Betul Ki Khabar: केंद्रीय मंत्री- दो आदिवासी विधायकों की नाराजगी भी सार्वजनिक

छात्रावासों में लंबे समय से जमे छात्रावास अधीक्षकों के मसले पर मंत्री लेंगे बैठक, विधायक भी सख्त
Betul Ki Khabar: बैतूल। जिले के विभिन्न छात्रावासों में लंबे समय से जमे अधीक्षकों क तानाशाही और मनमर्जी को लेकर सांझवीर टाईम्स द्वारा सिलसिलेवार समाचार प्रकाशित करने का असर दिखने लगा है। जिले का नेतृत्व करने वाले केंद्रीय मंत्री- सांसद एवं दोनों आदिवासी विधायक भी छात्रावासों में लंबे समय से जमे अधीक्षकों के अलावा यहां की व्यवस्थाओं से नाखुश है। केंद्रीय मंत्री ने तो कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि इस संबंध में अधिकारियों द्वारा सही जानकारी नहीं दी जाती है, इसलिए वे खुद इसकी मानीटरिंग करेंगे।
शीघ्र ही अधिकारियों की बैठक बुलाकर तिथिवार अधीक्षकों की पदस्थापना के संबंध में जानकारी एकत्रित की जाएगी। उन्होंने बताया कि छात्रावासों में अधीक्षकों की तानाशाही और विद्यार्थियों को परेशान नहीं होना पड़ेगा। इसी तरह दोनों आदिवासी विधायक महेंद्र सिंह चौहान और गंगा बाई उइके ने भी इस मामले में कड़ा रूख जाहिर किया है।
जिले में लंबे समय से छात्रावास अधीक्षक अपनी राजनीतिक एप्रोच से मनमाफिक जगह पदस्थापना कराने में कामयाब होते जा रहे हैं। भले ही वे इसके पात्र है या नहीं? अधिकारियों के पास यदि किसी जनप्रतिनिधि का फोन गया तो समझ लीजिए संबंधित अधीक्षक को मनचाह जगह पदस्थापना दे दी गई।
इसी का खामियाजा छात्रावासों में पढ़ने वाले गरीब तबके के एससीएसटी और पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों को भुगतना पड़ रहा है, जिसके लिए शासन द्वारा आदिम जाति विभाग को करोड़ों का बजट आवंटित किया जा रहा है, लेकिन उन्हें दो वक्त का भोजन भी गुणवत्तायुक्त नहीं मिलता है। इसकी बानगी जिले में लगातार छात्रावासों के विद्यार्थियों द्वारा गुणवत्ता युक्त और इल्लीयुक्त भोजन दिए जाने की शिकायत के बाद देखने को मिल चुकी है। डाइट के अनुसार भोजन न दिए जाने से कई छात्रावासों में विद्यार्थियों की सेहत पर खासा असर पड़ रहा है। इसके बावजूद न तो सहायक आयुक्त और न अधीक्षकों का दिल पसीज रहा है।
शिकायतों के बाद कार्रवाई नहीं
यहां पर चौकाने वाली बात यह है कि छात्रावासों की व्यवस्था को लेकर विद्यार्थियों के अलावा पालकों ने कई बार मोर्चा खोला, लेकिन शिकायती आवेदन बैतूल में जनसुनवाई से आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं। कहा जा रहा है कि बैतूल में सबसे अच्छी जनसुनवाई होती है, लेकिन पुराने इतिहास पर नजर दौड़ाएं तो स्पष्ट हो जाएगा कि अधीक्षकों की तानाशाही और छात्रावासों में घटिया भोजन की जितनी भी शिकायतें जनसुनवाई और अधिकारियों के पास पहुंची है, इसका कोई भी सकारात्मक परिणाम सामने नहीं आया। इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि छात्रावासों का पूरा काम भगवान भरोसे चल रहा है।
खबर के बाद जागे हमारे जनप्रतिनिधि
सांझवीर टाईम्स द्वारा छात्रावासों की व्यवस्था और लंबे समय से जमे अधीक्षकों की मनमानी को लेकर सिलसिलेवार समाचार प्रकाशित करने के बाद जिले के नेतृत्व करने वाले हमारे जिले के आदिवासी जनप्रतिनिधि की नाराजगी सामने आई है। केंद्रीय राज्य मंत्री और स्थानीय सांसद दुर्गादास उइके ने कहा कि छात्रावासों को लेकर सांझवीर टाईम्स में सिलसिलेवार समाचार नियमित रूप से पढ़ रहे हैं। यह मामला बेहद गंभीर है। मैंने खुद इसे संज्ञान में लिया है। शीघ्र ही अधिकारियों की इस संबंध में बैठक बुलाऊंगा। उनसे जानकारी ली जाएगी कि कितने अधीक्षक कब से छात्रावासों में पदस्थ है।
लंबे समय से एक ही स्थान पर जमे अधीक्षकों को तत्काल हटाने के लिए निर्देश दिए जाएंगे। इसका पालन न करने वाले अधिकारियों पर भी कार्रवाई की जाएगी। भैंसदेही विधायक महेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि तबादले से कुछ छात्रावासों में बदलावा हुआ है, लेकिन उनके विस क्षेत्र में लंबे समय से छात्रावासों के अधीक्षकों के जमे होने की जानकारी ली जाएगी। उन्होंने बताया कि सांझवीर टाईम्स के माध्यम से यह मामला सामने आया है। निश्चित रूप से विद्यार्थियों की समस्याओं को कोई परेशानी न हो इस बात का ध्यान में रखते हुए लंबे समय से अधीक्षकों को हटाने के लिए अधिकारियों से पत्राचार करेंगे।
इस मामले में कोई भी कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। घोड़ाडोंगरी विधायक गंगा उइके ने बताया कि वे खुद लंबे समय से एक ही स्थान पर जमे अधीक्षकों के खिलाफ है। कुछ माह पहले लंबे समय से जमे उनके विधानसभा में अधिकांश अधीक्षक हटाए जा चुके हैं। कुछ ने व्यक्तिगत और पारिवारिक कारण बताया है, इसलिए इन्हें रोका गया है। यदि आपके पास भी ऐसे नाम तो हमें बताए नियम के अनुसार उन्हें भी दूसरे स्थान पर पदस्थ किया जाएगा। विधायक उइके ने बताया कि वे खुद विद्यार्थियों को अच्छी सुविधा दिलाए जाने की पक्षधर है। कहीं से भी अव्यवस्था की शिकायत आने पर उसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।




