Congress News : टिकट वितरण में कांग्रेस की महिला आरक्षण की खुली पोल!
Congress News: Congress' women reservation exposed in ticket distribution!

बैतूल समेत पड़ोसी जिलों से एक भी महिला उम्मीदवार मैदान में नहीं, उठने लगे कई सवाल
Congress News : (बैतूल)। पहले टिकट वितरण में देरी करने के बाद अब कांग्रेस नर्मदापुरम संभाग में महिला आरक्षण को ठेंगा दिखाने पर घिरते नजर आ रही है। दरअसल नर्मदापुरम संभाग की कुल 11 विधानसभा सीटों में से घोषित 6 उम्मीदवारों में से अब तक एक भी महिला उम्मीदवार को मौका नहीं दिया गया है। मसलन पहली सूची में पूरे प्रदेश में यही हालात दिखाई दे रहे हैं। गौर करने वाली बात यह है कि केंद्र सरकार ने जब संसद में महिला आरक्षण बिल लाया था तो कांग्रेस ने भी पूरी ताकत के साथ इसका समर्थन किया। बैतूल जिले की बात करें तो घोषित चार सीटों पर भी कोई महिला उम्मीदवार को मैदान में नहीं उतारा है। यदि निशा बांगरे की उम्मीद पर कांग्रेस कायम है तो उनका इस्तीफे का पेंच लंबा खींच सकता है। ऐसे में दूसरी सशक्त महिला उम्मीदवार उतारने में कई तरह की परेशानी आ सकती है।
महिला आरक्षण को लेकर सत्तारूढ़ भाजपा और विपक्षी पार्टियों में पहली मर्तबा जबरदस्त तालमेल देखा गया है। लगभग शत प्रतिशत सांसदों ने महिला आरक्षण को अपना समर्थन दिया है। कहा तो यह भी जा रहा है कि सबसे अधिक ध्वनि मद से पारित होने वाला महिला आरक्षण का बिल था। अब सवाल यह उठता है कि राजनैतिक पार्टियां आधी आबादी को किस तरह विधानसभा चुनाव में टिकट देगी।
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मप्र में आसन्न विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा ने जिस तरह से पत्ते खोले हैं, वह दूसरी पार्टियों के लिए एक संदेश है, क्योंकि अधिकांश जिलों में भाजपा ने रणनीति के तहत कम से कम एक महिला उम्मीदवार को टिकट से नवाजा है। यह स्थिति हर जगह देखने को मिली। यदि बैतूल जिले की बात करें तो यहां से घोड़ाडोंगरी विधानसभा सीट पर गंगा बाई उइके को टिकट दिया है। पड़ोसी जिले नर्मदापुरम की पिपरिया सीट से भी महिला उम्मीदवारों की टिकट तय मानी जा रही है। एक अन्य पड़ोसी जिले के परासिया से ज्योति डेहरिया और अमरवाड़ा से मोनिका बट्टी को टिकट दी गई है। अलबत्ता बैतूल जिले से घोषित चार उम्मीदवानों में से एक भी महिला नहीं है। ऐसे में कांग्रेस के महिला आरक्षण के समर्थन की टिकट वितरण में पोल खुलती नजर आ रही है।
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हर सीट पर पुरूष उम्मीदवार का दबदबा (Congress News)
बैतूल जिले की चार सीटों पर कांग्रेस ने पुरूष उम्मीदवार घोषित किए हैं। सबसे चौकाने वाली बात यह है कि चारों विधानसभा सीट बैतूल, घोड़ाडोंगरी, भैंसदेही और मुलताई में महिला दावेदारों को उम्मीदवारी जताने का मौका ही नहीं मिला। इन सीटों पर हालात ऐसे हैं कि अधिकांश पर पुरूष उम्मीदवार ही सशक्त होकर उभरे, नतीजतन जिले के चार उम्मीदवारों में एक भी महिला का नाम शामिल नहीं हो पाया। इसी वजह पहले दौर में घोषित चार नामों से कांग्रेस के महिला आरक्षण को लेकर चर्चाएं चल रही है। कहा तो यह भी जा रहा है कि कांग्रेस में कोई भी जीतने लायक महिला उम्मीदवार नहीं है, इसलिए उन्हें मौका ही नहीं दिया गया।
आमला में टिकी सबकी नजर (Congress News)
टिकट के पहले चरण में महिलाओं को टिकट न देकर घिरी कांग्रेस को अब उम्मीद है कि आमला विधानसभा सीट से संभावित दावेदार निशा बांगरे को टिकट से नवाजा जा सकता है। हालांकि उनके इस्तीफे का मामला अभी हाईकोर्ट में विचाराधीन है। कांग्रेस इस मामले में मुखर होकर सुप्रीम कोर्ट तक जाने की बात कह रही है, लेकिन नामांकन भरने की अंतिम तिथि तक राहत नहीं मिलती है तो पार्टी को यहां से मजबूरी में मनोज मालवे या हितेश निरापुरे को टिकट देनी पड़ सकती है, क्योंकि तीनों ही नाम कांग्रेस के स्क्रिनिंग कमेटी में पहुंचे हैं। ऐसे में जिले में कांग्रेस का महिला आरक्षण को लेकर किरकिरी उठाना पड़ सकता है। सूत्र बताते हैं कि भाजपा महिलाओं के आरक्षण के अलावा कई योजनाओं को लागू कर चुनाव मैदान में कांग्रेस को आड़े हाथ ले सकती है।
जिले में 6 लाख से अधिक महिला मतदाता
जिले की चार विधान सभा सीट पर किसी भी महिला उम्मीदवार को मौका नहीं दिया है। आंकड़े बता रहे हैं कि जिले की पांच विधानसभा सीटों में 604187 मतदाता है। यानी आधी आबादी की संख्या पुरूष मतदाताओं से थोड़ी ही कम है। ऐसी स्थिति में किसी महिला को उम्मीदवार न बनाकर कांग्रेस ने भाजपा को मुखर होने का मौका दे दिया है। जिले की पांच विधानसभा सीट में से सर्वाधिक महिला मतदाता घोड़ाडोंगरी विधानसभा में हैं। यहां पर 128927 महिला मतदाता है। सबसे कम महिला मतदाता आमला विधानसभा में है, यहां इनकी संख्या 10686 है। इस बार चुनाव में महिला मतदाता निर्णायक भूमिका अदा कर सकती है।




