Betul Samachar: काम के बोझ तले भी पूरी ताकत से मोर्चे पर डटा अफसर

परिवीक्षाधीन अधिकारी के कंधों पर जिले की शिक्षा व्यवस्था, एक नहीं बल्कि पांच-पांच प्रभार
Betul Samachar: बैतूल। जिले की शिक्षा व्यवस्था इन दिनों एक ऐसे अधिकारी के कंधों पर टिकी है, जो स्वयं परिवीक्षाधीन अवधि में होने के बावजूद पांच अहम पदों का दायित्व संभाल रहे हैं। जिला शिक्षा अधिकारी अनिल कुशवाह के तबादले के बाद विभाग की कमान सहायक संचालक भूपेंद्र सिंह वरकड़े को सौंपी गई है। आम तौर पर एक अधिकारी एक ही पद का दायित्व निभाता है, लेकिन यहां हालात कुछ अलग ही तस्वीर पेश कर रहे हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार भूपेंद्र सिंह वरकड़े का मूल पद सहायक संचालक का है और वे वर्तमान में बैतूल जिले में परिवीक्षाधीन अवधि में पदस्थ हैं। इसके बावजूद उन्हें जिला शिक्षा अधिकारी के साथ-साथ डीपीसी, एडीपीसी और एपीसी जैसे महत्वपूर्ण पदों का भी अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। यानी एक अधिकारी, पांच पद और जिले की पूरी शिक्षा व्यवस्था—यह अपने आप में एक असाधारण स्थिति है।
शिक्षा विभाग के जानकारों का मानना है कि इन सभी पदों की जिम्मेदारियां अपने-आप में अत्यंत महत्वपूर्ण और समयसाध्य हैं। विद्यालयों का संचालन, शिक्षकों की नियुक्ति-स्थानांतरण से जुड़ी प्रक्रियाएं, शैक्षणिक योजनाओं का क्रियान्वयन, प्रशासनिक पत्राचार और शासन की योजनाओं की निगरानी इन सभी कार्यों का सफल संचालन किसी भी अधिकारी के लिए बड़ी चुनौती होता है।
ऐसे में एक ही अधिकारी द्वारा पांच-पांच प्रभारों का निर्वहन करना कार्यभार की गंभीरता को दर्शाता है। हालांकि इस भारी दबाव के बावजूद श्री वरकड़े द्वारा प्रशासनिक कर्तव्यों का सुचारू और संतुलित निर्वहन किया जा रहा है। विभागीय सूत्रों के अनुसार शिक्षा से जुड़े कार्यों में अनावश्यक विलंब की स्थिति नहीं है और नियमित कार्यप्रणाली बनी हुई है। यह बात उनके कार्यकुशलता और दायित्वबोध को दर्शाती है। इस संबंध में जब भूपेंद्र सिंह वरकड़े से चर्चा की गई तो उन्होंने बताया कि शासन स्तर से अन्य प्रभार वाले पदों पर जल्द ही नियमित पदस्थापना की जानी है। प्रशासनिक दृष्टि से वैकल्पिक व्यवस्था आवश्यक होने के कारण फिलहाल उन्हें यह अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी गई है।
उन्होंने कहा कि जब तक नई व्यवस्था नहीं बनती, तब तक विभागीय कार्यों को प्रभावित होने से बचाना प्राथमिकता है। कहते हैं कि सोना जितना अधिक तपता है, उतना ही खरा होता है। परिवीक्षाधीन अवधि में ही पांच अहम प्रभारों का अनुभव भविष्य में श्री वरकड़े को एक सक्षम और परिपक्व प्रशासनिक अधिकारी के रूप में स्थापित करेगा। फिलहाल जिले की शिक्षा व्यवस्था उनके अनुभव, मेहनत और प्रतिबद्धता के सहारे आगे बढ़ रही है।




