Betul Political News : प्रशासनिक कोना: आखिर पुलिस विभाग कौनसे साहब और मैडम में नहीं बैठ रही पटरी?? एक प्रमुख अधिकारी का पद बड़ा, लेकिन रुतबा क्यों हो रहा कम??? निजाम बदलने से किन साहब की जिले में रहने में रुकने का मन नहीं???? पढ़िए हमारे चर्चित कॉलम प्रशासनिक कोना में…..
Betul Political News: Administrative corner: After all, which police department, sir and madam, is not keeping track??


Betul Political News : जिले के पुलिस विभाग के एक अनुविभाग में एसडीओपी और मुख्यालय की महिला टीआई के बीच पटरी नहीं बैठ रही है। यह सिलसिला पिछले लंबे समय से चला आ रहा है। दोनों को वरिष्ठ अधिकारी भी सामांजस्य स्थापित करने को कहे चुके हैं, लेकिन नतीजा सिफर निकला। टशन इस बात की है कि एसडीओपी और टीआई दोनों की कार्यप्रणाली काफी बेहतर बताई जाती है। काम को लेकर दोनों अधिकारियों के वरिष्ठ कायल है। यही वजह है कि किसी एक को दूसरी जगह पदस्थ करने के लिए भी प्रयास नहीं किए जा सकते हैं। यदि ऐसा होता है तो व्यवस्थाएं बिगड़ जाएगी। वैसे भी दोनों अधिकारी वरिष्ठ गुडबुक में शामिल है। लिहाजा सामांजस्य स्थापित करने के लिए फिर प्रयास करने की खबर है। बताते चले की इस अनुविभाग के एसडीओपी कुछ माह बाद सेवानिवृत्त भी होने वाले हैं।
पद बड़ा, रूतबा कम (Betul Political News)
पुलिस विभाग की एक महिला डीएसपी रैंक की अधिकारी अपनी लो प्रोफाइल कार्यप्रणाली को लेकर काफी चर्चा में है। उन्हें पदस्थ हुए कुछ माह ही हुए है, लेकिन विभाग में कोई बड़ी उपलब्धि हासिल नहीं हुई है। मैडम अपने नेतृत्व में विधानसभा चुनाव का सफल संचालन करने का डिंढोरा पीट रही, लेकिन अपने क्षेत्र में बढ़ती आपराधिक घटनाओं को रोकने के लिए कोई प्रयास तक नहीं कर पा रही है। टीआई क्या कर रहे हैं उन्हें इस बात से भी मतलब नहीं है। विभाग में चर्चा में है कि थानों का निरीक्षण करने में भी वे कम रूचि दिखाती है, इसलिए टीआई को मौज करने का मौका मिल रहा है। चर्चा तो यह भी है कि बड़े साहब ही इस महिला अधिकारी की कार्यप्रणाली को लेकर संतुष्ट नहीं दिखाई दे रहे हैं। (Betul Political News)
निजाम बदले, अब कौन जाएगा? (Betul Political News)
तबादला प्रशासकीय प्रक्रिया का एक अंग है। हालांकि लंबे समय तक एक ही स्थान पर रहने के बाद दूसरे जिले में जाने का मन भला किसका होता है। हाल ही में निजाम का तबादला एक अन्य बड़े जिले में हुआ है। हालांकि साहब के बारे में कहा जाता है कि नियम कायदों के काफी सख्त रहे। इस बीच उनकी गुड बुक में शामिल थे, जो निजाम के जाने से मायूस है। चर्चाएं चल रही है कि जिले के कुछ विभाग प्रमुख भी निजाम के बदलने के साथ उन्हीं की पदस्थापना या आसपास के जिले में तबादले के लिए जोड़-तोड़ कर चुके हैं। लोकसभा चुनाव के पहले सफलता मिली, अन्यथा चार माह उन्हें इंतजार करना पड़ सकता है। बताते चले कि इस सूची में ऐसे अधिकारी भी है जो कुछ वर्ष पहले ही यहां पदस्थ हुए हैं।




