Betul Ki Khabar : तीन दिन बाद बदल जाएगी क़ानूनी धारा, आईपीसी की जगह लेगी बीएनएस
Betul Ki Khabar: Legal section will change after three days, BNS will replace IPC

कई अपराधों में कड़ी सजा का प्रावधान, तो कुछ में यथावत रहेगी सजाएं
Betul Ki Khabar : बैतूल। भारतीय दंड संहिता 1860 (आईपीसी) के स्थान पर अब भारतीय न्याय संहिता 2023 (बीएनएस) को लागू किया जा रहा है। तीन दिन बाद यानी कि 1 जुलाई से भारतीय न्याय सहिंता अस्तित्व में आ जाएगी। कानूनों में किए इस बदलाव में कुछ अपराधों में कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है तो कुछ अपराधों में पूर्व की ही भांति सजाओं का प्रावधान किया गया है। आईपीसी की कई धाराओं में बदलाव भी किए हैं। गौरतलब है कि भादवि(आईपीसी) का निर्माण अंग्रेजों द्वारा किया गया था। निश्चित रूप से उस संहिता का मूल उद्देश्य दंड देना था किंतु वर्तमान भारतीय न्याय संहिता कार्य अनुरूप नाम को परिलच्छित करती है। वर्तमान में विधायिका द्वारा इसे न्याय संहिता के रूप में परिभाषित कर लागू किया जा रहा है।
1 जुलाई के बाद हुए अपराधों में लगेगी नई धाराएं
नए कानूनों के लागू होने को लेकर पुलिस एवं न्यायालय के अधिवक्ताओं में काफी भ्रम की स्थिति देखी जा रही है। हालांकि दोनों ही सेक्शनों में इन कानूनों को लेकर विश्लेषण किया जा रहा है। जो अगले कुछ महीनों के दौरान रूटीन में भी आ जाएगा। इस सम्बंध में स्थिति स्पस्ट करते एडीपीओ अमित राय ने बताया कि 1 जुलाई से लागू हो रहे नए कानूनों का असर पुराने अपराधों पर नहीं पड़ेगा। जो अपराध 1 जुलाई के पूर्व किए गए हो जिनका पता या जिनके आरोपी का पता 1 जुलाई के बाद चला हो या कोई आरोपी 1 जुलाई के पूर्व अपराध करके फरार हो जाए और बाद में पकड़ा जाता है। इन सारे अपराधों के विषय में स्पष्ट है कि वे सभी अपराध जो कि पूर्व 1 जुलाई के पूर्व घटित हुए है, उन सभी पर पुरानी दण्ड संहिता (भादवि)ही लागू होगी और अभियोग पत्र भी पुरानी भारतीय दण्ड संहिता के अनुसार ही प्रस्तुत किए जा सकेंगे, लेकिन 1 जुलाई के बाद घटित सभी नए अपराधों में भारतीय न्याय सहिंता( बीएनएस) की धारा लगाई जाकर अपराध पंजीबद्ध किया जाएगा। इस संबंध में बीएनएस की धारा 358 में स्पष्ट उल्लेख भी किया गया है।
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511 धाराओं की जगह होगी 358 धाराएं
भारतीय न्याय संहिता के संशोधित प्रावधान के अनुसार कई धाराओं को समाप्त भी किया गया है। श्री अमित राय के मुताबिक आईपीसी में पहले 511 धाराएं थीं, लेकिन भारतीय न्याय संहिता में 358 धाराएं ही होंगी। 21 नए अपराध जोड़े गए हैं तो 41 अपराधों में कारावास की अवधि को बढ़ाया गया है। 42 अपराधों में जुर्माना बढृाया है। इसी तरह 25 अपराधों में अनिवार्य न्यूनतम सजा शुरू की गई हैद्ध। 6 धाराओं में सामुदायिक सेवा का दंड जोड़ा गया है। इसी तरह 19 धाराओं को निरस्त कर दिया गया है।
इनका कहना…
1 जुलाई से नए कानून अस्तित्व में आ जाएंगे। इसके लिए सभी तैयारियां कर ली हैं। नए कानून और धाराएं 1 जुलाई के बाद घटित अपराधों पर ही लागू होंगी।
अमित राय, सहायक लोक अभियोजक अधिकारी बैतूल





