Diwali 2026: दीपों की रोशनी से जगमगाएंगे घर-आंगन, आतिशबाजी से रंगीन होगी अमावस्या की रात

दीपावली को लेकर बाजारों में उमड़ी भीड़, पूजन सामग्री से लेकर मिठाई और सजावटी सामान की जमकर हुई खरीदारी
Diwali 2026: बैतूल। रोशनी, उल्लास और खुशियों का पर्व दीपावली मनाने के लिए जिलेभर में तैयारियां अंतिम दौर में पहुंच गई हैं। रविवार को कार्तिक अमावस्या पर दीपों का यह महापर्व पारंपरिक उत्साह और धार्मिक आस्था के साथ मनाया जाएगा। शनिवार को शहर के बाजारों में दिनभर खरीदारों की भीड़ रही। पूजा सामग्री, मिठाइयों, खील-बताशे, फूलों और सजावटी सामान की दुकानों पर ग्राहकों की आवाजाही बनी रही। देर शाम तक बाजारों में चहल-पहल का माहौल दिखाई दिया।
दीपावली को लेकर घरों में भी विशेष तैयारियां की जा रही हैं। लोग घरों की साफ-सफाई, रंगाई-पुताई और आकर्षक सजावट में जुटे हैं। घरों के आंगन में रंग-बिरंगी रंगोलियां सजाई जाएंगी और शाम को शुभ मुहूर्त में भगवान गणेश एवं मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना की जाएगी। दीपावली की शुभकामनाओं का दौर भी सोशल मीडिया पर शुरू हो गया है।

मिट्टी के दीयों से सजेगा घर-आंगन
दीपावली पर मिट्टी के दीपक जलाने की परंपरा आज भी लोगों के बीच विशेष महत्व रखती है। इस अवसर पर बाजारों में मिट्टी के दीयों और लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमाओं की खूब खरीदारी हो रही है। घरों की चौखट, तुलसी चौरा और आंगन में दीप जलाकर सुख-समृद्धि की कामना की जाएगी। खील-बताशे, मिठाई और अन्य पकवानों का प्रसाद वितरित किया जाएगा। कई स्थानों पर सामूहिक रूप से लक्ष्मी पूजन के आयोजन भी होंगे।
पटाखों की गूंज से गूंजेगी दीपावली की रात
लक्ष्मी पूजन के बाद आतिशबाजी का दौर शुरू होगा। रंग-बिरंगे पटाखों और रोशनी से अमावस्या की रात जगमगा उठेगी। बच्चे और युवा दीपावली को लेकर खासे उत्साहित हैं। हालांकि पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए लोगों से ग्रीन पटाखों का उपयोग करने और ध्वनि एवं वायु प्रदूषण से बचने की अपील की जा रही है।
करंजी और सरसों तेल के दीपों की परंपरा
आदिवासी बहुल बैतूल जिले में दीपावली का अपना अलग पारंपरिक स्वरूप है। ग्रामीण अंचलों में करंजी और सरसों के तेल से दीप जलाने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। आधुनिकता के दौर में भी ग्रामीण परिवार अपनी इस परंपरा को पूरी श्रद्धा के साथ निभाते हैं। तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद परंपरागत तरीके से दीप जलाने का उत्साह बरकरार है।
प्रेम और भाईचारे का संदेश देता है पर्व
दीपावली को सुख, समृद्धि और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करने से घर में सुख-शांति और समृद्धि आती है। पांच दिनों तक चलने वाले इस पर्व का समापन भाई दूज के साथ होता है। दीपों की जगमगाहट के बीच दीपावली लोगों को अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ने, आपसी प्रेम बढ़ाने और सामाजिक सद्भाव बनाए रखने का संदेश भी देती है।




