Betul Samachar: जनजातीय विभाग छात्रावासों में अधीक्षकों के डबल चार्ज का खेल!

कुछ अधीक्षक दंपत्तियों पर भी मेहरबानी, कुछ को दो-दो प्रभार कई पात्र कर्मचारी अब भी इंतजार में
Betul Samachar: बैतूल। जनजातीय कार्य विभाग में इन दिनों छात्रावासों के प्रभार को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। आरोप है कि विभाग के सहायक आयुक्त विवेक पांडेय द्वारा कुछ चुनिंदा अधीक्षक और अधीक्षिकाओं पर जरूरत से ज्यादा मेहरबानी दिखाई जा रही है। स्थिति यह है कि जिले में कई पात्र कर्मचारी वर्षों से छात्रावास प्रभार मिलने की प्रतीक्षा कर रहे हैं, लेकिन उन्हें मौका देने के बजाय कुछ लोगों को एक नहीं बल्कि दो-दो छात्रावासों का संचालन सौंप दिया गया है।
जानकारी के अनुसार जिले में संचालित आदिवासी छात्रावासों के संचालन पर शासन हर वर्ष करोड़ों रुपये खर्च करता है। ऐसे में प्रत्येक छात्रावास में नियमित और जिम्मेदार अधीक्षक की नियुक्ति जरूरी मानी जाती है, ताकि विद्यार्थियों को बेहतर भोजन, सुरक्षा और शिक्षा का वातावरण मिल सके। लेकिन विभागीय व्यवस्था अब सवालों के घेरे में है।
बताया जा रहा है कि कुछ अधीक्षक दंपत्तियों को विशेष रूप से लाभ पहुंचाया गया है। इनमें प्रीति-पवन, ललिता-कमलेश और आशा-मदन जैसे नाम चर्चा में हैं। आरोप है कि इन दंपत्तियों को विभागीय संरक्षण प्राप्त है, जिसके चलते इन्हें अतिरिक्त जिम्मेदारियां भी सौंप दी गई हैं।
4 अधीक्षकों के पास 2-2 छात्रावासों का प्रभार
सूत्रों के मुताबिक पवन फाटे, मदन यादव, कमलेश राक्से और सचिन राय जैसे अधीक्षकों के पास दो-दो छात्रावासों का प्रभार है। विभागीय कर्मचारियों का कहना है कि एक छात्रावास का संचालन ही पूरी जिम्मेदारी वाला कार्य होता है। ऐसे में दो-दो छात्रावासों की जिम्मेदारी एक ही व्यक्ति को सौंपे जाने से व्यवस्थाओं पर असर पडऩा स्वाभाविक है।
कर्मचारियों का यह भी आरोप है कि जिन लोगों को अतिरिक्त प्रभार दिया गया है, वे अधिकांश समय एक ही छात्रावास में उपस्थित रहते हैं, जबकि दूसरे छात्रावास की व्यवस्थाएं कर्मचारियों और चौकीदारों के भरोसे चलती हैं। इससे छात्र-छात्राओं की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
मापदंडों से छेड़छाड़, पात्र किए दरकिनार
विभाग के भीतर यह चर्चा भी तेज है कि आखिर किन मापदंडों के आधार पर अतिरिक्त प्रभार दिए गए हैं। कई पात्र कर्मचारी वरिष्ठता और योग्यता होने के बावजूद अब तक प्रभार से वंचित हैं। इससे कर्मचारियों में असंतोष बढ़ रहा है। जानकारों का कहना है कि यदि विभाग पारदर्शी तरीके से जिम्मेदारियां बांटे तो अधिक कर्मचारियों को अवसर मिल सकता है और छात्रावासों की व्यवस्था भी बेहतर हो सकती है। लेकिन वर्तमान व्यवस्था पक्षपात और मनमानी के आरोपों में घिरती नजर आ रही है।
विरोध के स्वर अभरे निष्पक्ष जांच की मांग
अब कर्मचारियों और सामाजिक संगठनों की मांग है कि जिला प्रशासन और जनजातीय कार्य विभाग इस मामले की निष्पक्ष जांच कराए तथा यह स्पष्ट करे कि आखिर किन परिस्थितियों में कुछ कर्मचारियों को दो-दो छात्रावासों का प्रभार दिया गया। साथ ही लंबे समय से प्रतीक्षा कर रहे पात्र कर्मचारियों को भी जिम्मेदारी देने की मांग उठने लगी है।इस मामले को लेकर कलेक्टर डॉ. सौरभ संजय सोनवणे के मोबाइल नम्बर 7701071112 पर और जनजातीय कार्य विभाग सहायक आयुक्त विवेक पांडेय के मोबाइल नम्बर 9303272071 पर सम्पर्क किया गया लेकिन दोनो ही अधिकारियों ने फोन रिसीव नहीं किया।
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