Betul Aviadh Katai : गवासेन में हुई अवैध कटाई में अधिकारियों ने डाला पर्दा, वरिष्ठ अधिकारियों को गुमराह करने वाली दी जानकारी, सीसीएफ आने के बावजूद कार्रवाई तय नहीं
Betul Aviadh Katai: Officials covered up illegal felling in Gawasen, gave misleading information to senior officials, action not decided despite CCF coming

Betul Aviadh Katai : बैतूल। पश्चिम वन मंडल के गवासेन रेंज में बड़े पैमाने पर सागौन के पेड़ काटने के मामले में अधिकारियों की चुप्पी पर कई सवालियां निशान खड़े हो गए हैं। एक पखवाड़े पहले हुई कटाई की जानकारी डीएफओ सहित रेंजर को रहने के बाद जंगल में पहुंचना मुनासिब नहीं समझा। इसके बाद जब मामला बढ़ा तो जंगल में पहुंचकर काटे गए सागौन के ठूंठ न मिलने का रटा रटाया जवाब दे दिया गया। चौकाने वाली बात तो यह है कि जब कटाई हुई नहीं तो फिर रेंजर परेशान होकर इधर-उधर मीडिया मैनेजमेंट क्यों करते रहे?
जानकार सूत्रों ने बताया कि गवासेन रेंज के आमापुर में पिछले दिनों हुई अवैध कटाई के मामले में डीएफओ से लेकर एसडीओ और क्षेत्र के रेंजर की भूमिका पर कई सवाल उठ रहे हैं। जब कुछ शिकायतकर्ताओं ने मामले में कटाई को लेकर आवेदन दिया, तब टीम जंगल में पहुंची ही नहीं। शिकायकर्ताओं की आपत्ति के बाद एसडीओ ने रेंजर के नेतृत्व में आमापुर बीट में जंगल की खाक छानी। हैरत की बात यह है कि शिकायतकर्ताओं ने अपने आवेदन में स्पष्ट रूप से कटाई होने वाले स्थल का नाम भी अंकित किया था, लेकिन जंगल में जाकर रेंजर और उनकी टीम को कटाई के नाम पर कुछ दिखा ही नहीं। जंगल से ही मोबाइल घनघनाकर अधिकारियों को अवैध कटाई न होने पर रेंजर ने पीठ थपथपाने की कोशिश की, लेकिन जहां पर कटाई हुई थी वहां तक जाने का प्रयास नहीं किया। यही वजह है कि काटे गए सागौन के 50 से अधिक पेड़ टीम को दिखाई ही नहीं दिए।
माफियाओं ने कैसे दिया अंजाम
खुद वन विभाग के अधिकारी कह रहे हैं कि पचास से अधिक सागौन के पेड़ काटने पर पांच से सात वाहनों में ही इतनी सागौन ले जाई जा सकती है। उनका तर्क है कि इतना सागौन वाहनों से ले जाया जाना संभव नहीं है। जब उन्हें बताया गया कि एक दिन में नहीं बल्कि दो से तीन दिन में वाहनों से सागौन परिवहन किया जा सकता है तो उनका सिर चकरघन्नी बन गया। इसके बाद भी तर्क दिए जा रहे हैं कि एक दो ठूंठ से ज्यादा सागौन के पेड़ नहीं ले जाए जा सकते। खुद क्षेत्र के रेंजर इस तरह की बात कहकर सबको गुमराह कर रहे हैं। इसके बाद अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए मीडिया मैनेजमेंट के लिए इधर-उधर भागते दिखाई दिए। रेंजर की इस करतूत की मय सबूत के प्रधान मुख्य संरक्षक को भी शिकायत करने की जानकारी सामने आई है।
सीसीएफ आए, लेकिन असर नहीं
राज्य शासन ने लंबे समय से रिक्त पड़े बैतूल सीसीएफ का पद पिछले दिनों पीएन मिश्रा के रूप में नियुक्ति के साथ पूरा कर दिया, लेकिन उनकी आमद के बावजूद बैतूल जिले के वनों की कटाई का मामला थमता नजर नहीं आ रहा है। चौकाने वाली बात तो यह है कि सीसीएफ का सरकारी नंबर 9424790300 अक्सर बंद रहने से इस महत्वपूर्ण मामले में उनसे चर्चा नहीं हो पा रही।
इनका कहना….
हम जंगल में है। यदि शिकायतकर्ता या आप हमे चिन्हित स्थान बता दें तो दोषियों पर तुरंत कार्रवाई करेंगे। 12 सौ हेक्टेयर जंगल होने के कारण काटे गए ठूंठ की जानकारी नहीं मिल पा रही है।
वरूण यादव, डीएफओ पश्चिम सामान्य वनमंडल बैतूल




