Prashasnik Kona : प्रशासनिक कोना: साहब का यह कौनसा शौक जो नागपुर से हो रही डिमांड पूरी?? इन थानेदार साहब को हनुमानजी का प्रसाद लेने से आखिर क्या परहेज??? पानी वाले साहब को आखिर क्यों खाते बन रहा, न निगलते???? विस्तार से पढ़िए हमारे चर्चित कॉलम प्रशासनिक कोना में…….

Prashasnik Kona: Administrative corner: What is this hobby of the sahab that his demand is being fulfilled from Nagpur??

बदले साहब, नागपुर से किसे बुलाया?

प्रशासनिक अमले के एक वरिष्ठ अधिकारी का हाल ही में दूसरी जगह तबादला हुआ है। यह सुर्खियों का विषय नहीं, बल्कि चर्चा इस बात की है कि वे नागपुर से किसे बुलाया जा रहा है? चर्चा है कि साहब हर दिन रात 8 बजे खूब खींचकर लेते हैं, यह बात भी सबको पता है पर जिसे नागपुर से बुलवाया जा रहा है, अब इस शौक को लेकर खुलासा होने से खूब चर्चा हो रही है। वैसे उन्हें जानने वाले कहते हैं कि साहब को देखकर लगता नहीं कि उन्हें यह शौक भी होगा, लेकिन पिछली पदस्थापना के दौरान किसी सुंदर चेहरे को उनके चेंबर में घंटों बैठा देखकर लोगों को उनकी नियत पर शक जरूर हो गया। साहब का नागपुर प्रेम अचानक नए स्थान पर पंद्रह दिन पहले पहुंचने पर अचानक परवान चढ़ने से खूब चर्चा हो रही है। बताते चले कि साहब का हाल ही में स्थानांतरण हुआ है और वे दो साल की पारी खेलकर 50 किमी दूर एक क्षेत्र में पदस्थ हुए।

हनुमान जी का प्रसाद लेने से परहेज

एक थानेदार का धर्मांतरण का मामला इन दिनों खासा चर्चा का विषय बना हुआ है। चर्चा जोरों पर है कि यह साहब जिस थाने में पदस्थ है, वहां पर हनुमान जी की आरती होने के बाद सभी लोग आरती लेकर प्रसाद भी लेते हैं पर साहब को दोनों से परहेज है। बताया जाता है कि उक्त थानेदार साहब पहले ऐसे नहीं थे। करीब 6 माह पहले ही उनके स्वभाव में अचानक इस तरह का परिवर्तन देख स्टाफ और उनके परिचित लोग खासे सहमे हुए हैं। कुछ दिनों पहले ही उनकी जिस थाने में पदस्थापना हुई है, वहां उनका यह रवैया तेजी से बदल रहा है। स्टाफ के लोग चर्चा कर रहे हैं कि पहले साहब आरती भी लेते थे और प्रसाद भी खाते थे, लेकिन अब इससे दूरी बना ली है। थानेदार की यह बात बाहर निकलकर आई तो लोग इसे धर्मांतरण से जोड़कर देख रहे हैं। यह साहब स्मार्ट होने के साथ हाल ही में लाइन से थाने भेजे गए हैं।

इन्हें खाते बन रहा न निगलते

पानी वाले विभाग से जुड़े एक साहब पर उपरोक्त कहावत चरितार्थ हो रही है। उन्हें यहां पदस्थ हुए करीब 4-5 माह का समय ही बीता है, लेकिन काम करने में सार्वजनिक तौर पर अपने अधीनस्थों के अलावा वरिष्ठ अधिकारियों भी अवगत करा चुके हैं। उनकी यहां रहने की मंशा क्यों नहीं है, वहीं जाने, लेकिन कहा जा रहा है कि किसी मलाईदार जगह पदस्थापना कराने के लिए उन्होंने एड़ी चोटी का जोर लगाया है। हालांकि वे जिस जगह से आए हैं, वहां लंबे समय मलाई खाई और जनप्रतिनिधियों की नाराजगी के बाद राजधानी अटैच करने के कुछ ही दिनों बाद उन्हें यहां भेज दिया गया। राजधानी में फील्डिंग कर वे दोबारा उसी जगह जाने का प्रयास कर रहे थे, लेकिन मंसूबे में कामयाब नहीं हो सके। अब उनका मन नहीं लग रहा है और उन्हें खाते बन रहा है और न निगलते। वे अब अपनी पीड़ा अधीनस्थों को बता रहे हैं और उन्हीं पर आग बबूला हो रहे हैं।

Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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