Real Estate Industry: रियल स्टेट कारोबार की मंदी ने निकाली हवा

Real Estate Industry: The recession of real estate business deflated

इस बार दिवाली- धनतेरस पर महज 70 प्लाटों की रजिस्ट्री, फ्लैट लेने में भी लोगों की नहीं दिखी रूचि

Real Estate Industry: बैतूल। सोना-चांदी के बाद यदि धनतेरस-दिवाली पर सबसे अधिक कारोबार रियल स्टेट से जुड़ा होता है। चूंकि सपनों का घर बनाने के लिए शुभ मुहूर्त में धनतेरस के दिन परंपरा अनुसार बड़े पैमाने पर रजिस्ट्रियां होते आई हैं, लेकिन इस बार मंदी ने ऐसे हालात निर्मित किए है कि रियल स्टेट का कारोबार औंधे मुंह गिर पड़ा। इससे बड़ी संख्या में रियल स्टेट कारोबारियों की उम्मीदों पर पानी फिर गया, बल्कि उन्हें तगड़ा नुकसान उठाना पड़ा है।

रजिस्टार कार्यालय से मिली जानकारी के मुताबिक दिवाली और धनतेरस पर महज 80 प्लाटों की रजिस्ट्री जिला मुख्यालय पर हो पाई है। यह आंकड़ा जिले में महज 250 के भीतर ही सिमट कर रह गया है। वैसे हर वर्ष जिले में दिवाली और धनतेरस पर रजिस्ट्रियों का आंकड़ा कभी 500 के नीचे नहीं आया है।

सपनों का घर बनाने के लिए महंगाई होने के बावजूद लोग प्लाट या फ्लैट खरीदने में पीछे नहीं हटते हैं। वैसे तो वर्ष भर इइसके लिए कोई मुहूर्त नहीं होता है। जब जिसे अच्छा प्लाट या फ्लैट दिखा, इसकी रजिस्ट्रियां हो जाती है, लेकिन हिंदू धर्म में शुभ मुहूर्त पर जमीन से जुड़े कारोबार से अच्छा प्रतिसाद मिलते आया है।

इस बार भी दिवाली के एक पखवाड़े पहले से रियल स्टेट कारोबारियों ने अपनी कॉलोनियों में ग्राहकों को लुभाने के लिए प्लाट और फ्लैट बेचने के लिए प्रयास शुरू किए थे। शुरू में तो धनतेरस पर शहर में अच्छे प्लाट बुक हो गए, लेकिन जैसे जैसे धनतेरस निकट आई जमीन के कारोबार की हवा निकल गई।

कई तरह की बातें सामने आई

रियल स्टेट के कारोबार में इस बार मंदी होने पर कई तरह की बातें सामने आई हैं। यह कारोबार भी सामान्यतौर पर बाजार में बूम आने पर ही अच्छा प्रतिसाद देता है, लेकिन इस बार सोयाबीन की फसलों पर बारिश का अटेक और फिर माह के अंत में दिवाली आने से दिवाला निकलने जैसे हालात बन गए। जानकार बताते हैं कि माह के अंत में दिवाली आने पर सरकारी कर्मचारियों के वेतन विलंब से आए।

इसके अलावा जमीन के दाम भी आसमान छूने लगे, यह मध्यमवर्गीय लोगों के बजट से बाहर हो गई। यही वजह है कि दिवाली और धनतेरस पर रियल स्टेट कारोबार में मंदी छाई रही। धनतेरस पर अकेले बैतूल शहर में महज आधा सैकड़ा रजिस्ट्रियां हो पाई, जबकि जिले में 150 का आंकड़ा पहुंचा था। दिवाली पर दोनों आंकड़े मिलाकर 250 रजिस्ट्रियां और फ्लैट बुक हो पाए।

स्कीम का भी नहीं दिखा असर

चौकाने वाली बात यह रही कि मंदी के बावजूद कालोनाइजरों ने महज 51 हजार से लेकर 1 लाख रुपए तक की डाउन पैमेंट पर कालोनियों में प्लाट और फ्लैट बेचने के लिए प्रयास किए, लेकिन यह भी लोगों को पसंद नहीं आया। दरअसल भविष्य में भुगतान को लेकर लोग परेशान दिखाई दिए। जमीन के दाम अधिक होने के कारण बुकिंग अधिक नहीं हो सकी।

जिले के कुछ स्थानों पर 21 हजार रुपए देकर प्लाटों के बुकिंग के प्रयास किए गए, लेकिन यहां पर भी रियल स्टेट कारोबार को सम्मानजनक स्थिति नहीं मिल पाई। इसकी अपेक्षा बीते वर्ष दोगुनी रजिस्ट्रियां हुई थी। इससे रियल स्टेट का कारोबार में जमकर बूम आया था। इस बार रियल स्टेट कारोबारियों को भी खरीदारी पर मायूस देखा गया।

Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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