बैतूल प्रशासनिक कोना: आखिर साहब की ईमानदारी पर क्यों उठने लगे सवाल?? पुलिस विभाग की कौनसी मैडम है, जिनका बैतूल प्रेम अभी भी नहीं छूट रहा??? ईमानदार अधिकारी की पारखी नजर से बचने क्यों हो रही कवायद???? पढ़िए पूरी खबर हमारे चर्चित कॉलम प्रशासनिक कोना में..….
Betul Administrative Corner: Why are questions being raised on the honesty of the sir?? Which madam of the police department is there whose love for Betul is still not going away??? Why is this effort being made to avoid the prying eyes of an honest officer???? Read the full news in our popular column Administrative Corner…..

Betul Administrative Corner : साहब बैतूल में पदभार ग्रहण करने के बाद अपनी ईमानदार छवि के लिए जाने जाते थे। युवा अधिकारी होने के कारण अधीनस्थ अमले में भी उनका खौफ देखने लायक था। अपने लगभग पौने तीन वर्ष के कार्यकाल में उन्होंने कईयों को नपता किया तो कई ऐसे थे जो साहब की नाराजगी का कोपभाजन बन गए। ऐसा अचानक क्या हुआ कि साहब बदले-बदले से नजर आने लगे। सरकारी कार्यालयों में भी चर्चा चल रही है कि साहब कुछ माह से बदले-बदले दिखाई दे रहे हैं। दबी जुबान से भ्रष्टाचार के आरोप लग चुके कई अधिकारियों को संरक्षण देने के भी आरोप लग रहे हैं। कुछ चर्चित मामलों में साहब ने जांच रिपोर्ट तक कर्मचारियों के विरूद्ध आने के बावजूद कार्रवाई नहीं की। इससे साहब की कार्यप्रणाली कटघरे में आ खड़ी हुई। कहा तो यह भी जा रहा है कि चुनावी वर्ष में मोटा फंड ऊपर भेजने के कारण साहब ने अपनी ईमानदारी से ही सौदा कर डाला। साहब के बारे में कहा जाता है कि वे भोपाल में पदस्थ एक प्रमुख अधिकारी से नाता रखते हैंं।
मैडम का बैतूल प्रेम अभी भी कायम!
पुलिस विभाग में एक मैडम का जिले से एक माह पहले तबादला हो चुका है,लेकिन अभी तक उन्होंने दूसरे जिले में आमद नहीं दी है। तीन वर्ष से अधिक जिले में पदस्थ रह चुकी मैडम के बारे में कहा जाता है कि यह बड़े थाने में पदस्थ रह चुकी है। वर्तमान में भी उन्हें मलाईदार थाने की कमान मिली हुई है। इसी को भुनाने के लिए स्टाफ कम होने के कारण अधिकारियों ने भी उन्हें रिलीव नहीं किया। इसी का फायदा उठाकर मैडम ने बहती गंगा में हाथ धोना जारी रखा हुआ है। कहा जा रहा है कि पड़ोसी जिले में तबादला होने के बावजूद रिलीव नहीं होने के कारण स्टाफ के ही कई लोग दबी जुबान से चर्चा कर रहे हैं।
पारखी नजर से बचने ढूंढ रहे उपाए
निकाय के एक अधिकारी ने जीरो टारलेंस का नुक्खा क्या अपनाया, अधीनस्थों की नींद हराम हो गई। दरअसल यहां 16 प्रतिशत कमीशन की प्रथा लंबे समय से चली आ रही है। ठेकेदार से लेकर अन्य लोग भी इस प्रथा से खासे परेशान है, किंतु नए साहब के आने के बाद 16 प्रतिशत भेंट वाली प्रथा पर नए साहब ने लगाम कसना शुरू कर दिया है। साहब की इस ईमानदारी से अधीनस्थ स्टाफ के लोग ग्रुप बनाकर चर्चा कर रहे हैं।
वैसे साहब की दो टूक के बाद निकाय में फटाफट फाइलें आगे बढ़ रही है, लेकिन कमीशन के चक्कर में उलझे अधीनस्थ स्टाफ के लोगों की ऊपरी कमाई बंद होने से पैरो तले जमीन खिसक गई है। आखिर जमा पूंजी का खर्च कैसे उठाएंगे, इस पर वे लोग भी कुछ ठेकेदारों से राय ले रहे हैं।




