Gaon ki Beti Yojana: गांव की बेटी योजना मामला: कॉलेज के पूर्व प्राचार्य भी कटघरे में!
Gaon ki Beti Yojana: Gaon ki Beti Yojana case: Former college principal also in the dock!

कोषालय अधिकारी ने कलेक्टर को सौंपा जांच प्रतिवेदन, अब तक 1 करोड़ 62 लाख का घोटाला आया सामने
Gaon ki Beti Yojana: बैतूल। पीएम श्री जेएच कॉलेज में गांव की बेटी योजना में किए करोड़ों के फर्जीवाड़े की जांच शुक्रवार पूरी हो चुकी है। कोषालय अधिकारी अरुण कुमार वर्मा एवं टीम द्वारा सूक्ष्मता से की गई जांच में कुल 1 करोड़ 65 लाख 5 हजार रुपए का घोटाला सामने आया है। कोषालय अधिकारी ने जांच प्रतिवेदन कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी को सौंप दिया है। इसमें पूर्व प्राचार्य डॉ राकेश तिवारी एवं डॉ विजेता चौबे की मुश्किलें भी बढ़ सकती हैं, क्योंकि कलेक्टर ने अब प्राचार्य डॉ. मीनाक्षी चौबे को विभागीय जांच के निर्देश दे दिए हैं। बताया जा रहा है कि जांच में इन दोनों प्राचार्यों की लापरवाही सामने आती है तो दोनों के खिलाफ एफआईआर भी कराई जा सकती है।
सूत्र बताते हैंं कि इस पूरे घोटाले को वर्ष 2019 से 2024 तक पूरे 5 सालों तक अंजाम दिया जाता रहा, लेकिन इस अवधि में कालेज के संचालन संभालने वाले प्राचार्य डॉ राकेश तिवारी और डॉ विजेता चौबे को इस घोटाले की भनक तक नहीं लग पाई। सितंबर 2024 में जब एजीएमपी का आडिट हुआ तो पूरा फर्जीवाड़ा शक के दायरे में आ गया। महालेखाकार ने इसकी जानकारी कमिश्नर को दी और कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी ने कोषालय अधिकारी को जांच की जिम्मेदारी सौंप दी।
करीब 6 दिन तक चली जांच में 1 करोड़ 65 लाख 5 हजार रुपए का फर्जीवाड़ा कोषालय अधिकारी की पकड़ में आ गया। दोनों प्राचार्यों के भी शक के दायरे में आने की पुष्टि कोषालय अधिकारी अरुण कुमार वर्मा ने भी की है। उन्होंने बताया कि शक के दायरे में पूर्व प्राचार्य भी आ रहे हैं। इसके लिए कलेक्टर ने विभागीय जांच के निर्देश कालेज प्रबन्धन को दिए हैं। जांच के बाद यदि प्राचार्यों की लापरवाही सामने आती है तो उन पर भी एफआईआर जैसी कार्रवाई हो सकती है।
घोटाले के तीनों आरोपी पुलिस पहुंच से दूर
करोड़ों के घोटाले का सांझवीर टाईम्स द्वारा खुलासा करने के बाद ही घोटाले की जांच शुरू कर दी थी। प्रारंभिक जांच के दौरान आरोपी रिंकू पाटिल, दीपेश डेहरिया और प्रकाश बंजारे के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो गई। एफआईआर के तत्काल बाद तीनों आरोपी फरार हो चुके थे जो अभी भी पुलिस पकड़ से दूर हैं। घोटाले के मुख्य सूत्रधार यही तीन कर्मचारी हैं, जिन्होंने एक्सल शीट में छेड़छाड़ कर अपने परिजनों के खाते नम्बर डाल कर करोड़ों रुपयों का फर्जीवाड़ा अंजाम दिया था। बताया जा रहा है कि करोड़ों का घोटाला करने वाले इन तीनों ही आरोपियों की पुलिस सरगर्मी से तलाश कर रही है। जानकारी मिली है कि इन आरोपियों के हिरासत में आने के बाद इस घोटाले में और कौन-कौन शामिल हैं, उनके नामों का भी खुलासा हो जाएगा।
इनका कहना…..
जांच पूर्ण हो चुकी है। कुल 1 करोड़ 65 लाख का फर्जीवाड़ा सामने आया है। जांच प्रतिवेदन कलेक्टर को सौंप दिया गया है। इस मामले में पूर्व प्राचार्य भी शक के दायरे में हैं । इसकी विभागीय जांच के निर्देश कलेक्टर ने दिए हैं।
अरूण कुमार वर्मा, कोषालय अधिकारी बैतूल




