Betul Samachar: कलेक्टर बंगले में आधा सैकड़ा पेड़ों की कटाई, नगरपालिका से भी नहीं ली गई पेड़ों को काटने की अनुमति, मशीनों से काट दिए पेड़
Betul Samachar: Half a hundred trees were cut in the collector's bungalow, permission to cut trees was not even taken from the municipality, trees were cut with machines.

Betul Samachar:(बैतूल)। पर्यावरण संरक्षण को लेकर जहां जिले में करोड़ों रुपए पौधरोपण पर खर्च किए जा रहा हैं, वहीं विकास के नाम पर इन्हीं पेड़ों की अवैध तरीके से कटाई की जा रही है। कलेक्टर बंगले के अंदर गोपनीय तरीके से चल रहा सफाई अभियान इन दिनों कर्मचारी एवं अधिकारी वर्ग में काफी चर्चा का विषय बना हुआ है। चर्चा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि विकास के नाम पर बंगले के अंदर लगे आधा सैकड़ा से अधिक पेड़ों की बेरहमी से कटाई कर दी गई है। जेसीबी और क्रेन की मदद से पेड़ों को काटा जा रहा है। सालों पुराने इन पेड़ों को कटाने जाने के पीछे क्या कारण है यह अभी तक किसी की समझ नहीं आ सका है। क्योंकि इससे पहले किसी भी कई कलेक्टर यहां रह चुके हैं लेकिन उन्होंने कहीं पेड़ों को नुकसान नहीं पहुंचाया है। कलेक्टर बंगला जो घने पेड़ों से आच्छादित हुआ करता था अब वह मैदान जैसा नजर आने लगा है। बताया गया कि प्रदेश स्तर पर बैतूल कलेक्टर का ही एक मात्र बंगला ऐसा है जहां सबसे ज्यादा पेड़ पौधे लगे हैं, लेकिन जिस तरह पेड़ों की कटाई की गई है वह विनाश को दर्शाता है।
विकास के नाम पर काटे जा रहे पेड़
शहर में विकास के नाम पर सालों पुराने पेड़ों की बेरहमी से कटाई की जा रही है। सड़क चौड़ीकरण के नाम पर जहां नगरपालिका कोठीबाजार क्षेत्र में पेड़ों को काट रही है। वहीं सर्किट हाउस के अंदर तहसील कार्यालय बनाने के नाम पर पहले ही पेड़ों को काटा जा चुका है। अब कलेक्टर बंगले के अंदर मौजूद पेड़ों को भी गुपचुप तरीके से काटा जा रहा है। लोगों का कहना है कि शहर के अंदर कलेक्टर बंगला ही ऐसा है जहां सबसे ज्यादा पेड़ पौधे लगे हैं। पहले पेड़ों की वजह से अंदर कुछ दिखाई नहीं देता था, लेकिन पेड़ों को काटे जाने के बाद तो जिला पंचायत से कॉलेज रोड साफ नजर आ जाती है। लोगों की समझ में नहीं आ रहा है कि आखिर इतनी भारी मात्रा में पेड़ों को काटने की क्या जरूरत आन पड़ी थी।
आम जन को नहीं मिलती पुराने वृक्ष हटाने की अनुमति
कलेक्टर बंगले में जहां आधा सैकड़ा से अधिक पेड़ों की बिना अनुमति कटाई कर दी गई। वहीं आम जन जब सूखे और जर्जर पेड़ों को हटाने की अनुमति मांगते हैं तो उन्हें नगरपालिका से अनुमति नहीं दी जाती है। अभी कुछ दिन पहले शहर के विनोबा नगर में खप्पर वाली माता मंदिर के सामने लगभग 50 वर्ष से अधिक पुराना नीम का पेड़ अचानक जमींदोज हो गया। जबकि इस पेड़ को हटाए जाने के लिए क्षेत्र के लोगों ने नगरपालिका में भी आवेदन दिया था,लेकिन नगरपालिका ने पेड़ को हटाने की कोई कार्रवाई नहीं की। जिसके कारण यह पेड़ आसपास के मकानों पर धराशाही हो गया था।
इनका कहना…
कुछ पुराने पेड़ों की छटाई की गई है। साफ-सफाई के उद्देश्य से पेड़ काटे गए है। मुझे भी पर्यावरण की काफी चिंता रहती है।
नरेन्द्र कुमार सूर्यवंशी, कलेक्टर, बैतूल





