इन कारणों से डीडी का मंत्री बनना पहले से ही था तय
हेमंत का मप्र में क्लीन स्वीप का भी बड़ा योगदान, अच्छी छवि और हिंदी में गहरी पैठ होने का भी मिला उइके को फायदा

बैतूल। चुनाव परिणामों के बाद 4 जून को तस्वीरें सामने आ गई। देश की जनता ने दिए जनादेश में भाजपा 240 सीट ही जीत पाई थी। यानी उसे अपनी सहयोगी पार्टियों के साथ तीसरी मर्तबा सरकार बनाने की कवायद करना पड़ा। ऐसे में स्थिति स्पष्ट हो रही थी कि कई भाजपा अपनी पार्टी के सांसदों को होल्ड कर सहयोगियों को ज्यादा महत्व देगी, इसलिए पहली और दूसरी बार चुने गए सांसद को मौका नहीं मिलेगा। जैसा कि प्रधानमंत्री चौकाने वाला निर्णय लेते हैं, इस बार भी ऐसा ही हुआ।
बैतूल-हरदा-हरसूद से दूसरी बार सांसद चुने गए सांसद डीडी उइके को राज्य मंत्री बनाकर पूरे जिले को खुशी मनाने का मौका दे दिया। अब बात की जाए की आखिर डीडी कैसे मंत्री बने थे तो इसके पीछे कहीं न कहीं हिंदी पर उनकी पकड़, एक सशक्कत आदिवासी चेहरा और दी गई जिम्मेदारियों को निर्वाहण करने में जबरदस्त मेहनत को श्रेय जाता है। दूसरी बात जिला मुख्यालय के विधायक हेमंत खंडेलवाल ने लोकसभा चुनाव में प्रदेश संयोजक रहते हुए, जिस तरह से 29-0 से क्लीन स्वीप किया , कहीं न कहीं उनके जिले के सांसद को मौका देकर पार्टी ने 29 साल का मंत्रिमंडल का सूखा भी खत्म कर दिया।
रविवार दोपहर जब लोग टीवी देख रहे तब अचानक प्रधानमंत्री की चाय पार्टी में संसदीय क्षेत्र के सांसद डीडी उइके को देखकर उनका माथा ठनक गया। दरअसल चाय पार्टी में मंत्रिमंडल में शामिल होने वाले सांसद को ही प्रधानमंत्री ने आमंत्रित किया। पहले तो लोगों को यकीन नहीं हुआ लेकिन जब निज सहायक जितेंद्र रघुवंशी ने पुष्टि की तो बैतूल से लेकर पूरे संसदीय क्षेत्र में जबरदस्त उत्साह छा गया। देर शाम तक स्थिति स्पष्ट हो गई और उनके राज्यमंत्री बनते ही मिठाइयां बांटने से लेकर आतिशबाजी का सिलसिला शुरू हो गया। हालांकि मंत्री बनने की दौड़ में स्थानीय सांसद कहीं से कहीं शामिल नहीं थे, लेकिन प्रधानमंत्री ने प्रदेश के वरिष्ठ सांसदों को दरकिनार कर एक सशक्त आदिवासी चेहरे को मौका देकर बता दिया है कि वे चौकाने वाले निर्णय क्यों लेते हैं। हालांकि डीडी के मंत्री बनने के पीछे यह तीन तर्क काफी मजबूती से उनके पक्ष में आए और भाजपा के शासन काल में केंद्र से पहला मंत्री संसदीय क्षेत्र को मिल गया है।
तर्क-1: पांच वर्ष में बनाई खुद की पहचान
भले ही सांसद ने अपने पहले कार्यकाल में बड़ी उपलब्धि हासिल नहीं की हो। इसके पीछे वे अपना तर्क बता चुके हैं। इन पांच सालों में दो वर्ष कोरोना में खत्म हो गए। बचे तीन साल इस बीमारी से उबरने में लग गए। इन पांच वर्षों में उन्होंने संसद में जिले के कई ज्वलंत मुद्दों को लेकर अपना ध्यान आकर्षित किया। हिंदी में अच्छी पकड़ रखने के लिए उन्हें संसद की राजभाषा समिति का सदस्य भी मनोनीत किया।
