Congress News : बैतूल जिले में कांग्रेस का आदिवासी चेहरा बन सकते हैं: ज्ञान सिंह परते
Congress News: Tribals can become the face of Congress in Betul district: Gyan Singh Parte

Congress News : (बैतूल)। मध्य प्रदेश के जिला बैतूल में घोड़ाडोंगरी विधानसभा में ज्यादातर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का ही दबदबा रहा है तथा आने वाले समय में कांग्रेस अपनी इस दबदबे को कायम रखना चाहती है। जैसे-जैसे विधायकी का चुनाव नजदीक आ रहा है पार्टी कार्यकर्ताओं की सक्रियता भी बढ़ती जा रही है। आदिवासी समाज के लिए आरक्षित इस सीट पर बहुत से लोगों ने अपना दावा पेश किया है, लेकिन ज्ञान सिंह परते की पारिवारिक पृष्ठभूमि जिसमें राजनीति उन्हें विरासत में मिली है। उनका संघर्षशील व्यक्तित्व उन्हें अन्य दावेदारों से अलग करता है। पिछले 20 वर्षों से कांग्रेस में सक्रिय कार्यकर्ता के रूप में जनता की सेवा कर रहे ज्ञान सिंह परते कांग्रेस का युवा आदिवासी चेहरा बनकर सामने आए है।
जीवन परिचय: 9 जून 1983 को एक आदिवासी परिवार में झाड़कुंड ग्राम, घोड़ाडोंगरी तहसील में जन्मे ज्ञान सिंह शुरू से ही एक संघर्षशील व्यक्तित्व के स्वामी रहे हैं। अल्प साधनों के होते भी उन्होंने अपनी शिक्षा को स्नातक तक पहुंचाया तथा उसके पश्चात पीजीडीसीए कंप्यूटर कोर्स किया ताकि वह अपने समाज की सेवा कर उसे आगे तक ले जा सके ।
पारिवारिक पृष्ठभूमि: ज्ञान सिंह परते की परिवार की बात की जाए तो उनके दादा, पिता , माता व भाभी सभी राजनीति से जुड़े रहे हैं और समय-समय पर झाड़कुंड के सरपंच पद तथा अन्य पदों पर आसीन रहे , पिछले 40 वर्षों में झारकुंड में उनके परिवार का ही दबदबा रहा है, जिसका विवरण इस प्रकार है।
1 – स्व. भन्नु सिंह परते जो की ज्ञान सिंह परते जी के दादा थे 1980 से 1995 तक ग्राम पंचायत झारकुड के सरपंच रहे
2 – भादू सिंह परते जो ज्ञान सिंह परते के पिता थे 1995 से 2020 तक लगातार 25 वर्षों तक ग्राम पंचायत झारकुंड के सरपंच रहे । (स्वच्छ भारत मिशन के अन्तर्गत आपके कार्यकाल मे ग्राम पंचायत झारकुडं को अव्वल दर्जा प्राप्त हुआ था और तत्कालीन कलेक्टर द्वारा भादू सिंह को सम्मानित किया गया था)
3 – ज्ञान सिंह परते की माताजी रमती बाई परते झारकुंड जल समिति की 10 वर्षों ( 2005- 2015) तक अध्यक्ष रही व उनके अतिरिक्त उनकी भाभी भी यहां से सरपंच रह चुकी हैं ।
पुलिस की नौकरी छोड़ बने कांग्रेसी कार्यकर्ता
सन 2006 से 2012 के बीच मध्य प्रदेश पुलिस में आरक्षक के पद पर तैनात रहे ज्ञान सिंह परते ने छ: वर्षों तक पुलिस की सेवा की तथा उसके पश्चात कांग्रेस की नीतियों से प्रभावित होकर पुलिस की नौकरी से त्यागपत्र दे दिया तथा साधारण कांग्रेसी कार्यकर्ता के रूप में वर्षों से पार्टी की सेवा कर रहे हैं ।




