Betul Today News: संस्मरण-5 अयोध्या न जाने के लिए मां ने आधा किमी दौड़ लगाई
Betul Today News: Memoir-5 Mother ran half a kilometer to avoid going to Ayodhya

Betul Today News: जब मैं महज 21 वर्ष का होने के साथ बीए दूसरे वर्ष का छात्र था। छात्र जीवन से ही अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ता के रूप में सक्रिय था। इस दौरान अयोध्या जाने के लिए भोपाल से लगातार वाहिनी निकल रही थी। मुझे जानकारी मिली थी कि एक वाहिनी में 21 कार्यकर्ता अयोध्या जाएंगे, लेकिन सबसे बड़ी समस्या थी कि जन्म देने वाली मां इसके लिए राजी नहीं हो सकती थी। आखिर 29 नवंबर 1992 को पिता के काम पर जाने के बाद चुपचाप से अपने कपड़े बैग में रखे और मां का पैर छूकर अयोध्या जाने के लिए आशीर्वाद मांगा। इसके बाद मैंने सीधे स्टेशन की ओर दौड़ लगाई। दौड़ लगाने का मकसद यह था कि मेरी मां मुझे रोकेगी, लेकिन मैं नहीं रूक पाऊ।(Betul Today News)
मुझे आज भी याद है कि मैंने जब दौड़ लगाई थी तो मां करीब आधा किमी तक मेरे पीछे दौड़ती आई, लेकिन मेरी गति तेज होने के कारण फिर वह रूक गई। जब स्टेशन पहुंचा तो बड़े भाई राम बाबू गुप्ता ने भी घर वापस जाने के लिए कहा, मैं नहीं माना तो जिद्द के आगे झूक गए। उन्होंने जेब से 500 रुपए निकालकर दिए और कहा कि मां को मैं संभाल लूंगा तू अयोध्या जा। भोपाल से ट्रेन से निकलकर 30 नवंबर को अयोध्या पहुंच गया, वहां पर उस समय देश के कोने-कोने से लाखों लोग पहुंचे थे। चारों तरफ से लोगों के सिर ही नजर आ रहे थे। उस समय अयोध्या में 15 लाख लोग एकत्रित होने के बावजूद भोजन की कमी नहीं होने दी गई। ट्रकों से कार सेवकों के लिए पूड़ी, चावल बांटे गए।(Betul Today News) कार सेवकों के रूकने के लिए खेत खाली कर दिए गए।
पांच दिनों तक तंबू में रूककर पांच दिन कैसे बीते पता ही नहीं चला। मैंने उस समय सौगंध खाई थी कि विवादित ढांचा गिरा तो हनुमान जी को ढाई किलो लड्डू का भोग चढ़ाऊंगा, इसके बाद हम लौट आए। 6 दिसंबर 1992 को सुबह प्रार्थना के बाद सरयु नदी पर स्नान किया और एक मु_ी रेत लेकर अगले पड़ाव की तैयारी शुरू की। उस दिन लाल कृष्ण आडवाणी, उमा भारती, अशोक सिंघल के भाषण चल रहे थे। इसके बाद हम विवादित ढांचा स्थल की ओर आगे बढ़े तो यहां पर लाखों की संख्या में लोग थे। एक वाहनी प्रमुख ने मुझे आगे जाने से रोक दिया तो आवेश में आकर उन्हें कह दिया कि राम धुन गाने के लिए नहीं आए। इस पर उन्होंने एक चाटा भी जड़ दिया। कुछ देर चुप रहने के बाद बहाना मारकर आगे जाने की अनुमति मांगी, जो मिल भी गई मौका मिलते ही विवादित स्थल की ओर दौड़ लगा दी। देखते ही देखते एक किमी की दूरी पंद्रह मिनट में तय कर ली। सामने जो दृश्य देखा तो हैरान था, चूंकि बाड़ेबंदी के बावजूद विवादित ढांचे तक पहुंच गए।(Betul Today News)
हम भी जोश में आकर एक पेड़ पर चढ़ गए, लेकिन पेड़ से कई लोगों के गिरने के बाद उन्हें उतार दिया। कार्यकर्ताओं ने जोश में आकर एक के बाद एक तीन गुंबद तोड़ दिए। इसके बाद ढांचा पूरा ढह गया, फिर साथियों के साथ भोपाल आ गए। वर्ष 2020 में कोविड के दौरान नर्मदा मां की चौथी परिक्रमा के बाद बैतूल जिले के मिलानपुर गांव में आना हुआ, तब से मंदिर में रहकर सेवा कर रहा हूं। चूंकि मैंने उस समय संकल्प लिया था जब अयोध्या जा रहा था। यह संकल्प मंदिर बनने के बाद पूरा होते दिख रहा है। बैतूल के ही मिलानपुर रहने के दौरान मुझे अयोध्या में राम लला की स्थापित करने का निमंत्रण मिला है। यह मेरा सौभाग्य है कि फिर अयोध्या जाने का मौका मिला।
जय-जय श्रीराम
(जैसा रविंद्र गुप्ता उर्फ भोजपाली बाबा ने सांझवीर टाईम्स को बताया )





