Betul Exit Poll : सांझवीर के एग्जिट पोल ने फिर रचा इतिहास
Betul Exit Poll : Sanjveer's exit poll again created history

पांचों सीटों पर सटीक विश्लेषण, प्रत्याशियों को जितने प्रतिशत वोट कहे थे, उतने ही मिले, प्रिंट मीडिया में अनूठा प्रयोग
Betul Exit Poll : (बैतूल)। स्थानीय अखबारों के इतिहास में जिले के सांध्यकालीन हिन्दी दैनिक सांझवीर टाईम्स ने 3 दिसंबर को चुनाव परिणाम आने के साथ ही इतिहास रच दिया। दरअसल 17 नवम्बर को मतदान के बाद पाठकों और आम लोगों के सुझाव पर पांचों विधानसभाओं के एग्जिट पोल करने का प्रयास किया था। मतदान के बाद एग्जिट पोल करना कितनी बड़ी चुनौती है, यह आसानी से समझा जा सकता है, लेकिन हमारी टीम ने पांचों विधानसभाओं के शहरी, तहसील और ग्रामीण अंचलों तक पहुंचकर इस चुनौती को स्वीकार किया। करीब एक सप्ताह तक तक 25 लोगों की सशक्त टीम ने बैतूल, आमला, घोड़ाडोंगरी, भैंसदेही, मुलताई के कस्बों में जाकर मतदान करने वाले लोगों की राय जानी। बंद बाक्स में पर्ची से किए गए अनूठे प्रयास को ग्रामीण अंचलों में भी खूब सराहा।

एक सप्ताह तक की गई मेहनत के परिणाम मतगणना के साथ शुरू हुए थे। करीब 43 हजार लोगों से राय जानने के बाद हमने बैतूल, मुलताई और आमला में भाजपा की बड़ी जीत के संकेत दिए थे। घोड़ाडोंगरी में करीबी मुकाबले में कांग्रेस को जरूर विजेता बताया, लेकिन स्थिति स्पष्ट कर दी थी कि यहां 15 सौ से 3 हजार के बीच जीत-हार का अंतर रहेगा। हालांकि यहां सांस रोकने और करीबी मुकाबले में भाजपा प्रत्याशी गंगा बाई उइके करीब 47 सौ वोटों से जीत हासिल करने में सफल रही। दूसरी ओर भैंसदेही में हमने कांग्रेस को विजेता बताया था, लेकिन यहां पर भी जीत हार का अंतर कम होने पर अवगत कराया था कि भाजपा को भी जीत का स्वाद चखने को मिल सकता है। आदिवासी अंचल में आदिवासी के वोटों का धु्रवीकरण के बाद कांग्रेस के वोट बैंक में सेंध लग गई और भाजपा को जीत हासिल हो गई।
गांव-गांव तक पहुंचना बड़ी चुनौती
एग्जिट पोल कई मायने में आसान काम नहीं है, लेकिन आम लोगों के आग्रह और एक कठिन चैलेंज स्वीकार करते हुए सांझवीर टाईम्स ने विधानसभा चुनाव में आम लोगों की नब्ज टटोलने का प्रयास किया है। देश देश में केवल इलेक्ट्रानिक मीडिया के एग्जिट पोल होते आए हैं। ऐसे में अदिवासी अंचल में सटीक एग्जिट पोल करना कितनी चुनौती भरा था। लेकिन सांझवीर टाईम्स की सशक्त टीम ने पहले शहर और तहसील फिर हर गांव तक पहुंचकर एग्जिट पोल करने का ऐसा साहस किया है जो बड़े अखबार नहीं कर सकते हैं। इसके बावजूद एग्जिट पोल निकालने पर आलोचना भी हुई है। इसे हमने सहज स्वीकार किया, लेकिन परिणाम के सामने आलोचना करने वालों की बोलती बंद हो गई।
इनका रहा योगदान
एग्जिट पोल को चुनौती के रूप में लेकर एक सप्ताह तक सांझवीर टाईम्स की पूरी टीम ने अपने प्रिय पाठकों और जिले के जिम्मेदार लोगों के आग्रह पर पूरा किया। संपादक पंकज सोनी के निर्देशन में टीम के ज्ञानदेव लोखंडे, राज कावड़कर, रितेश पवार, सर्वे टीम के लीडर रतन कंगाली, दुर्गेश मनोटे के नेतृत्व अजय उईके,बबलू वाड़िवा, यशवंत कंगाली, बलदेव मर्सकोले, मुकेश इवने, पंकज करोचे, रिंकेश इरपाचे, मुकेश इवने, अक्षय इवने, रोशन उइके, बाबूलाल दहीकर, राजेंद्र सोनारे, सुखदेव भुसुमकर, अरूण चौहान, मुकेश उइके दीपक सोनारे, राजेंद्र दहीकर, राजेश दहीकर, बबलू वाड़िवा अजय मर्सकोले, ऋषभ धुर्वे, अलकेश बिंजाड़े, मंगेश बारस्कर, दयानंद बारस्कर,सुखदेव दहीकर, शाहपुर से आशीष राठौर, भैंसदेही से शंकर राय, आठनेर से निखिल सोनी, भीमपुर से नवीन गौतम ने गांव जाकर मतदाताओं की राय के आधार पर एग्जिट पोल किया था।





