Betul Samachar : 36 घण्टे के जाम से जुबां पर आया लोगों का दर्द

Betul Samachar: People's pain due to 36 hours of traffic jam came to the fore

जनहित के मामले में त्वरित निर्णय नहीं लेने पर सभी में आक्रोश

Betul Samachar : गुरुवार दोपहर से लेकर शनिवार शाम तक नेशनल हाइवे भोपाल मार्ग पर जाम ने लोगों की परेशानियां ऐसा बढ़ाया है कि लोगों का दर्द जुबां पर आ गया है। जो लोग इस जाम के प्रत्यक्षदर्शी हैं, उनका सिर्फ यही कहना है कि जनहित की सुविधाओं को लेकर आखिर त्वरित निर्णय क्यों नहीं लिए जाते? सरकार हो या फिर जनता से जुड़े वे उपक्रम जिनके कंधों पर जनता को सुविधाएं देने का दारोमदार रहता है, उनके लिए 36 घण्टे का जाम एक सबक है।

इस जाम में फंसे लोगों को इस कदर परेशान होना पड़ा है कि अब सबकी जुबां पर एक ही बात है या तो हाइवे का काम जल्द से जल्द पूरा करवा दिया जाए या फिर जब तक मामले का पटाक्षेप नहीं हो जाता तब तक नेशनल हाइवे से गुजरने वाले वाहनों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जाए।

थोड़ी भी देर होती तो मरीज की जा सकती थी जान

कोठी बाजार निवासी बसन्त सोनकपुरिया बताते हैं कि इस समय वे अपने परिजन को लेकर इलाज के लिए भोपाल जा रहे थे। ट्रक पलटने के बाद उनका वाहन भी घाट पर फंस चुका था। देखते ही देखते सड़क की दोनो तरफ हजारों की संख्या में वाहन फंसे चुके थे। जाम की वजह से हालात इतने खराब हो चुके थे कि वाहन को इधर उधर करना भी मुश्किल हो रहा था।

बमुश्किल लोगों के सहयोग से रास्ता बनाकर वापस बैतूल आकर मरीज को रानीपुर, घोड़ाडोंगरी, चोपना के रास्ते भोपाल ले जाना पड़ा। जैसे ही अस्पताल पहुंचे डॉक्टर का कहना था कि यदि मरीज 1 घण्टे और ज्यादा लेट हो जाता तो स्थिति बिगड़ सकती थी। इसके लिए वह सिस्टम जिम्मेदार है, जिसकी वजह से हाइवे का काम रुका हुआ है।

पीने के पानी को तरसे छोटे छोटे बच्चे

इसी जाम में कोठीबाजार में ही रहने वाले एक परिवार के परिजन भी फंसे हुए थे। जिनके साथ छोटे बच्चे भी सफर कर रहे थे, लेकिन बच्चों को पीने का पानी तक नसीब नही हो पा रहा था। कोठीबाजार निवासी राजेश्वर दयाल ने बताया कि अमरावती में रहने वाले उनके परिजन अपने निजी वाहन से नर्मदापुरम से लौटकर अमरावती जा रहे थे। बरेठा घाट पर लगे जाम में फंसने के बाद काफी रात भी हो चुकी थी। खाने पीने का सामान तक नहीं था।

बच्चों को प्यास लगने पर दूर-दूर तक पानी की कोई व्यवस्था नहीं होने की वजह से परिजन परेशान हो रहे थे। रात्रि में हमें सूचना मिलने के बाद परिजनों और बच्चों के लिए भोजन तैयार कर रात में ही मौके पर रवाना होना पड़ा। वाहन में सवार बच्चों और महिलाओं को दूसरे वाहन की व्यवस्था कर बमुश्किल बैतूल लाना पड़ा। पता चला है कि नियमों के पेंच फंसे होने की वजह से बरेठा घाट पर सड़क निर्माण का काम सालों से अटका हुआ है, लेकिन सवाल यह है कि इसका खमियाजा आम जनता क्यों भुगते ।

नागपुर जाना आसान, भोपाल जाना मुश्किल

कोठीबाजार निवासी ओम पुरोहित का कहना है कि। सालों पहले बैतूल नागपुर और बैतूल भोपाल दोनो हाइवे का काम एक साथ शुरू हुआ था, लेकिन नागपुर हाइवे तो लोगों को बेहतर सुविधा दे रहा है। बैतूल भोपाल हाइवे का काम आज भी पूर्ण नहीं हो सका है। बैतूल से नागपुर और भोपाल की दूरी लगभग समान है पर लोगो के लिए नागपुर पहुंचना तो आसान है, लेकिन भोपाल पहुंचना खतरे से खाली नहीं है।

जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को वस्तुस्थिति से न्यायालय को अवगत कराने की जरूरत है, ताकि न्याय के मंदिर में इस पर त्वरित निर्णय लिए जा सकें ,लेकिन जिस तरह से सालों से यह मामला अटका हुआ है। उससे लग रहा है कि अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को आम जनता को होने वाली दुख तकलीफों से कोई सरोकार नहीं है।

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Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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