Betul News: सवा दो करोड़ की पाइप लाइन चोरों के हवाले
Betul News: Pipeline worth Rs 2.25 crore handed over to thieves

नपा की लापरवाही की हदें पार, लाखापुर से पानी आया नहीं, और पाइप लाइन का कर दिया सत्यानाश
Betul News: बैतूल। अंधेर नगरी चौपट राजा की कहावत बैतूल नगरपालिका में चरितार्थ हो रही है। यहां वर्तमान में नए सीएमओ ने आमद दी है। शुरुआत में उन्होंने विधायक से मिलकर शहर विकास में अपनी प्राथमिकता बताई थी, लेकिन लगभग एक पखवाड़े से अधिक की उनकी वर्किंग के बाद निष्कर्ष पर पहुंचा जा सकता है कि अधीनस्थों पर नियंत्रण बिलकुल नहीं है। यही वजह है कि उनके निर्देशों पर अधीनस्थ इतने हल्के में ले रहे हैं कि आज तक नगरपालिका में ऐसे हालात दिखाई नहीं दिए। ताजा मामला लाखापुर से माचना एनीकट तक बिछाई गई पाइप लाइन से जुड़ा है।
पुराना मामला होने का हवाला देकर ऊपर से लेकर नीचे तक के अधिकारी एक दूसरे पर टाल रहे हैं। सांझवीर को मिली प्रारंभिक जानकारी के अनुसार पाइप लाइन माचना एनीकट तक तो नहीं पहुंची, लेकिन कई हिस्से में चोर इसे निकालकर ले गए तो कुछ किसानों ने भी अपने खेत में पाइप लाइन के लिए उपयोग कर लिया। इससे बड़ी चूक और लापरवाही क्या हो सकती है कि सवा दो करोड़ पानी में जाने के बाद भी सात वर्षों में नगरपालिका के पूर्व और वर्तमान अधिकारियों के कानों तक जूं तक नहीं रेंगी।
ताप्ती बैराज से पानी नहीं मिलने के पहले शहर के लिए एनीकट ही ऐसा माध्यम था, जिससे पूरे शहर के 33 वार्डों में आधा दर्जन से अधिक टंकियां भरकर पानी की सप्लाई की जाती थी। करीब सात वर्ष पहले तत्कालीन सीएमओ पवन कुमार राय के कार्यकाल के दौरान नगरपालिका ने लाखापुर से बैतूल तक 14 किमी तक पाइप लाइन बिछाकर पानी लाने की योजना बनाई थी। करीब सवा दो करोड़ रुपए इस कार्ययोजना पर खर्च किए जाने थे, लेकिन शुरुआती दौर में ही यह योजना विवादों में आ गई।
दरअसल कुछ जिम्मेदारों की हटधर्मिता के कारण लाखापुर से बैतूल तक पाइप लाइन बिछाने मेें कई पेंच भी आए। नपा ने गुगल के आधार पर पाइप लाइन डालने के लिए प्रयास किए तो जमीन पर उस समय 70 फीट का पहाड़ निकल आया। उसी समय इस ड्राइंग डिजाइन पर सवाल उठ रहे थे। उस समय दावा किया जा रहा था कि पाइप लाइन दो माह में बिछाकर एनीकट तक पानी आ जाएगा, लेकिन सात वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद भी न तो पाइप लाइन बिछाई गई और न यहां तक पानी आया।
ग्रेविटी के सहारे पानी लाने का चुना था विकल्प
नगरपालिका ने उस समय ग्रेविटी के सहारे एनीकट तक पानी लाने का विकल्प चुना था। एस्टीमेट बनाते समय बरती गई लापरवाही का ही नतीजा था कि यह योजना विवादों में रही। यदि एनीकट तक पाइप लाइन बिछाई जाती तो लाखों रुपए का बिजली बिल का खर्च नपा को वहन करना पड़ता। इस खर्च को बचाने के लिए ही नगरपालिका ने ढलान का सहारा लेकर ग्रेविटी से पानी लाने का विकल्प चुना था। ग्रेविटी से पानी लाने का विकल्प मूर्त रूप लेता, इसके पहले ही योजना टायटाय फीस हो गई। तब से लेकर आज तक जितने भी अधिकारी आए उन्होंने जनता के टैक्स सवा दो करोड़ की योजना की फाइल तक देखने की जहमत नहीं उठाई।
करोड़ों के पाइप कर दिए चोरों के हवाले!
सूत्र बताते हैं कि करीब 7-8 वर्ष पहले लाखापुर से पानी लाने की योजना के लिए 14 में से करीब 10 किमी तक पाइप लाइन गुजरात की इंजीनियरिंग प्रोफेशनल कंपनी ने डाल दिए। केवल उमरी से बैतूल तक करीब 4-5 किमी पाइप लाइन का काम बचा था, तब कंपनी को आगे की पाइप लाइन नगरपालिका ने क्लियर नहीं की तो काम छोड़कर चली गई। इसके बाद इन सात वर्षों में नपा के किसी भी सीएमओ, कार्यपालन यंत्री, एई और सब इंजीनियरों ने सुध लेने का प्रयास नहीं किया। नतीजा यह हुआ कि पाइप लाइन योजना अधर में लटक रह गई और कई किमी में डाले गए पाइप चोरों ने उखाड़कर लेकर चले गए। कई किसानों ने भी इसका फायदा उठाकर पाइप को अपने खेत की ओर मोड़ लिया है। इस तरह जनता के टैक्स के सवा दो करोड़ पानी में चले गए।
इनका कहना….
यह मामला आपके माध्यम से लगातार मेरे संज्ञान में आया है। यह बहुत बड़ी चूक और लापरवाही है। यदि पाइप लाइन डालने की योजना बनी थी तो इसे पूरा करना था। मामले में मैं नपा के अधिकारियों के साथ बैठक कर चर्चा करूंगा। यदि संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है तो पूर्व और वर्तमान अधिकारियों पर कार्रवाई तय की जाएगी।
हेमंत खंडेलवाल, विधायक बैतूल
मुझे जानकारी मिली है कि कुछ अधिकारी मीडिया के फोन रिसीव नहीं कर रहे हैं, यह गंभीर लापरवाही है। नपा की इस पाइप लाइन को लेकर जानकारी न देने पर मैं अधिकारियों से चर्चा करूंगा। मामले की जांच भी करवाई जाएगी।
नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी, कलेक्टर बैतूल



