Betul Politics : मुलताई में हार-जीत का दारोमदार कुंबी- पवार समाज पर
Betul Politics: The responsibility of victory and defeat in Multai is on Kumbi-Pawar community.

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह और पूर्व सीएम कमलनाथ की प्रतिष्ठा लगी है दांव पर
Betul Politics : (बैतूल)। बैतूल के बाद यदि सबसे ज्यादा कोई विधानसभा चर्चा में है तो वह है मुलताईं विधानसभा। कांग्रेस पार्टी से कमलनाथ के कट्टर समर्थक सुखदेव पांसे और भाजपा से सुखदेव को 2013 का चुनाव हराने वाले चन्द्रशेखर देशमुख यहां से चुनावी मैदान में है।
हालांकि अब मतदान सम्पन्न हो चुका है और सबकी नजरें 3 दिसम्बर को होने वाली मतगणना पर टिकी हुई है। कयास लगाए जा रहे हैं कि आखिर मुलताई का ताज किसके सिर सजेगा। इसका निर्णय इस विधानसभा में बहुतायत कुंबी समाज करेगा या फिर पवार समाज। जो भी है इसका पता मतगणना होने के बाद ही पता चल पाएगा।
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क्या गुल खिलाएंगे पट्टन और मुलताईं ब्लॉक (Betul Politics)
मुलताईं विधानसभा में आने वाले दो ब्लॉक मुलताई और पट्टन राजनैतिक दलों के गढ़ माने जाते हंै। पिछले चुनावों के परिदृश्य देखे जाएं तो कांग्रेस के लिए पट्टन और भाजपा के लिए मुलताईं ब्लाक फायदेमंद साबित हुआ है। इस बार भाजपा और कांग्रेस दोनों ने ही कुंबी समाज के प्रत्याशी मैदान में उतारे हैं, जिनकी विधानसभा में संख्या लगभग 70 हजार है। वहीं दूसरे नंबर पर पवार समाज के लगभग 42 हजार मतदाता यहां मौजूद हैं। दोनों समाज के कुल 1 लाख 20 हजार मतदाताओं की संख्या यहां निर्णायक भूमिका निभाती है।
राजनीति के जानकारों के मुताबिक किराड़ समाज के लगभग 12 हजार साहू समाज के लगभग 18 हजार मतदाताओं सहित रघुवंशी समाज और आदिवासी सहित अल्पसंख्यक समाज के मत दोनों ही पार्टियों में बंटते नजर आते हैं। वर्ष 2013 के चुनाव मे भी यही स्थिति देखने को मिली थी जब सुखदेव और चंद्रशेखर दोनों आमने सामने थे। इस चुनाव में चन्द्रशेखर देशमुख ने सुखदेव पांसे को लगभग 32 हजार मतों से पराजित किया था, लेकिन वर्ष 2018 के चुनाव में पवार समाज के राजा पवार भाजपा से तो कांग्रेस से सुखदेव पांसे आमने-सामने आ गए। इस चुनाव में सुखदेव पांसे ने राजा पवार को लगभग 12 हजार मतों से शिकस्त दी थी, लेकिन इस बार फिर से कुंबी समाज के वहीं प्रत्याशी फिर आमन-सामने आ गए हैं।
स्वाभाविक सी बात है कि 70 हजार की संख्या वाले कुंबी समाज में मतों का विभाजन तय है। किसके सिर ताज सजेगा। यह तो कहा नहीं जा सकता है पर यह जरूर है कि अब पूरा दारोमदार सिर्फ पवार , किराड़, साहू, रघुवंशी , आदिवासी जैसे समाजों के मतदान पर आधारित हो गया है। गौरतलब है कि विधानसभा में कुल मतदाताओं की संख्या 2 लाख 31 हजार 682 है, जिनमें से 1 लाख 85 हजार 674 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का उपयोग किया है। जिनमें पुरषों की संख्या 95 हजार 478 है तो वहीं 90 हजार 194 महिलाओं ने मतदान में हिस्सा लिया है।
नारी सम्मान और लाड़ली बहना के बीच झूल रहा परिणाम
जिले में मुलताई विधानसभा लाइम लाइट विधानसभा मानी जाती है। वो इसलिए कि कांग्रेस प्रत्याशी सुखदेव पांसे इस विधानसभा का सर्वाधिक बार नेतृत्व कर चुके हैं। इसी विधानसभा के जरिए वर्ष 2018 के चुनाव के बाद कांग्रेस सरकार ने इन्हें मंत्री पद से भी नवाजा था। वर्ष 2013 में भाजपा के चन्द्रशेखर देशमुख यहां से विधायक रह चुके हैं।
वर्तमान में दोनों ही पार्टियों के प्रत्याशी महिला वोटरों को लेकर इसलिए गम्भीर हैं, क्योंकि एक तरफ कांग्रेस नारी सम्मान योजना के तहत जहां महिलाओं को 1500 रुपए महीना दिए जाने की बात कर रही है तो वहीं भाजपा लाड़ली लक्ष्मी बहना योजना के तहत 1250 रुपये प्रतिमाह महिलाओं को प्रदान कर रही है। यह वही योजना है जिसे कांग्रेस ने सरकार बनने के बाद लांच किए जाने की घोषणा की थी, लेकिन भाजपा ने समय रहते यह मुद्दा लपक लिया और एन चुनाव के पूर्व महिलाओं से जुड़ी यह योजना वर्तमान और भविष्य के बीच परिवर्तित हो गई। अब चुनाव में इसका कितना असर देखने को मिलेगा,यह परिणाम ही बताएंगे, लेकिन दोनों ही प्रत्याशी अपनी अपनी जीत के प्रति आश्वस्त नजर आ रहे हैं।




