Betul Politics News: बीते चुनाव में ब्रम्हा को झेलना पड़ी थी नाराजगी, अब खुद विरोध पर उतरे
Betul Politics News: Brahma had to face resentment in the last elections, now he himself came out in protest

प्रताप सिंह सपा से मैदान में कूदे थे, फिर भी कांग्रेस की लगी लॉटरी, भाजपा की कांग्रेसी बगावत पर नजर
Betul Politics News (बैतूल)। जिले की पांचों विधानसभाओं में से एक घोड़ाडोंगरी विधानसभा ने लोगों का ध्यान अचानक अपनी ओर खींच लिया है। दरअसल मौजूदा विधायक ब्रम्हा भलावी की टिकट कांग्रेस ने काटकर राहुल उइके को दे दी। इसके बाद गुस्साए ब्रम्हा ने लोकल कांग्रेस नेताओं को इसका जिम्मेदार बताते हुए मीडिया पर जमकर अपनी भड़ास निकाली और अपना विरोध दर्ज कराए जाने के लिए सीधे राजधानी की दौड़ लगा दी।
ब्रम्हा ने जैसे ही प्रदेश हाईकमान कमलनाथ से चर्चा कि अचानक उनके विरोध के सूर समर्पण में तब्दील हो गए। भोपाल से लौटते ही ब्रम्हा ने यह कह भी दिया है कि वे कांग्रेस के सच्चे सिपाही थे, और हमेशा रहेंगे। औपचारिक चर्चा में ब्रम्हा ने यह बात कबूल भी की है। चर्चा के दौरान यह भी सुनने में आया कि यह पहली बार नहीं है जो ब्रम्हा जैसे शांत, सौम्य और ईमानदार छवि के नेता को विरोध का सामना करना पड़ा है।
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यही स्थिति वर्ष 2018 के चुनावों में भी देखने को मिली थी। कांग्रेस ने जब ब्रम्हा को घोड़ाडोंगरी से टिकट दे दी थी,उसके ठीक बाद इसी क्षेत्र में रहने वाले कुछ दावेदारों ने उनकी खिलाफत शुरू कर दी थी। इस बीच टिकिट न मिलने पर कांग्रेस के कद्दावर एवं कांग्रेस सरकार में मंत्री रह चुके नेता प्रताप सिंह उइके ने अंदर ही अंदर पार्टी के इस फैसले के खिलाफ विरोध के सुर बुलंद करने शुरू किए थे।
जिसके बाद दिग्विजय सिंह समेत कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें शांत रहने की नसीहत भी दी थी, लेकिन उक्त कांग्रेस नेता का विरोध इतने प्रचंड पर पहुंच चुका था कि उन्होंने कांग्रेस का दामन छोडक़र सपा की ऊंगली पकड़ ली और विधानसभा चुनाव लड़ लिया था। हालांकि इस चुंनाव मे उन्हें बुरी तरह हार का सामना जरूर करना पड़ा लेकिन इस वाकये के बाद विद्रोही कांग्रेस नेता की नेतागिरी हमेशा हमेशा के लिए खत्म ही गयी।
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ब्रम्हा का अब साफ कहना है कि भले ही उन्हें टिकिट नहीं दिया गया, लेकिन कांग्रेस से उनकी कोई नाराजगी नहीं है। लोकल कांग्रेसियों पर मीडिया के जरिये जो आरोप सामने आए हैं। उन आरोपों से भी उनका कोई सरोकार नहीं हैं। कमलनाथ के कहने और समझाने के बाद वे अपने क्षेत्र में कांग्रेस प्रत्याशी की जीत के लिए काम करेंगे।
आदिवासियों में दूसरी पार्टियों की पैठ कम (Betul Politics News)
राजनैतिक जानकार बताते है कि आदिवासी वर्ग के लिए आरक्षित घोड़ाडोंगरी विधानसभा ने कभी भी चौंकाने वाले परिणाम नहीं दिए। अब तक हुए चुनाव में भाजपा और कांग्रेस पर भी मतदाता भरोसा करते आए। जिले की सबसे बड़ी विधानसभा घोड़ाडोंगरी में अब तक भाजपा 5 और कांग्रेस 6 मर्तबा चुनाव जीती है।
लिहाजा यहां चुनाव परिणाम आने तक कोई दावे के साथ नहीं कह सकता कि किसकी जीत होगी। यही वजह है कि अंतिम परिणाम आने तक कांग्रेस-भाजपा घोड़ाडोंगरी में जुलूस भी नहीं निकाल पाती है। इतना जरूर है कि निर्णायक बढ़त के बाद प्रत्याशियों का जश्र जरूर होता है। एक और फैक्ट फाईल सामने आई है कि अब तक हुए चुनाव में दूसरी पार्टी पर लोग भरोसा नहीं जता पाए।
बीते चुनाव में कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व मंत्री प्रताप सिंह उईके की स्थिति देखी जा चुकी है। वे समाजवादी पार्टी से चुनाव लड़े थे, बमुश्किल 5 हजार के लगभग वोट हासिल कर पाए। इसी वजह दूसरी पार्टियों की स्थिति का घोड़ाडोंगरी में आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है।
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इस बार ताल ठोंक रही दूसरी पार्टियां, सबकी नजर टिकी (Betul Politics News)
2018 के चुनाव की अपेक्षा इस मर्तबा घोड़ाडोंगरी में राजनैतिक पार्टियां दावा ठोंक रही है। अब तक जो खबर सामने आई है, उसके अनुसार गोंडवाना गणतंत्र पार्टी और जयस घोड़ाडोंगरी से उम्मीदवार मैदान में उतार सकती है। इसके अलावा आदिवासी समाज के एक जिला अध्यक्ष भी निर्दलीय चुनाव लडऩे का ऐलान कर चुके है।
उनकी ओर से जारी विज्ञप्ति में यह बात कही है। हालांकि स्थिति स्पष्ट नामांकन वापस के बाद ही होगी। यदि भाजपा और कांग्रेस के अलावा मैदान में दो से तीन पार्टियां घोड़ाडोंगरी में मैदान में उतरती है तो मुकाबला रोचक होने के साथ ऊंट किस करवट बैठेंगा, कोई भी दावे के साथ नहीं कह सकता।
भले ही वर्तमान विधायक ब्रम्हा भलावी ने कहा है कि वे कांग्रेस के पक्ष में प्रचार करेंगे, लेकिन यह बात किसी को इसलिए हजम नहंी हो रही कि ईमानदार विधायक होने के बावजूद उनकी टिकट पर संगठन ने कैंची चला दी।
यही वजह है कि आने वाले समय में स्थिति स्पष्ट हो पाएगी कि कौन किसके समर्थन में मैदान में उतरा है। वैसे दूसरी पार्टियों के मैदान में उतरने से भाजपा-कांग्रेस प्रत्याशियों की जीत का आंकलन भी गड़बड़ाने से इंकार नहीं किया जा सकता।
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