Betul Hindi Samachar: 16 के मुकाबले 15 पुलिसकर्मियों पर ट्रैफिक का बोझ

Betul Hindi Samachar: Traffic burden on 15 policemen as against 16

डिंडोरी जिले में हुए हादसे से निपटना बैतूल में संभव नहीं, अधिकारी भी नहीं दे रहे ध्यान…

Betul Hindi Samachar: (बैतूल)। बैतूल में भी डिंडोरी जिले में पिछले दिनों हुआ जैसा हादसा हो सकता है। यह बात इसलिए कही जा सकती है, क्योंकि ट्रैफिक अमला ऊंट के मुंह में जीरा जैसा साबित हो रहा है। महज एक चौथाई ट्रैफिक अमले पर भारी भरकम सुरक्षा संभालने का बोझ है, ऐसे में जिस ओर ट्रैफिककर्मी ध्यान नहीं दे, वहां पर खतरे का अंदेशा बना रहता है। शहर में यातायात व्यवस्था पहले ही व्यापारियों की लापरवाही से बेपटरी हो चुकी है। दूसरी ओर निजी वाहन चालक खुलेआम वाहनों पर ओवरलोड सवारियां भरकर सड़कों पर फर्राटा भर रहे है। जबकि आदेश दिन यही वाहन सड़क हादसों का कारण बन रहे है। यह सारा खेल पुलिस के आंखों के सामने हो रहा है।

इसके बाद भी ऐसे ओवरलोड सवारियों से भरी वाहन चालकों के खिलाफ कार्यवाही करने के बजाय पुलिस ने आंख मूंदी हुई है। यहां बता दे कि बैतूल में पैमाने पर डगमगाकर वाहन चल रहे है। जिसके चलते आये दिन हादसे की आशंका बनी रहती है। वाहनों पर सवारियों के बैठाने का कहीं कोई मानक नहीं है। खास बात तो यह है कि शहर के भीतर और शहर के सीमावर्ती क्षेत्रों में यातायात व्यवस्था संभालने के लिए पुलिस विभाग के पास इतना बल ही नहीं है जितने की जरूरत है। उसके बाद यातायात पुलिस को चौक चौराहों की व्यवस्था के अलावा धरना प्रदर्शन , ज्ञापन जैसे कई ऐसे कार्यक्रम भी सौंप दिए जाते हैं जिनमें यातायात व्यवस्था बाधित होने का खतरा निर्मित होने की संभावना रहती है। ऐसे में वैध और अवैध टेक्सी चालक सरेआम लोगों की जान के साथ खिलवाड़ करने से नहीं चूक रहे।

भडूस, बैतूल बाजार, भोपाल हाइवे पर आम हो चुके नजारे

परिवहन और यातायात विभाग के नियमों की किस तरह धज्जियां टैक्सी वाहन चालक उड़ाते नजर आते हैं। भडूस, खेड़ी , चिचोली, बैतूल बाजार सहित बैतूल से भोपाल जाने वाले हाइवे इनकी मनमानी को देखा जा सकता है। तूफान , पिकअप और छोटा हाथी जैसे वाहनों में अंदर सवारियां बैठाने के साथ-साथ सवारियों को बाहर लटका कर ढोया जा रहा है, लेकिन इन पर कार्रवाइयां नहीं हो पा रही है।

हालात: स्टॉफ की कमी का वर्षों से नहीं हुआ निदान

सड़कों पर मंडराती मौत के पीछे सबसे बड़ा कारण जो सामने आया है कि यातायात पुलिस के पास बल की कमी है। शहर के एक बड़े क्षेत्र और सीमावर्ती इलाकों में कार्यवाही के लिए यातायात पुलिस को एक बड़ी टीम की जरूरत है, लेकिन मौजूदा बल ऊंट के मुहं में जीरा जैसा साबित हो रहा है। जानकारी के अनुसार यातायात व्यवस्था सुचारू रूप से चलाने के लिए पुलिस विभाग में स्वीकृत बल के हिसाब से 61 कर्मचारियों की आवश्यकता है। 61 कर्मचारियों के मुकाबले वर्तमान में महज 16 कर्मचारियों के भरोसे शहर की यातायात व्यवस्था चलाई जा रही है। इनमें यातायात टीआई, इंस्पेक्टर, हवलदार आदि मिलाकर 3 महिला पुलिसकर्मी शामिल हैं। ऐसे में इन कर्मचारियों को चौक-चौराहों की व्यवस्था ,चालानी कार्यवाही, धरना, प्रदर्शन, ज्ञापन आदि में भी अपनी ड्यूटी करनी पड़ रही है।

इनका कहना…..

ओवरलोड वाहनों पर समय पर कार्यवाही की जाती है, लेकिन बल की कमी होने से काफी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। जिन रास्तों के जिक्र किया गया है, उन रास्तों पर गश्ती बढ़ाई जाएगी।

गजेंद्र केन, यातायात प्रभारी बैतूल।

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Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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