Betul News: खनिज भंडारण प्रमाणिक, नीलामी की प्रक्रिया में आएगी तेजी
Betul News: Mineral storage certificate, auction process will speed up

तीन वर्ष में खनन संक्रियाएं की अनुमतियां प्राप्त होने पर शुरू होगा खनन, आमला विधायक के पत्र पर खनिज विभाग का जवाब
Betul News: बैतूल। यदि सब कुछ ठीक-ठाक रहा तो आने वाले समय में जिले में बड़े पैमाने पर खनिज खदानों की शुरुआत हो जाएगी। पूर्व में भी जिले के कई स्थानों पर खनिज भंडारण मिलने की पुष्टि हो चुकी है। हालांकि नई खदानें शुरू होने पर शासकीय प्रक्रिया आड़े आ रही है। पिछले दिनों आमला के विधायक डॉ योगेश पंडाग्रे ने खनिज विभाग को पत्र लिखकर अपने विधानसभा क्षेत्र में नवीन खनन गतिविधियों के बारे में भोपाल को वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराया था। इसके बाद विभाग से जो पत्र उन्हें मिला है, यह न सिर्फ आमला बल्कि पूरे जिले के लिए अच्छी खबर लेकर आया है।
जिले में खनिज संपदा का अकूत भंडारण है। इस बात की कई बार प्रमाण मिल चुके हैं, लेकिन कुछ वर्ष पहले भोपाल से जिले में पहुंचे भारतीय भू सर्वेक्षण के अधिकारियों ने विभिन्न क्षेत्रों का भ्रमण कर खनिज भंडारण प्रमाणित करने के प्रयास किए। लंबे समय तक चली प्रक्रिया के बाद जिले के कई स्थानों पर नए खनिज खदान खोले जाने का रास्ता साफ हो गया है। सबसे अधिक नई खदानें आमला और शाहपुर ब्लाक में होने की पुष्टि हुई है। इन क्षेत्रों में विभिन्न खनिजों के पड़े पैमाने पर होने की जानकारी सामने आने के बाद विभागीय स्तर पर इसे नीलाम करने की प्रक्रिया शीघ्र शुरू की जाएगी।
आमला में इन स्थानों पर बड़े पैमाने पर भंडारण
पिछले दिनों आमला के विधायक डॉ योगेश पंडाग्रे ने प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने अपने क्षेत्र में लंबे समय से खनिज सर्वेक्षण कार्य चलने की जानकारी दी थी। पत्र में उन्होंने बताया था कि सर्वेक्षण के बाद आमला क्षेत्र में कई खनिज भंडार पाए गए हैं। विधायक ने बताया कि आमला के ग्राम बड़गांव, डेहरी में बेसमेटल ब्लॉक, देहलवाड़ा में बेसमेटल,ग्राम बांसखापा, घाटावाड़ी कला में बेसमेटल ब्लॉक, ग्राम बल ढाना, खारी, बिसखान में जींक खनन ब्लॉक, घीसी में बेसमेटल खनन, मुवारिया, रिखड़ी, छिपन्या पिपरिया में बेसमेटल , ग्राम पस्तालाई माल, पस्तलाई रैयत, सोमलापुर में बेसमेटल, बड़गांव तरोड़ा कला में बेसमैटल शामिल हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री को बताया कि आमला ऊंचाई पर स्थित होने के कारण यहां की अर्थ व्यवस्था केवल कृषि पर आधारित है। इस क्षेत्र में यदि उपरोक्तानुसार खनिज खनन की गतिविधि शुरू होती है तो औद्योगिक विकास तेज होने के साथ अर्थ व्यवस्था में भी सकारात्मक सुधार आएगा। उनके पत्र के बाद खनिज विभाग ने आगामी कार्रवाई के लिए विधायक को अवगत कराया है।
पलासखेड़ी में व्हाइट क्ले 12 वर्ष पहले मिला, वन विभाग की आपत्ति से अटका काम
चौकाने वाली बात यह भी सामने आई है कि आमला के विधायक ने बताया कि भैंसदेही ब्ल्ॉाक के पलासखेड़ी में व्हाइट क्ले (सफेद मिट्टी) के खनन हेतु 2012 में अनुमति दी थी। बाद में वन विभाग की आपत्ति के कारण यहां स्वीकृत व्हाइट क्ले का काम प्रारंभ ही नहीं हो सका। चूंकि भैंसदेही जनजातीय बाहुल्य क्षेत्र है। यदि यहां पर खनन कार्य शुरू होता है तो आदिवासियों के जीवन स्तर में सुधार होने के अलावा शासन को बड़े राजस्व की प्राप्ति हो सकती है। इस संबंध में भी विधायक डॉ पंडाग्रे ने मुख्यमंत्री से आग्रह करते हुए कहा कि वन विभाग की आपत्तियों का निराकरण कर पलासखेड़ी के 40 हेक्टेयर रकबे में व्हाइट क्ले का खनन कार्य शुरू हो सके।





