Betul Ki Khabar: सायबर ठगी-चंदन चोरों की आसान जमानत पर सवालिया निशान

पुलिस की जांच में चूक या मिलीभगत? गिरफ्तारी तक पुलिस सक्रिय, फिर दोनों मामले में आसानी से कैसे हो गई जमानत?
Betul Ki Khabar: बैतूल। जिले में हाल ही में सामने आए दो बड़े मामलों ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़े कर दिए हैं। करोड़ों के सायबर क्राइम प्रकरण और एयर फोर्स स्टेशन से जुड़े चंदन चोरी के मामले में आरोपियों को आसानी से जमानत मिल जाना, पुलिस की जांच और केस डायरी की मजबूती पर संशय पैदा कर रहा है। इन मामलों ने न केवल पुलिस की किरकिरी कराई है, बल्कि आम जनता के बीच भी यह संदेश गया है कि गंभीर अपराधों में भी लापरवाही बरती जा रही है।
सायबर क्राइम के मामले को एसपी ने जरूर गम्भीरता से लिया और कोतवाली टीआई को नोटिस भी जारी किया। जानकारी मिली है कि फटकार के बाद अब कोतवाली पुलिस निचली अदालत के फैसले को चुनोती देने हाई कोर्ट जा रही है। यही हाल चंदन चोरी के मामले का भी दिख रहा है जहां एक वरिष्ठ अधिवक्ता ने पुलिस कार्यवाही पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
करोड़ों के सायबर क्राइम को भी लिया हल्के में
सायबर क्राइम के करोड़ों रुपये के मामले में कोतवाली पुलिस की ढिलाई का खामियाजा यह रहा कि एक आरोपी को अदालत से जमानत मिल गई। बताया जा रहा है कि तकनीकी साक्ष्यों को समय पर और ठोस तरीके से प्रस्तुत नहीं किया गया, जिससे बचाव पक्ष को निचली अदालत से इसका लाभ मिला, और आरोपी को एक झटके में जमानत मिल गई। इस मामले में जब पुलिस अधीक्षक के संज्ञान में तथ्य आए, तो उन्होंने कोतवाली पुलिस को नोटिस देकर कड़ी फटकार लगाई। इसके बाद अब पुलिस निचली अदालत के फैसले को चुनौती देने के लिए हाई कोर्ट का रुख कर रही है, लेकिन तब तक आरोपी को राहत तो मिल ही चुकी है।
एयर फोर्स स्टेशन के भीतर चंदन चोरी, झटके में हुई जमानत
आमला स्तिथ एयर फोर्स स्टेशन सुरक्षा की दृष्टि से काफी संवेदन शील माना जाता है। यहां चोरी की वारदात कोई छोटी मोटी घटना नहीं मानी जा सकती। आरक्षित स्थल एयर फोर्स स्टेशन क्षेत्र से चंदन चोरी जैसे संवेदनशील मामले में भी पुलिस की कार्यवाही पर सवाल उठे हैं। इस प्रकरण में एक वरिष्ठ अधिवक्ता ने खुले तौर पर जांच की दिशा और पुलिस की भूमिका पर आपत्ति दर्ज कराई है। उनका कहना है कि ऐसे मामलों में साक्ष्य संकलन, गवाहों के बयान और चार्जशीट की तैयारी में अत्यधिक सावधानी बरतनी चाहिए थी, लेकिन लापरवाही के चलते मामला कमजोर पड़ गया, जिसका सीधा फायदा आरोपियों को मिला।
अधिवक्ता राजेंद्र उपाध्याय के मुताबिक अदालत ने साफ कहा की गिरफ्तारी की सूचना कोर्ट में पेशी से 2 घंटे पहले तक नहीं दी। विवेचक गिरफ्तारी के ठोस आधार भी पेश नहीं कर सके। अपराध 7 वर्ष से कम सजा वाला है, इसलिए कोर्ट ने ज्यूडिशियल रिमांड देने से इनकार कर दिया। न्यायालय ने कहा कि पुलिस यदि सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी करती है तो -दोबारा गिरफ्तारी कर सकती है।लेकिन सवाल यह भी है कि क्या यह सभी ओपचारिकता पूरी करने में विवेचकों द्वारा लापरवाही बरती गई। यदि ये सही है तो उनके खिलाफ कार्यवाही तय की जाना चाहिए।
ताक पर वरिष्ठों के निर्देश,लापरवाही या स्वार्थ सिद्धि
इन दोनों घटनाओं ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या थानों में पदस्थ स्टाफ अपने वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों को गंभीरता से नहीं ले रहा, या फिर किसी स्वार्थ के चलते जानबूझकर कमजोर केस तैयार किए जा रहे हैं। पुलिस कप्तान की सख्ती के बावजूद यदि जमीनी स्तर पर सुधार नहीं होता, तो ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति से इनकार नहीं किया जा सकता। लगातार सामने आ रही जमानतों से आम नागरिकों का पुलिस पर भरोसा डगमगाने लगा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अब जरूरत है कि संवेदनशील और बड़े अपराधों में जांच की गुणवत्ता पर विशेष निगरानी रखी जाए, दोषी पुलिसकर्मियों की जवाबदेही तय हो और तकनीकी व कानूनी प्रशिक्षण को और मजबूत किया जाए, ताकि भविष्य में अपराधी कानून के शिकंजे से इतनी आसानी से बाहर न निकल सकें। इसी तरह मार्च-अप्रैल माह में जिले की दो जनपद चिचोली और भीमपुर में एसबीएम के 13 करोड़ के घोटाले के मास्टर माइंड राजेंद्र परिहार को भी सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलना पुलिस की लापरवाही पर सवाल उठा रहा है।
इनका कहना…
सायबर क्राइम के मामले में हाईकोर्ट जा रहे हैं। चंदन चोरी मामले में माननीय न्यायालय ने जमानत दी है, उसका देखते है, कागज मंगवा रहे हैं।
वीरेंद्र जैन , एसपी बैतूल