प्रखर हिंदी वक्ता होने के कारण उन्होंने एक किताब भी लिखकर प्रधानमंत्री को भेंट की तो वे भी उनके मुरीद हुए बिना नहीं रहे। प्रधानमंत्री ने उइके को मंत्री बनाने के लिए बातों ही बातों में हरदा में हुई आमसभा में इशारा कर दिया था कि उइके जी को मिला एक वोट मोदी को जाएगा। उस वक्त इस बात को लोगों ने मामूली समझा, लेकिन रविवार को मंत्रिमंडल विस्तार हुआ और डीडी उइके का नाम सामने आया तो मोदी की यह बात सभी को याद आई।
तर्क-2: नए चेहरे को मौका, जिम्मेदारी भी बनी कारण
बैतूल सांसद उइके को मंत्रिमंडल में जगह मिलने के कई अन्य कारण भी सामने आ रहे हैं। प्रधामंत्री मोदी की गुडबुक में होने के कारण नए चेहरे को मौका देने की प्रधानमंत्री की वकालत ने प्रदेश के कई वरिष्ठ सांसदों को दरकिनार कर डीडी उइके को मौका मिल गया। मंडला सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते, रतलाम सांसद श्रीमती चौहान समेत आधा दर्जन से अधिक वरिष्ठ सांसद और नेताओं को दरकिनार करते हुए बैतूल सांसद को मंत्री बनने का अवसर दिया। यानी उनकी जिम्मेदारी और जज्बे का भी प्रमाण।
दरअसल लोकसभा चुनाव में उइके को केंद्रीय संगठन ने अपना चुनाव होने के बाद उड़ीसा की मयूरगंज विधानसभा का प्रभारी बनाया था। यहां पर उन्होंने भाजपा के पक्ष में आदिवासी सीट को बीजेडी से छिनकर लाए हैं। इस बात से भी केंद्रीय संगठन ने डीडी की प्रशंसा की और मंत्री बनने का यह कारण भी उनके लिए प्लस पाइंट बन गया।
तर्क 3: हेमंत की मेहनत का भी ईनाम मिला
प्रदेश में भाजपा द्वारा 29-0 से क्लीन स्वीप के पीछे केंद्रीय संगठन के अलावा मुख्यमंत्री डा मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा के कुशल नेतृत्व को श्रेय जाता है। यदि इसमें किसी और का योगदान है तो लोकसभा चुनाव संयोजक बनाए गए हेमंत खंडेलवाल की भूमिका की भोपाल से लेकर दिल्ली तक सराहना हो रही है। उनके जबरदस्त मेनेजमेंट का ही नजीता है कि पहली बार भाजपा ने प्रदेश की सभी 29 सीटें पर रिकार्ड जीत हासिल की। हेमंत का गृह जिला होने के कारण केंद्रीय नेतृत्व में मौका देकर स्थानीय सांसद को मंत्रिमंडल में शामिल किया है।
पिछले 29 वर्षों से बैतूल संसदीय क्षेत्र भाजपा का गढ़ बन गया है। यहां से उम्मीदवार कोई भी रहा, लेकिन जीत के मामले में सभी ने रिकार्ड तोड़ दिया। इसके बावजूद विपक्ष और बैतूल की मंत्रिमंडल में लगातार उपेक्षा हो रही है। दूसरी तरफ बैतूल में भी पिछले 19 वर्षों से भाजपा की सरकार है। केवल डेढ़ वर्ष कमलनाथ सरकार बनी तो सुखदेव पांसे को मंत्री बनाया गया, लेकिन भाजपा की सरकार ने दो बार पूरे पांच विधायक जीत हासिल करने के बाद भी मंत्रिमंडल का सूखा खत्म नहीं हुआ। यानी केंद्र और राज्य दोनों तरफ बैतूल की उपेक्षा का मुद्दा हावी होना भी इस बार बैतूल के पक्ष में गया और डीडी उइके को केंद्र में राज्य मंत्री बना दिया गया। कहा जा रहा है कि आजादी के बाद भाजपा केंद्र में भाजपा से कोई जिले में मंत्री बना है।




