में आता है कि जब भी कोई घटना होती है, उसके बाद जिला प्रशासन हरकत में आता है। अभी जवाबदार अधिकारी मीटिंग में ही व्यस्त है, उन्हें अस्पतालों के सुरक्षा पुख्ता इंतजाम को लेकर कोई चिंता नहीं है। बैतूल जिले में जिला मुख्यालय से लेकर ब्लॉक मुख्यालय तक बड़े-बड़े अस्पताल संचालित है।
इन निजी और सरकारी अस्पतालों में आगजनी से निपटने के लिए पुख्ता इंतजाम नहीं है। आकस्मिक आगजनी की घटना होने की स्थिति में आग पर काबू पाना मुश्किल हो जाएगा। ऐसे अस्पताल जहां फायर सेफ्टी के पुख्ता इंतजाम नहीं है, उनकी न तो जांच हो रही है और न ही कोई कार्रवाई हो रही है। जिला प्रशासन अस्पतालों की सुरक्षा को लेकर अभी भी गंभीर नहंी है। जिले में तीन से चार मंजिला तक अस्पताल संचालित हो रहे है।
शासन की गाईडलाईन के मुताबिक कई अस्पतालों में आगजनी से निपटने के इंतजाम पर्याप्त मात्रा में नहीं है। इसके पहले भी भोपाल में एक आगजनी की घटना हुई थी, जिसके बाद जिला प्रशासन हरकत में आया था और अस्पतालों की जांच शुरू की। कुछ दिनों बाद ही मामला शांत हुआ और अस्पतालों की जांच को ठंडे बस्ते में डाल दिया।
जिला अस्पताल के हाल-बेहाल
निजी अस्पतालों में फायर सेफ्टी की व्यवस्था तो दूर की बात है। जिला चिकित्सालय में भी फायर सेफ्टी के भी पर्याप्त इंतजाम नहीं है। ऐसे हालात में आगजनी से निपटना संभव नहीं दिख रहा है। जिला अस्पताल में फायर सेफ्टी के इंतजाम तो किए है, लेकिन वह पर्याप्त नहीं है। फायर सेफ्टी के लिए लगाए गए उपकरण टूटे-फूटे है। ऐसे हालत में आगजनी की घटना होने की स्थिति में आग पर काबू पाना मुश्किल हो जाएगा। 18 करोड़ से अधिक लागत से तीन मंजिला जिला अस्पताल का निर्माण किया है। तीनों फ्लोर पर वार्ड संचालित है। यहां फायर सेफ्टी के इंतजाम नाकाफी है। अस्पताल प्रबंधन इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है।
ब्लॉक स्तरों पर भी सेफ्टी के कोई इंतजाम नहीं
ब्लॉक मुख्यालय पर संचालित शासकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों की भी हाल बेहाल है। जब सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों की सांझवीर टाईम्स के संवाददाताओं ने नब्ज टटोली तो हालात बद से बदत्तर निकले। मुलताई संवाददाता विजय सावरकर ने बताया कि मुलताई सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में आगजनी से निपटने के कोई इंतजाम नहीं है। अस्पताल में टैंकर के माध्यम से पीने के पानी की व्यवस्था की जा रही है।
यहां कोई आकस्मिक घटना होती है तो आग पर काबू पानी संभव नहीं है। इसी तरह शाहपुर संवाददाता आशीष राठौर ने शाहपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र के हालात को देखा तो इस अस्पताल में फायर सेफ्टी के लिए केवल लाल फायर सिलेण्डर मिले है, वह भी पर्याप्त मात्रा में मौजूद नहीं थे। सिलेण्डर के अलावा फायर सेफ्टी के कोई इंतजाम नहीं थे। इधर आठनेर संवाददाता निखिल सोनी ने बताया कि मुलताई सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र के फायर सेफ्टी के पर्याप्त इंतजाम नहीं है।
अधिकारी बोले जल्द करेंगे अस्पतालों की जांच
दिल्ली के अस्पताल में आगजनी की घटना सामने आने के बाद अब अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही अस्पतालों की जांच कर फायर सुरक्षा व्यवस्था की जांच करेंगे। सीएमएचओ डॉ रविकांत उईके ने बताया कि अभी जांच करने वाले अधिकारी और उनकी टीम भोपाल मीटिंग में शामिल होने के लिए गए है। जल्द ही सरकारी और निजी अस्पतालों का निरीक्षण कर फायर सेफ्टी के इंतजामों की जांच की जाएगी। जांच में इंतजाम पर्याप्त नहीं पाए गए तो संबंधित अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई होगी। टीम द्वारा निजी अस्पतालों में भी जाकर बारीकी से फायर सेफ्टी को चेक किया जाएगा।
इनका कहना…
आग से निपटने के लिए अस्पतालों में कैसे इंतजाम किए है, इसकी जांच की जाएगी। जांच में कमियां पाई गई तो संबंधित अस्पतालों पर कार्रवाई करेंगे।
डॉ रविकांत उईके, सीएमएचओ, बैतूल





