Betul News: जिला अस्पताल में खिड़कियों के रास्ते हो रही आत्महत्या की कोशिशें
Betul News: Suicide attempts are taking place through the windows in the district hospital.

लगातार घटनाओं के बाद भी नहीं चेता जिला अस्पताल प्रबंधन, खामी को दूर करने के प्रयास शुरू नहीं…
Betul News:(बैतूल)। करोड़ों की लागत से निर्मित किए गए जिला अस्पताल की एक छोटी सी खामी लम्बे समय से लोगों को आत्महत्या के लिए प्रेरित कर रही है, लेकिन असप्ताल प्रबन्धन ने अभी तक इस खामी को दूर करने की कोशिश तक नहीं की है। जबकि ऐसी दो वारदातें घटित हो चुकी हैं इमसें एक व्यक्ति की मौत तक हो गई, लेकिन ऐसा लग रहा है कि प्रबन्धन अब अगली घटना होने की राह देख रहा है।
दरअसल पुराने अस्पताल की बिल्डिंग को तोडक़र 3 मंजिला नया अस्पताल नए स्थान पर बनाया गया था। लगभग 30 करोड़ रुपए की लागत से यह अस्पताल सर्व सुविधा युक्त बनाया गया था, लेकिन इसकी डिजाइन में सबसे बड़ी खामी यह सामने आई है कि किसी भी मंजिल पर टॉयलेट में बनी खिड़कियों में जाली या ग्रिल नहीं बल्कि कांच लगा दिए गए हैं। जो आसानी से खोले और बन्द किए जा सकते हैं, जिसकी वजह से यहां 45 फीट की ऊंचाई से अस्पताल में भर्ती दो मरीज आत्म हत्या की कोशिश कर चुके हैं। इसमें से एक कि इलाज के दौरान मौत भी हो चुकी है।
घटना 1: अस्पताल बनने के बाद सबसे पहली घटना 15 दिसम्बर 2019 को घटित हुई थी। अस्पताल में बाडगांव का मरीज भर्ती था। बताया जा रहा है कि यह मरीज अपनी बीमारी की वजह से परेशान होने के साथ साथ मानसिक रूप से कमजोर भी था। इस मरीज ने खिडक़ी के कांच सरकाया ओर लगभग 45 फिट की ऊंचाई से नीचे छलांग लगा दी थी। इसकी दूसरे ही दिन इलाज के दौरान मौत हो गयी
घटना 2: दूसरी घटना 16 नवम्बर 2023 को घटित हुई जब पंजाब के रहने वाले राजू नाम के व्यक्ति को ट्रेन से गिरने के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था। रात्रि के वक्त यह मरीज जब खिडक़ी से नीचे कूदने की कोशिश कर रहा था तभी इसे देख लिया गया, लेकिन दिक्कत यह थी कि यदि उसे पकड़ा जाता तब तक वह नीचे छलांग लगा सकता था। इसी पसोपेश में लगभग 8 घण्टे तक यह ड्रामा चलता रहा। सुबह सुबह नगर पालिका के फायर कर्मी मौके पर पहुंचे ओर मरीज को सकुशल नीचे उतार लिया गया था। सवाल यह उठ रहा है कि ये दो घटनाएं घटित होने के बावजूद आज भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। प्रबन्धन ने इन खिड़कियों को सुरक्षित किए जाने के प्रयास तक नहीं किए। शायद अब अगली घटना का इंतजार किया जा रहा है।
जिला अस्पताल-सीएमएचओ कार्यालय में तालमेल नहीं
ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं, जब जिला अस्पताल में कोई घटना हुई तो सीएमएचओ कार्यालय अपना पल्ला झाड़ लेता है। दरअसल जिला अस्पताल में सिविल सर्जन का पद सृजन किया गया है। इसकी जिम्मेदारी भले ही सिविल सर्जन को है, लेकिन कोई मामला होने पर रिपोर्टिंग सिविल सर्जन के माध्यम से सीएमएचओ को जाती है। चूंकि सीएमएचओ स्वास्थ्य विभाग का मुखिया होता है, लेकिन बैतूल में कई गंभीर घटना होने के बाद अधिकारियों में तालमेल नहीं होने के कारण स्थिति बिगड़ रही है। जिला अस्पताल में हुई घटनाओं में ताल-मेल नहीं होने के कारण आए दिनों सुर्खियां बनी रहती है।
इनका कहना…
मेरे संज्ञान में यह प्रकरण लाया गया है। घटना दोबारा घटित ना ही इसके लिए समुचित व्यवस्था करवाई जाएगी।
रविकांत उइके सीएमएचओ, बैतूल




